अपनेपन के ज्वार और फिक्रमंदी की दूरी के बीच सजेगा भाई – बहन का प्यार

रामप्रकाश मित्तल

29 साल बाद बनेंगे कई शुभ संयोग

वैश्विक महामारी कोविड -19 के कारण त्यौहारों और उत्सवों से भरी हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक परम्परा के कई शुभ अवसर केवल औचारिकता या प्रतीकात्मक रूप से हमारे दिलो दिमाग में दस्तक देकर चुपके से निकलते जा रहे हैं। इसी बीच भाई – बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन भी 3 अगस्त को आ रहा है। वर्तमान हालात एक दूसरे से सुरक्षित दूरी बनाए रखना ही परस्पर के शुभ चिंतक होने का गवाह बन रहा है। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि इस बार भाई – बहन का प्यार अपनेपन के ज्वार और फिकरमंदी की दूरी के बीच ही सजेेेगा। साथ ही
यह अपेक्षित भी है कि जो भाई-बहन कोरोना के चलते इस बार दूर हैं, वो जल्दबाजी न करें, जहां हैं वहीं से रक्षाबंधन मनाएं। वीडियो कॉल, ऑडियो कॉल के जरिए एक दूजे को देखें, दुआएं करें, लम्बी उम्र की शुभ कामना करें।

इस रक्षाबंधन को श्रावणी पूर्णिमा के साथ महीने का श्रावण नक्षत्र भी पड़ रहा है, इसलिए पर्व की शुभता और बढ़ जाती है। श्रावणी नक्षत्र का संयोग पूरे दिन रहेगा। साथ ही भद्रा और ग्रहण का साया भी रक्षाबंधन पर नहीं पड़ रहा है।

इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान योग के साथ ही सूर्य शनि के समसप्तक योग, सोमवती पूर्णिमा, मकर का चंद्रमा श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग बन रहा है। इसके पहले यह संयोग साल 1991 में बना था। इस संयोग को कृषि क्षेत्र के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। रक्षाबंधन से पहले 2 अगस्त को रात्रि 8 बजकर 43 मिनट से 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 28 मिनट तक भद्रा रहेगी। इसके बाद पूरे दिन राखी बांध सकते हैं। इसके साथ ही शाम 7 बजकर 49 मिनट से दीर्घायु कारक आयुष्मान योग भी लग जाएगा।

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