रक्षाबंधन : एक निवेदन भाई – बहनों से

रामप्रकाश मित्तल

राखी के त्याेहार पर राखीयाें की ख़रीदी भारत में करीब 1400कराेड़ की हाेती हैं। जिसमें एक अनुमान के मुताबिक चीन 1275 कराेड़ रूपया भारत सें कमा कर ले जाता है।
बहनें 200/- से1500/- की राखियाँ ख़रीद कर भाईयों काे बॉंधती हैं! जब की राखी एक तीन रंग की माेली धागे सें प्रारंम्भ हुवा त्याेहार था! जिसकाे राखियाँ बनाने वालाें व चीन के मेन्युफेक्चरर 2000/ की राखी तक ले गये है!

आप हम देखते हैं कि यह एक भावनाओं का त्याेहार हैं! बहनें लंम्बी दूरी सें भाई काे राखी बांधनें आती हैं! राखी बांधनें का मतलब है ~ भाई, तू मेरी बुरे समय में रक्षा करना! रक्षाबंधन पर भाई भी अपनी बहनाें काे उपहार रूप में काेई चीज व नगद देता हैं!

लेकिन आजकल 50% देखा गया हैं कि बहन की राखी की लागत ही उपहार में नहीं निकलती हैं! इसलिए हम कुछ ज़्यादा बहन काे दे नहीं सकते ताे कम से कम उनकाे ज़्यादा खर्च ताे न करवायें!*

सभी भाईयों काे प्रण करना चाहियें कि हम सिर्फ बहन सें माेली धागा ही बंधायेगें और जाे देना हैं बहन काे वह बढ़ाकर देते रहेगें!

आप हम देखते हैं कि राखियाँ हम सब 2 या 4 घंटे या शाम तक ही बाँध पाते हैं! और बहने रूपया उस राखी पर खर्च करती है औऱ हम 2/3घन्टें में स्क्रेप कर दते है ।

बहनों अपन माेली धागा या रेशम की सुन्दर गुँथी राखी बाँधे ताे आपका बीरा (भाई )साल भर भी बांधे रखेगा! और भारत का रुपया भारत के लोगो के काम आयेगा ।

बहनों सहमत है तो लाइक करे और सभी को जागरूक करने का प्रयास करें।

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