कोविड-19 महामारी के दौरान 78% भारतीय एमएसएमई बंद हुए : स्पोक्टो

 मुंबई। कोरोना वायरस महामारी ने कारोबारों, संस्थानों और समाज पर विनाशकारी प्रभाव डाला है। इस बीच राजस्व न मिलने की वजह से और जीरो रेवेन्यू जनरेशन के कारण 78% एमएसएमई को ऑपरेशंस बंद करना पड़ा हैं। इस बात का खुलासा भारत के प्रमुख बड़े डेटा एनालिटिक्स-बेस्ड बैंकिंग और वित्तीय सेवा कंपनी में से एक स्पोक्टो द्वारा किए गए ‘द ग्राउंड ट्रूथ- वॉयस ऑफ इंडियन बॉरोअर्स’ नाम के व्यापक अध्ययन से हुआ है। अध्ययन से ग्राहकों को सहयोग की आवश्यकता, मॉरेटोरियम को लेकर जागरूकता और उसकी समझ और भुगतान राशि पर इसके प्रभाव की जानकारी दी गई है।

महामारी ने काम कर रहे अनगिनत पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर कम किए हैं। इसे देखते हुए यह अध्ययन रिटेल लोन अकाउंट होल्डर्स से प्राप्त डेटा जमीनी हकीकत को प्रस्तुत करता है, उन्हें कैसा समर्थन चाहिए, उनकी वर्तमान जागरूकता और मॉरेटोरियम की समझ व भुगतान राशि पर इसके प्रभाव के बारे में प्रासंगिक जानकारी देता है।

अध्ययन में महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं। 59% उपभोक्ताओं को कोविड-19 के कारण आय का पूरी तरह नुकसान हुआ है। मौजूदा वर्कफोर्स के 34% कर्मचारियों ने अपनी नौकरी गंवा दी है। राजस्व न मिलने की वजह से 78% एमएसएमई को जीरो रेवेन्यू जनरेशन के कारण ऑपरेशंस बंद करना पड़ा हैं।

कुल खाताधारकों में से 76% ने छोटे-छोटे लोन लिए जिनकी ईएमआई 50,000 रुपये तक है। जिन लोन का रीपेमेंट गड़बड़ाया है, उनमें सुरक्षित श्रेणी की तुलना में असुरक्षित श्रेणी के लोन ज्यादा हैं। 78% उपभोक्ताओं ने प्रारंभिक मॉरेटोरियम पीरियड (मार्च से मई) चुना, जिसका अर्थ है कि 22% या तो स्वेच्छा से ऑप्ट आउट के लिए चुने गए या बैंक के मॉरेटोरियम प्रस्ताव को नहीं चुना। 75% बॉरोअर्स ने मॉरेटोरियम को लेकर अधिक स्पष्टता और शिक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। 64% बॉरोअर्स ने पुष्टि की कि उन्हें पता है कि मॉरेटोरियम क्लॉज का लाभ उठाने पर उन पर कितना ब्याज लग सकता है।

लगभग 28% उपभोक्ता अपने बैंकों से बातचीत को लेकर असंतुष्ट थे, केवल 46% ही ग्राहकों को मॉरेटोरियम की शर्तों को समझाने पर बैंकों के प्रयासों से संतुष्ट हैं। 37% उपभोक्ताओं ने कहा कि उन्हें अगले 12 महीनों में वित्तीय व्यय के लिए आवश्यक लोन के रूप में वित्तीय प्रणाली से समर्थन की आवश्यकता है।

स्पोक्टो सॉल्युशंस के संस्थापक, सीईओ सुमीत श्रीवास्तव ने बताया के,’पूरी दुनिया में वर्ष 2020 सभी उद्योगों और पेशेवरों के लिए ब्लैक स्वान इवेंट साबित हुआ है। इस अवधि में मूल्यवान टेक-अवे भी मिले हैं, अर्थात- बैंकिंग और कर्ज देने वाले इकोसिस्टम को अपनी एंगेजमेंट नीतियों और रणनीतियों को फिर से विकसित करना होगा क्योंकि उनके ग्राहक आवंटित समय-सीमा में लोन रीपेमेंट करने की स्थिति में नहीं हैं।’

उन्होंने आगे बताया के ‘बैंकों को शॉर्ट टर्म डिफॉल्टर कम करने के बजाय लंबी अवधि के ग्राहकों को महत्व देना चाहिए। बैंकों को भी लोन डिस्बर्समेंट के डिजिटल और कुशल रास्तों के एडवांस एडॉप्शन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को आकर्षित करने और एंगेज करने पर फोकस करना चाहिए। यह न केवल बीमार क्षेत्र को नियत समय में अपने पैरों पर वापस खड़ा करने में मदद करेगा, बल्कि भयावह संक्रमण की मार से उबरने और पुनर्निर्माण में भी मदद करेगा।’

Check Also

पश्चिम रेलवे द्वारा विरार और दहानू रोड के बीच अनिवार्य सेवा स्टाफ हेतु दो अतिरिक्त मेमू सेवाएँ चलाने का निर्णय

मुंबई। पश्चिम रेलवे ने अत्यावश्यक सेवाओं के कर्मचारियों के लिए एक जोड़ी अतिरिक्त मेमू सेवाएँ …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *