चक्रवाती तूफान के बाद पश्चिम बंगाल और ओडि़सा की मदद में केंद्र ने बढ़ाए हाथ

 नई दिल्ली। चक्रवाती तूफान के बाद पुनर्वास कार्यों के लिए पश्चिम बंगाल को एक हजार करोड रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भीषण समुद्री तूफान से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट में हुई प्रशासनिक बैठक के बाद यह घोषणा की।

प्रधानमंत्री ने बताया कि एक केन्द्रीय दल जल्द ही नुकसान का जायजा लेने के लिए राज्य में पहुंचेगा।

इससे पहले, प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी के साथ राज्य के चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने ओडि़सा के समुद्री तूफान से तबाह इलाकों के लिए पांच सौ करोड़ रुपये की अग्रिम वित्‍तीय सहायता की घोषणा की है। श्री मोदी ने आज ऑमपुन तूफान से क्षतिग्रस्‍त इलाकों का हवाई दौरा करने के बाद इसकी घोषणा की। तूफान से हुए विनाश का जायजा लेने के बाद उन्‍होंने राज्‍यपाल गणेशी लाल और मुख्‍यमंत्री नवीन पटनायक के साथ समीक्षा बैठक भी की।

प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। उन्‍होंने पीडि़तों को तत्‍काल राहत सुनिश्चित करने और के साथ-साथ हर संभव सहायता का भी आश्‍वासन दिया। उन्‍होंने कहा कि राज्‍य सरकार से विस्‍तृत रिपोर्ट मिलने के बाद यह सहायता पुनर्वास उपायों के लिए दी जायेगी।

प्रधानमंत्री ने जगतसिंह पुर, केन्‍द्रापाड़ा, भद्रक, बालेश्‍वर, जाजपुर और मयूरभंज जिलों का करीब 90 मिनट तक हवाई दौरा किया। जानमाल के नुकसान पर गहरा दु:ख व्‍य‍क्‍त करते हुए मोदी ने कहा कि जब देश कोरोना वायरस के रूप मे वैश्‍विक महामारी से निपटने में लगा है, तो देश के कुछ भागों में महाचक्रवात कि विनाशलीला सचमुच चिंताजनक है। उन्‍होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की ओडि़सा की सुस्‍थापित प्रक्रिया ने कई लोगों की जान बचाई है।

ओडिशा में साइक्लोन का जायज़ा लेने के बाद प्रधानमंत्री का सम्‍बोधन, ” पूरी दुनिया एक तरफ कोरोना वायरस के कारण जो समस्‍या पैदा हुई है, जिंदगियां बचाने के लिए दुनिया जंग लड़ रही है। ऐसी संकट की घड़ी में हिन्‍दुस्‍तान के लिए केंद्र सरकार हो या राज्‍य सरकारें हों, सभी डिपार्टमेंट और एक प्रकार से सभी नागरिक, ये कोरोना वायरस की लड़ाई में पिछले दो-ढाई महीने से लगे हुए हैं।

ऐसे समय साइक्‍लोन का इतना बड़ा संकट और वो भी सुपर-साइक्‍लोन, बहुत ही चिंता का विषय था। बंगाल जाते-जाते वो उड़ीसा को भी कितना नुकसान कर पाएगा, ये हमेशा चिंता का विषय बना रहा। लेकिन जिस प्रकार से यहां पर व्‍यवस्‍थाएं institutionalize  हुई हैं, गांव तक नागरिकों को क्‍या करना है ऐसे संकट के समय, इसकी भली-भांति जानकारी होने के कारण यहां जीवन बचाने में बहुत बड़ी सफलता मिली है। और इसके लिए उड़ीसा के नागरिक, उड़ीसा का प्रशासन और उड़ीसा के मुख्‍यमंत्री श्रीमान नवीन बाबू उनकी पूरी टीम अभिनंदन के अधिकारी हैं।

लेकिन जब इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा आती है, तब संपत्ति का नुकसान तो होता ही है। पश्चिम बंगाल की तुलना में उड़ीसा में उतना नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन जाते-जाते भी वो पूंछ पटक करके तो जाता ही है, ऐसे प्रकार का संकट। और इसलिए हाउसिंग में, एग्रीकल्‍चर में, पॉवर में, कॉम्‍युनिकेशन में, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में जो नुकसान हुआ है तो मैंने आज पूरा‍ detail review लिया है। राज्‍य सरकार ने भी विस्‍तार से मेरे सामने सारी बातें रखी हैं।

यहां के सरकार की व्‍यवस्‍था की तरफ से बहुत ही जल्‍द उसका आकलन करके रिपोर्ट भारत सरकार को मिलेगी। भारत सरकार की टीम भी तत्‍काल यहां पहुंचेगी और पूरी परिस्थिति का review कर-करके लंबे समय के लिए relief हो, restore करने की बात हो, rehabilitation की बात हो; इन सारी चीजों को प्राथमिकता देते हुए काम आगे बढाया जाएगा।

लेकिन तत्‍काल आवश्‍यकता को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की तरफ से 500 करोड़ रुपया एडवांस व्‍यवस्‍था के रूप में देने का हमने निर्णय किया है। और बाकी आवश्‍यकताएं एक बार complete survey होने के बाद, rehabilitation की पूरी योजना बनने के बाद भारत सरकार भी कंधे से कंधा मिला करके उड़ीसा के विकास की यात्रा में और इस संकट की घड़ी से बाहर निकलने के काम में पूरी तरह मदद करेगी। “

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