अक्षय तृतीया: तर्पण और दान का दिन

 साढ़े तीन मुहुूर्तों में से एक पूर्ण मुहूर्त ‘अक्षय तृतीया’ पर तिलतर्पण करना, उदकुंभदान (उदककुंभदान) करना, मृत्तिका पूजन तथा दान करने का प्रघात है । इसका अध्यात्मशास्त्रीय आधार सनातन संस्था द्वारा संकलित लेख में समझ लेते हैं । धर्म द्वारा प्रस्तुत लेख में बताया यह अध्यात्मशास्त्र सामान्य काल के लिए है । सबकुछ अनुकूल है एवं धर्म के अनुसार आचरण कर सकें, यह ‘संपत्काल ’ है ।

यहां एक महत्त्वपूर्ण सूत्र यह है कि हिन्दू धर्म ने आपातकाल के लिए धर्माचरण में  कुछ पर्याय बताए हैं । इसे ‘आपद्धर्म’ कहते हैं । आपद्धर्म अर्थात ‘आपदि कर्तव्यो धर्मः ।’ इसका अर्थ है, आपदा में आचरण किया जानेवाला धर्म । वर्तमान में कोरोना प्रादुर्भाव की पृष्ठभूमि पर पूरे देश में लॉकडाउन है । इसी काल में अक्षय तृतीया आ रही है, इसलिए संपत्काल में बताए कुछ धार्मिक कृत्य इस समय हम नहीं कर पाएंगे । इस दृष्टि से प्रस्तुत लेख में धर्माचरण के रूप में क्या कर सकते हैं, इसका विचार भी किया गया है । यहां महत्त्वपूर्ण सूत्र यह है कि हिन्दू धर्म ने किस स्तर तक जाकर मानव का विचार किया है, यह सीखने के लिए मिलता है । इससे हिन्दू धर्म की एकमेवाद्वितीयता ध्यान में आती है ।

१ अ. तिथि

‘वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया’

१ आ. महत्त्व

१. ‘अक्षय तृतीया’ कृतयुग अथवा त्रेतायुगका आरंभदिन है ।

२. अक्षय तृतीया की संपूर्ण अवधि, शुभ मुहूर्त ही होती है । इसलिए, इस तिथिपर धार्मिक कृत्य करनेके लिए मुहूर्त नहीं देखना पडता ।

३. इस तिथि पर हयग्रीव अवतार, नरनारायण प्रकटीकरण तथा परशुराम अवतार हुए हैं ।

४. इस तिथि पर ब्रह्मा एवं श्रीविष्णु की मिश्र तरंगें उच्च देवता लोकों से पृथ्वी पर आती हैं । इससे पृथ्वीपर सात्त्विकता की मात्रा १० प्रतिशत बढ जाती है । इस कालमहिमा के कारण इस तिथिपर पवित्र नदियों में स्नान, दान आदि धार्मिक कृत्य करने से अधिक आध्यात्मिक लाभ होते हैं ।

५. इस तिथि पर देवता-पितर के निमित्त जो कर्म किए जाते हैं, वे संपूर्णतः अक्षय (अविनाशी) होते हैं । (संदर्भ : ‘मदनरत्न’)

१ इ. अक्षय तृतीया पर करने योग्य कृत्य

१ इ १. पवित्र जल में स्नान

इस दिन तीर्थक्षेत्रमें स्नान करना चाहिए । यदि ऐसा असंभव हो, तो बहते जलकी नदी में कहीं भी स्नान करें ।

१ इ २. श्रीविष्णुपूजा, जप एवं होम

अक्षय तृतीया के दिन सतत सुख-समृदि्ध प्रदान करनेवाले देवता की कृतज्ञता भाव से उपासना करनेपर हम पर उनकी कृपादृषि्ट सदा बनी रहती है । इस दिन श्रीविष्णु सहित वैभवलक्ष्मी प्रतिमा का श्रद्धापूर्वक तथा कृतज्ञता भाव से पूजन करना चाहिए । इस दिन होम-हवन एवं जप-तप में समय व्यतीत करना चाहिए ।

१ इ २ अ. अक्षय तृतीया के दिन श्रीविष्णु का तत्त्व आकर्षित एवं प्रसारित करनेवाली सात्त्विक रंगोलियां बनाना

१ इ ३. तिलतर्पण

तिलतर्पण का अर्थ है, देवता एवं पूर्वजों को तिलयुक्त जल अर्पित करना । ‘तिल’ सात्त्विकता का प्रतीक है, तो ‘जल’, ब्रह्मांड के शुद्ध स्रोत का प्रतीक है ।

१ इ ४. दान

अक्षय तृतीया पर सुपात्र दान करे !

अक्षय तृतीया पर किया हुआ दान एवं हवन अक्षय रहता है, अर्थात उनका फल अवश्य मिलता है ।

१ इ ४ अ. सुपात्र व्यक्ति को क्यों दान करना चाहिए ?

अक्षय तृतीया पर किए गए दान से व्यक्ति का पुण्य-भंडार बढता है । पुण्य से व्यक्ति को स्वर्ग प्राप्त होता है । परंतु भोग-भोग कर स्वर्गसुख समाप्त होने पर पृथ्वी पर पुनः जन्म लेना पडता है । मनुष्य का वास्तविक ध्येय, ‘पुण्य अर्जित कर स्वर्गसुख भोगना’ नहीं, अपितु ‘पाप-पुण्य के आगे जाकर ईश्वर को प्राप्त करना’ है । इसलिए, मनुष्य के लिए सुपात्र व्यक्ति को दान करना आवश्यक होता है ।

संत, धार्मिक कार्य करनेवाले व्यक्ति, समाज में अध्यात्म का प्रसार करनेवाली संस्थाएं तथा राष्ट्र एवं धर्म की जागृति का कार्य करनेवाले धर्माभिमानियों को धन अर्पित करना, सुपात्र दान है ।

१ इ ५. मृत्तिकापूजन, मिट्टी को जैविक बनाना (केंचुआ उत्पन्न करना), बीज बोना एवं वृक्षारोपण

‘चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा’ तिथि स्वयं में एक शुभमुहूर्त है । इस दिन खेत जोतना और उसकी निराई का कार्य अक्षय तृतीया तक पूरा करना चाहिए । निराई के पश्चात, अक्षय तृतीया के दिन खेत की मिट्टी की कृतज्ञता भाव से पूजा करनी चाहिए । इसके पश्चात, पूजित मिट्टी को जैविक बनाकर उसमें बीज बोएं । अक्षय तृतीया के मुहूर्त पर बीज बोने को आरंभ करने से उस दिन वातावरण में सक्रिय दैवी शक्ति बीज में आ जाती है । इस से कृषि-उपज बहुत अच्छी होती है । इसी प्रकार से अक्षय तृतीया के दिन फल के वृक्ष लगाने पर वे अधिक फल देते हैं । 
 

१ इ ६. हलदी-कुमकुम

स्त्रियों के लिए यह दिन महत्त्वपूर्ण होता है । चैत्र मास में स्थापित चैत्रगौरी का इस दिन विसर्जन करना होता है । इस निमित्त वे हलदी-कुमकुम (एक प्रथा) भी करती हैं ।’ 

२. आपदा में धर्म का आचरण कैसे करें ?

वर्तमान काल में हम घर से बाहर नहीं जा सकते । इस अनुषंग से आपद्धर्म के भाग के रूप में आगे दिए कृत्य कर सकते हैं –

१. पवित्र स्नान : हम घर में ही गंगा का स्मरण कर स्नान करें, तो गंगास्नान का हमें लाभ होगा । इसलिए आगे दिए श्‍लोक का उच्चारण कर स्नान करें :

गंगेच यमुने चैव गोदावरी सरस्वती |
नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन सन्निधि कुरु ||

२. सत्पात्र को दान : वर्तमान में विविध ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध हैं । अतः अध्यात्मप्रसार करनेवाले संतों अथवा ऐसी संस्थाआें को हम ऑनलाइन अर्पण कर सकते हैं । घर से ही अर्पण दिया जा सकता है ।

३. उदकुंभ का दान : शास्त्र है कि अक्षय तृतीया के दिन उदकुंभ दान करें । इस दिन यह दान करने के लिए बाहर जाना संभव न होने के कारण अक्षय तृतीया के दिन दान का संकल्प करें एवं शासकीय नियमों के अनुसार जब बाहर जाना संभव होगा, तब दान करें ।

४. पितृतर्पण : पितरों से प्रार्थना कर घर से ही पितृतर्पण कर सकते हैं ।

५. कुलाचारानुसार अक्षय तृतीया पर किए जानेवाले धार्मिक कृत्य : उपरोक्त कृत्यों के अतिरिक्त कुलाचारानुसार अक्षय तृतीया पर कुछ अन्य धार्मिक कृत्य करते हों, तो देख लें कि वे वर्तमान शासकीय नियमों में बैठते हैं न ।

संदर्भ : सनातन संस्था का ग्रंथ ‘त्यौहार, धार्मिक उत्सव एवं व्रत’ 

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