गोदरेज समूह लोगों से मच्छर-जनित रोगों को ले कर सावधानी अपनाने का किया आग्रह

मुंबई: विश्व मलेरिया दिवस पर, गोदरेज समूह लोगों से कोविड-19 महामारी के दौरान मच्छर-जनित रोगों, जैसे मलेरिया, डेंगू आदि के खिलाफ एहतियाती उपाय करने का आग्रह किया है. नेशनल वेक्टर-बोर्न डिजिज कंट्रोल प्रोग्राम (राष्ट्रीय वेक्टर-जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम) के अनुसार, साल 2019 में भारत में 3,34,693 मलेरिया के मामले देखे गए. इस साल, फरवरी तक 19,980 मलेरिया के मामले सामने आ चुके हैं. हर साल मलेरिया और डेंगू मई से ले कर अगस्त के बीच अधिक कहर बरपाता है. इन बीमारियों से लडने की तैयारी अप्रैल से शुरू हो जाती है. देश में कोरोना वायरस के 23,000 से अधिक ममले सामने आ चुके हैं. इससे निपटने के लिए सरकार और स्वास्थ्य सेवा इसमें व्यस्त है. हालांकि, मौजूदा कोरोना महामारी के बीच, भारत मलेरिया और डेंगू की अनदेखी भी नहीं कर सकता. मार्च में, विश्व स्वास्थ्य संगठन कोविड-19 महामारी के संदर्भ में मलेरिया सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए सलाह जारी किया है.
गोदरेज समूह ने अधिकारियों से घरेलू स्तर पर लोगों को सशक्त बनाने, एहतियाती उपायों का इस्तेमाल करने और किसी भी मच्छर जनित बीमारी के संभावित हमले से खुद को बचाने का आग्रह किया है. वर्तमान लॉकडाउन के कारण, केवल आवश्यक उत्पादों की बिक्री की ही अनुमति है, जिसमें मच्छरों से सुरक्षा प्रदान करने वाले समाधान शामिल नहीं हैं। इस प्रकार, मच्छर को दूर भगाने वाले उपकरण, साधन जैसे मच्छर अगरबत्ती, क्रीम, लिक्विड मशीन आदि को आवश्यक सामान के दायरे में लाया जाना चाहिए. यह घरेलू कीटनाशक उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा और लॉकडाउन पूरी तरह से हटाए जाने तक परिवारों तक आसानी से पहुंच पाएगा.

निवारक उपायों की आवश्यकता के बारे में बात करते हुए, सुनील कटारिया, सीईओ-इंडिया एंड सार्क, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल), ने कहा, “कोविड-19 ने लोगों में भारी दहशत पैदा कर दी है. हम इस महामारी से निपटने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं, लेकिन हमें मलेरिया और डेंगू के बढ़ते खतरे को नहीं भूलना चाहिए. भारतीय परिवार मुख्य रूप से मच्छर भगाने के लिए अगरबत्ती, क्रीम, लिक्विड मशीन आदि पर निर्भर हैं, ताकि वे खुद को मच्छर-जनित रोगों से सुरक्षित रख सकें। इन घरेलू कीटनाशकों को आवश्यक श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया जाना चाहिए.”

उद्योग जगत मलेरिया की रोकथाम के सरकारी प्रयासों का समर्थन कैसे कर सकता, इस बारे में बोलते हुए, जयंत देशपांडे, सचिव और निदेशक, होम इंसेक्ट कंट्रोल असोसिएशन (एचआईसीए: घरेलू कीटनाशक क्षेत्र के उद्योगों का एक निकाय) ने कहा,“एक उद्योग के रूप में, हम मलेरिया और कोविड-19 से निपटने में सरकार या स्थानीय निकायों की पहल की सराहना करते हैं और समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. स्थानीय निकायों ने मानसून तैयारी पर काम शुरू कर दिया है और निवारक समाधानों पर काम कर रहे हैं, जो वेक्टर-जनित रोगों के लिए फुलप्रूफ नहीं हो सकते हैं. घरेलू कीटनाशक उपकरण, जैसे मच्छरदानी, मैट, कॉइल, लिक्विड वेपराइज़र जैसे आवश्यक सामान किराने की दुकान, मेडिकल स्टोर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध करा कर उपभोक्ताओं को सुरक्षा हासिल करने में मदद करनी चाहिए। यह कहने की जरूरत नहीं है कि सुचारू आपूर्ति-श्रृंखला, विनिर्माण और व्यापार भागीदारों से माल की आपूर्ति समय पर डिलीवरी देने में उद्योग की मदद करेंगे. इस संबंध में एचआईसीए ने सरकार से अनुरोध किया हुआ है, जो सरकार के पास लंबित है.”
नीरज जैन, कंट्री-डायरेक्टर, पाथ ने राज्य स्तर पर लगातार मच्छरों की रोकथाम के प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “कोरोना वायरस महामारी ने हमें संक्रामक रोग प्रबंधन और निगरानी में निवेश के महत्व के बारे में सिखाया है. केरल और कोलकाता जैसे कई स्थानों पर सरकारी निकायों ने वेक्टर-जनित रोगों के प्रसार को नियंत्रित करने के उपायों को अपनाया है. यह एक ऐसी बात है, जिसे पूरे देश में लागू किए जाने की आवश्यकता है. भारत में, अप्रैल और मई में वेक्टर नियंत्रण उपायों को आम तौर पर लागू किया जाता है, क्योंकि जून से शुरू होने वाले वेक्टर आक्रामक तरीके से फैलते हैं. वर्तमान में देश लॉकडाउन में है और लोग घर पर हैं. हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि वे मच्छरों से सुरक्षित रहे.”

2030 तक मलेरिया मुक्त भारत का समर्थन करने और वेक्टर जनित बीमारियों, जैसे मलेरिया से होने वाली मृत्यु दर को कम करने के लिए गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स द्वारा शुरू की गई परियोजना, ईएमबीईडी (मच्छर-जनित बीमारियों का उन्मूलन) के महत्व को सामने लाने के लिए समूह ने एक डिजिटल फिल्म भी रिलीज की है. वर्तमान लॉकडाउन के संदर्भ में ये फिल्म ईएमबीईडी के स्वयंसेवकों, आशा कार्यकर्ताओं और ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं की भूमिका पर प्रकाश डालता है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे ये कार्यकर्ता और स्वयंसेवक मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के घर-घर जा कर लोगों तक कोविड-19 रोकथाम पर संदेश फैला रहे हैं और लोगों को मलेरिया से सुरक्षित रहने के लिए तैयार भी कर रहे हैं.

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