अनुकरणीय है अग्रवाल समाज में प्री-वेडिंग और कोरियोग्राफी पर बंदिश की मुहिम

सुनने में आया है कि राजस्थान अग्रवाल समाज ( हिंडौन सिटी, महावीरजी, दौसा, भरतपुर अलवर, करोली, गंगापुर, सवाईमाधोपुर, देवली, कोटा, बांरा) ने शादी में प्री-वेडिंग और कोरियोग्राफी पर पूर्ण रूप से बंदिश लगा दी है । यह नियम 01/03/2020 से लागू हो गया है ।

अब जानिए यह बंदिश लाने की वजह..

प्री वेडिंग वास्तव में समाज के अंदर एक नया प्रदूषण हैं।प्री वेडिंग – यानी भारतीय संस्कृति के संपन्न घरेलू परिवारों में पश्चिमी संस्कृति का आगमन । पिछले 3 -4 वर्षों से देश में भारतीय संस्कृति से होने वाले विवाह समारोह में एक नया प्रचलन सामने आया हैं, जिसको वर्तमान में बडे परिवारों द्वारा आयोजित किया जा रहा हैं, जो समाज के अंदर रीढ़ की हड़्ड़ी कहें जाते हैं। उस प्रोग्राम का नाम हैं – प्री वेडिंग । इसके तहत होने वाले दूल्हा – दुल्हन अपने परिवारजनों की सहमति से शादी से पूर्व फ़ोटो ग्राफर के एक समूह को अपने साथ में लेकर देश के अलग – अलग सैर सपाटो की जगह ,बड़ी होटलो, हेरिटेज बिल्डिंगों, समुन्द्री बीच व अन्य ऐसी जगहों पर जहाँ सामान्यतः पति पत्नी शादी के बाद हनीमून मनाने जाते हैं। वहां जाकर अलग – अलग और कम से कम परिधानों में एक दूसरे की बांहों में समाते हुए वीडियो शूटिंग करवाते हैं। और फिर उसी वीडियो फ़ोटो ग्राफी को शादी के दिन एक बड़ी सी स्क्रीन लगाकर। जहाँ लड़की और लड़के के परिवार से जुड़े तमाम रिश्तेदार मौजूद होंते हैं। सबकी  उपस्थिति में सार्वजनिक रूप से उस कपल को वह सब करते हुए दिखाया जाता हैं, जिनकी अभी शादी भी नहीं हुई हैं और जिनको जीवन साथी बनने के साक्षी बनाने और उन्हें आशीर्वाद देने के लिये ही सगे संबंधियो समाज और सामाजिक लोगो को वहा बुलाया जाता हैं।

लेकिन यह क्या गेट के अंदर घुसते ही जो देखने को मिलता हैं। वह शर्मसार करने वाला होता हैं। जिस भावी कपल को हम वहाँ आशीर्वाद देने पहुँचते हैं। वह कपल वहां पहले से ही एक दूसरे की बाहो में झूल रहे होंते हैं।और सबसे बड़ी बात यह हैं कि यह सब दोनों परिवारो की सहमति से होता हैं। इन सब सच्चाई को देखकर एक विचार मन में आता है। जब सब कुछ हो चुका हैं तो आखिर हमें यहाँ क्यों बुलाया गया हैं।

यह शुरुआत अभी उन घरानों से हो रही हैं। ऐसे बड़े परिवारों के ऐसी शादियों को जो अपने पैसों के बल पर इस प्रकार की गलत चलन को बढ़ावा देकर समाज के छोटे तबके के परिवारो को संकट में डाल रहे हैं।

मेरा समाज के उन सभी सभ्रांतजनों से अनुरोध हैं कि – अपने- अपने समाज में ऐसी पश्चिमी संस्कृति को बढ़ावा देने वाले परिवारों से ऐसी प्रवृत्ति को बंद करने का अनुरोध करें। अन्यथा ऐसी शादियों का सामाजिक रूप से खुलेआम बहिष्कार करें। तब ही ऐसे गंदे चलन पर रोक लगना संभव हो सकेगा। अन्यथा ऐसी संस्कृति से आगे चलकर समाज का इतना बड़ा नुकसान होंगा जिसकी भरपाई कई पीढ़ियों तक करना संभव नहीं हो सकेंगा। कुछ परिवारों की वजह से शादी जैसे पवित्र बंधन पर शादी से पूर्व ही एक बदनुमा दाग लगेगा। जिसका खामियाजा समाज के छोटे तबके को भुगतना पड़ेंगा।जिसकी परिणीति में शादी से पूर्व सम्बन्ध टूटना या शादी के बाद तलाक की संख्या में वृद्धि के रूप में होंगी। जरूर सोचे एवं विचार करें कि आप और हम इतने गंदे काम का समर्थन क्यों कर रहे हैं?

इसलिए बंद करें यह महिला संगीत और नाच – गाने

महीने दो महीने तक बंद कमरे में एक्शन सिखाने के बहाने कमर में हाथ डालकर नचाते हैं आपकी बहू – बेटीयों के साथ … आखिर क्या हांसिल होता हैं… शादी ब्याह में स्टेज पर कुछ ठुमके लगाने से… क्या वे नृत्य किसी राष्ट्रीय नृत्य के आसपास भी होते हैं…… जरा विचारें,
फिर क्यों परिवार के लोग नृत्य के नाम पर कोरियोग्राफर की मदद लेकर अपने घर की इज्ज़त दांव पर लगाने में फक्र अनुभव कर रहें हैं…

वैसे शालीनता पूर्ण पारंपरिक नृत्य भी परफोर्मिंग होता तो भी सुन्दर होता हैं… ये अपना नाम बदल कर आने वाले कोरियोग्राफर , और उसके दोस्त???

क्या उचित हैं ये नाच – गाने और कोरियोग्राफर रखना , क्या पैसा इसीलिए कमाया था.. कौन और कितने समय याद रखता हैं कोई इन.. लटके झटकों को.. ? इसलिए सभी समाज के अग्रणी इस पहलू पर विशेष ध्यान दें और फैशन के नाम पर बढ़ रही असभ्यता को फैलने से रोककर अपनी भावी पीढ़ी को गौरवशाली विरासत दें।

प्रस्तुति: रामप्रकाश मित्तल

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