“ककसाड़” अवार्ड-2019, से सम्मानित हुए आचार्य अमरनाथ त्यागी

शोध परक ग्रंथ “छत्तीसगढ़ की रामायण” के लिए दिया गया यह प्रतिष्ठित अवार्ड

 रायपुर । छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य मंडल , जनजातीय सरोकारों की मासिक पत्रिका “ककसाड़”,समग्र आदिवासी एवं औषधीय पौध विकास संगठन “संपदा” एवं “जनजातीय शोध एवं कल्याण संस्थान (जशोक)” के संयुक्त तत्वावधान में सिविल लाइन स्थित वृंदावन हॉल में होली मिलन के पावन अवसर पर भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर आचार्य अमरनाथ त्यागी का डॉ राजाराम त्रिपाठी एवं उनके सहयोगियों ने वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य अमरनाथ त्यागी का “ककसाड़ सम्मान-2019” से अभिनंदन किया। औऱ डा. त्रिपाठी ने श्री त्यागी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि अपना संपूर्ण जीवन समाज के लिए होम कर देने वाली विभूतियों का उचित सम्मान न करने वाला समाज अति शीघ्र ही पतन को प्राप्त होता है । डॉ त्रिपाठी ने सभा को सभागार उपस्थित ऐसी विभूतियों से परिचित करवाते हुए प्रख्यात पर्यावरणविद् ललित सिंघानिया, छत्तीसगढ़ के अग्रणी उद्यमी तथा समाजसेवी नंदकिशोर गुप्ता, वरिष्ठ साहित्यकार गजल लेखक तथा उर्दू के विद्वान गौहर जमाली, बहुमुखी प्रतिभा की धनी गीता त्रिपाठी, प्रखर पत्रकार पीके तिवारी, छत्तीसगढ़ के पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुभाष शर्मा , सुरेन्द्र रावल के साहित्य एवं समाजसेवा के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदानों से परिचित कराया।

 तत्पश्चात त्यागी जी द्वारा रचित छत्तीसगढ़ की रामायण पर परिचर्चा आयोजित की गई जिसमें वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रो. बालचंद कछवाहा, श्री शीलकांत पाठक तथा डॉ. मृणालिका ओझा ने कहा कि आचार्य अमरनाथ त्यागी विरचित ग्रंथ छत्तीसगढ़ की रामायण परिश्रम, अनुसंधान ,अध्ययन एवं सोद्देश्यता से परिपूर्ण अद्भुत, अनुपम और उपयोगी ग्रंथ है। लेखक के द्वारा रामकालीन छत्तीसगढ़ और भारत में कैसी राजनीतिक, भौगोलिक, रणनीतिक परिस्थितियां थीं उनपर विशद् प्रकाश डाला गया है । वस्तु की नवीनता, गवेषणात्मक एवं अन्वेषणात्मक प्रस्तुतिकरण ने ग्रंथ को विशेष बना दिया है। रामायण की विश्वयात्रा अध्याय में रामकथा का प्रचार,प्रसार , साहित्य के संबंध में एक अनुपम विचारणीय और संग्रहणीय सामग्री उपलब्ध है। रामायण कालीन छत्तीसगढ़ ऋषि मुनियों की भूमि थी,राम का ननिहाल था यह सिद्ध करता है।

राम छत्तीसगढ़ में दस वर्षों तक रहे यह स्थापना हम छत्तीसगढ़ वासियों को आत्मगौरव से भर देती है। राम की ऐतिहासिकता और तत्संबंधी कालगणना अभिभूत करती है। लेखक ने तार्किक ढंग से अनेक शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान करने की चेष्टा की है और इसमें वे सफल भी हुए हैं। लेखक इस ग्रंथ में एक साथ लेखक, इतिहासकार, पुरातत्त्ववेत्ता,भाषाविज्ञानी,मानसमर्मज्ञ, आध्यात्मवेत्ता और काल-गणितज्ञ की अनोखी भूमिकाओं में एक साथ हैं और इस अद्भुत संयोग ने छत्तीसगढ़ को एक अद्भुत रोचक और विचित्र रामायण के रूप में छत्तीसगढ़ की रामायण की सौगात दी है। ककसाड़ के लोकार्पण के उपरांत लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकारों को पत्रिका का नवीनतम अंक भेंट किया गया ।

*भारतीय संसद के वाचनालय पटल पर रखे जाने वाली देश की चुनिंदा पत्रिकाओं में शामिल है, बस्तर मूल की दिल्ली से प्रकाशित होने वाली राष्ट्रीय मासिक पत्रिका “ककसाड”*. *हाल में ही इसे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने देश की सर्वश्रेष्ठ पत्रिकाओं की श्रेणी में सम्मानित भी किया है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में डॉ चितरंजन कर औऱ दीपक गुणवंत व्यास ने त्यागी जी की प्रमुख रचनाओं पर सांगीतिक प्रस्तुतियाँ दीं और तबले पर श्री रामचरण पाण्डव जी एवं विजय चौहान ने संगत दी। श्रीमती लतिका भावे, श्रीमती शिप्रा त्रिपाठी, राधा ढगे, मीर अली मीर ने भी गायन किया। प्रस्तुत किए संचालन अनिल श्रीवास्तव और सुनील पांडे ने किया।इस अवसर पर वरिष्ठ कवि लक्ष्मीनारायण लाहोटी, गोपाल सोलंकी, तेजपाल सोनी,ई.सी.पी.शर्मा, डा.जे.के.डागर, गीता त्रिपाठी, अखिलेश त्रिपाठी,शिवा वाजपेयी, डा.सीमा श्रीवास्तव,कु.अपूर्वा.त्रिपाठी, राजेन्द्र पटेल, नवोदित कवि इंदल, सोनी आदि की प्रशंसनीय सहभागिता रही।

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