भारतीय बच्चे नहीं लेते हैं भरपूर नींदः गोदरेज इंटेरियो के [email protected] अध्ययन का खुलासा

• 36 प्रतिशत उत्तरदाता एक दिन में 6 घंटे से भी कम नींद लेते हैं
• 43 प्रतिशत उत्तरदाता रात 12 बजे के बाद सोते हैं
• मात्र 20 प्रतिशत बच्चे [email protected]
• 58 प्रतिशत उत्तरदाता कभी भी रात के 10 बजे नहीं सोते हैं या फिर कभी-कभार ही सोते हैं
• 41 प्रतिशत उत्तरदाता सोने से पहले टीवी देखते हैं या स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं
• 67 प्रतिशत उत्तरदाता सुबह जगने के बाद सुस्ती व थकान महसूस करते हैं

मुंबई। भारत की प्रमुख हेल्थकेयर मैट्रेसेज रेंज, गोदरेज इंटरियो मैट्रेसेज ने अपनी स्वास्थ्य जागरूकता पहल- [email protected] के तत्वावधान में विश्व निद्रा दिवस पर महत्वपूर्ण आंकड़े जारी किए। गोदरेज इंटेरियो द्वारा जारी किए गए नए आंकड़ों से पता चला है कि 67 प्रतिशत भारतीय बच्चे जागने के बाद भी सुस्ती और थकान महसूस करते हैं।

गोदरेज इंटेरियो मैट्रेसेज द्वारा वर्ष 2017 में शुरू की गयी जागरूकता पहल, www.sleepat10.com के स्लीप-ओ-मीटर से प्राप्त विचारों पर संबंधित परिणाम आधारित हैं। पिछले तीन वर्षों में, इस अध्ययन ने भारतीय बच्चों व वयस्कों में बढ़ती नींद की अस्वास्थ्यकर प्रवृत्ति को उजागर किया है।

देर से सोने जाना, जल्दी जागना, सोने का अनियमित समय और बाधित नींद – आमतौर पर वयस्कों के साथ जुड़े नींद के अभाव के ये सभी पैटर्न भारतीय बच्चों और किशोरों में देखे जा रहे हैं। अध्ययन से पता चला कि 58% से अधिक उत्तरदाताओं ने कभी भी [email protected] नहीं किया या किया भी तो कभी-कभार, लगभग 36% प्रतिदिन छह घंटे से कम सोते हैं। वास्तव में, सबसे खतरनाक तथ्य यह है कि मात्र 20 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने slept at 10pm की बात स्वीकार की। लगभग 41% उत्तरदाता बच्चों ने “स्क्रीन टाइम“, जिसमें टेलीविज़न और फोन शामिल हैं, को उनके देरी से सोने का कारण माना और 43% उत्तरदाता बच्चों ने कहा कि वे आधी रात के बाद सोए थे, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रात में लगभग 10 बजे सोने का परामर्श दिया है।

शोध निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्लीप साइंसेज के डॉ. अभिजीत देशपांडे ने कहा, “बच्चों और उनकी नींद की आदतें और पैटर्न माता-पिता के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। स्वस्थ रहने के लिए, प्रतिदिन 7 से 8 घंटे सोने की सलाह दी जाती है। पर्याप्त और उचित नींद के बिना, शरीर साइटोकिन्स स्रावित नहीं करता है, जो कि एक प्रकार का प्रोटीन है जो संक्रमण और जलन को को लक्षित करते हुए प्रभावी रूप से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करता है। नींद प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने और वायरस व बीमारी से बचाव का एक सबसे अच्छा तरीका है। समय पर सोना और शरीर को आवश्यक मात्रा में आराम देना बेहद जरूरी होता है। गोदरेज इंटेरियो मैट्रेस द्वारा कराये गये [email protected] अध्ययन के अनुसार, 58 प्रतिशत से अधिक बच्चे कभी भी [email protected] नहीं करते हैं या फिर कभी-कभार ही करते हैं, और 36 प्रतिशत बच्चे 6 घंटे से कम नींद लेते हैं। यह राष्ट्र के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। इसके कारण, हमारे देश की अगली पीढ़ी को मोटापे, तार्किक क्षमता में कठिनाई, भावनात्मक असंतुलन और अन्य कई अन्य विकारों का खतरा हो सकता है।“

[email protected] के निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए, गोदरेज इंटरियो के सीओओ, अनिल माथुर ने कहा, “[email protected] एक कंसेप्ट है जो वास्तव में हमारे हेल्थकेयर रेंज के उत्पाद विकास के चरण में पैदा हुई। गहराई से समझने पर, हमें एहसास हुआ कि सही गद्दे के चयन की तुलना में यह चिंता बहुत बड़ी थी। हाल के वायरस के बारे में चिंतित राष्ट्र के मद्देनजर, नींद एक प्रमुख प्रतिरक्षा प्रणाली बूस्टर है। इलाज से बेहतर है, बचाव और विभिन्न सावधानियों को बरतते हुए, बच्चों और किशोरों की नींद के पैटर्न का ध्यान रखा जाना चाहिए। 67 प्रतिशत से अधिक बच्चे जगने के बाद भी सुस्ती और थकान महसूस करते हैं। हमारे स्लीप-ओ-मीटर से प्राप्त अन्य रायों से, हमें पता चला कि हमारे वयस्क भी पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं। इस पर अधिक गंभीरता से चर्चा किया जाना आवश्यक है, क्योंकि इससे हमारे राष्ट्र के भविष्य को खतरा हो सकता है।”

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