कृष्ण में अपना स्वार्थ मान लें तो उनसे जुड़ाव भी हो जाएगा : नीलमणि कृपालु दास जी

 मुंबई। भायंदर के जेसल पार्क चौपाटी पर आयोजित विलक्षण आध्यात्मिक प्रवचन में जगदगुरु श्री कृपालु जी महराज के 19 वर्षीय पौत्र श्री नीलमणि कृपालुदास जी ने अलौकिक दिव्य व दार्शनिक प्रवचन देते हुए कहा कि शरणागति यानी कुछ ना करने की अवस्था लाने के लिए बहुत कुछ सीखना पड़ेगा। एक महापुरुष को खोजना पड़ेगा। जीवात्मा परमात्मा का अंश है, यह समझने के बाद ही शरणागति की स्थिति आ सकती है। भगवान के भी कई जन्म हुए हैं और हमारे भी। लेकिन प्रभु का जन्म और कर्म दिव्य होते हैं। जबकि मानव के दोनों ही प्राकृत होते हैं। प्रभु और महापुरुष दूसरों को आनंद देने का ही लक्ष्य रखते हैं। प्रभु के सभी कार्य हमारे सुख के लिए ही होते हैं। वे कहते हैं तुममें शरणागति की भावना तो आए, मैं तो तुम्हारा कल्याण करने के लिए ही तुम्हारे अंदर बैठा हूं। लेकिन ध्यान रखना अहंकार के रहते शरणागति की भावना नहीं आ सकती और बिना अन्तःकरण शुद्धि के कृष्ण की भक्ति नहीं मिल सकती। बस कृष्ण में अपना स्वार्थ मान लें तो उनसे जुड़ाव भी हो जाएगा।

साधना के तत्वों को विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु का रूप ध्यान जरूरी है। कर्म योग और कर्म संन्यास दो ही साधना होती है। थोड़ा समय आत्मकल्याण के लिए निकालना ही चाहिए। इस मानव देह का महत्व जानने के बाद अब संकल्प कर लें। हमारा मन त्री गुण से प्रभावित होता रहता है। भगवान के अवतारों के कारणों पर प्रकाश डालते उन्होंने कहा कि धर्म की हानि होने पर प्रभु का अवतार तो होता ही है। साथ ही परमहंस को श्री परमहंस बनाने के लिए भी होता है। भगवान के रूप, गुण, धाम का अवलंब लेकर जीवन का उद्धार हो जाता है। भगवान के समस्त अवतार की पूर्ण हैं। भगवान के अवतारों में भेद करना नामा अपराध है।

दिनाँक 21.02.2020 से 08.03.2020 तक प्रतिदिन शाम को 7.30 बजे से रात्रि 9.30 बजे तक महाराज जी का प्रवचन चल रहा है, जिसमें नीलमणि कृपालु दास जी वेदों, उपनिषदों, गीता, भागवत महापुराण और रामायण के प्रमाणों द्वारा विभिन्न विषयों को अच्छी तरह साधकों को समझा रहे हैं । सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि श्री नीलमणि कृपालु दास जी अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा ग्रहण करने के बावजूद धाराप्रवाह पौराणिक हिन्दू ग्रंथों के श्लोकों का उदाहरण देते हुए उसका मर्म भी समझाते हैं।

इस धार्मिक आयोजन के लिए एडवोकेट सतीश चौबे, अशोक परसरामपूरीआ, सतीश सिंह, माधव जी, डॉ दिनेश यादव हुकुम सिंह यादव, कमलेश उपाध्याय, अशोक पांडे, जी. के. सिंह, महेश  कबड्वाल, अरुण दुबे, धर्मेंद्र सिंह, पवन शुक्ला, सुभाष मिश्रा, संजय सालूँके, विनोद पटौदीया, शिव रतन शर्मा, रमेश सिंह, कमलेश उपाध्याय, रेणु उपाध्याय, क्षमा सिंह, सुनीता पांडे इत्यादि जुटे हुए हैं। .य़ह प्रवचन धारावाहिक होने के वजह से प्रतिदिन सुनने से विशेष लाभ होगा, ऐसा आयोजकों का कहना है।

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