भावना और शरणागति अच्छी होने से प्रभु की कृपा प्राप्त हो जाती है : नीलमणि कृपालु दास जी

 मुंबई। भायंदर के जेसल पार्क चौपाटी पर आयोजित विलक्षण आध्यात्मिक प्रवचन में जगत गुरु श्री कृपालु जी महराज के 19 वर्षीय पौत्र नीलमणि कृपालु दास जी महाराज ने अलौकिक दिव्य व दार्शनिक प्रवचन देते कहा कि रामजी को भी सब कहां जान पाए, लेकिन जब उनकी लीला को महात्माओं ने बताया तब लोगों को उनके भगवान होने का विश्वास हुआ। इसलिए ज्ञानियों की समाज को जरूरत है। प्रभु को जानने का अधिकारी ही उन्हें जान सकता है। प्रभु को देखते ही दिव्यानंद प्राप्त हो जाता है।

महाराज जी बताया कि ध्यान करने से प्रभु से जुड़ाव होता है। इस प्राकृत मन से प्रभु से जुड़ाव नहीं होगा। क्योंकि मन प्राकृत है और प्रभु दिव्य हैं, ऐसे में संयोग कैसे होगा। हमें प्रभु से आत्मीयता बढ़ानी होगी। लेकिन हमारी आत्मीयता तो परिवार से अधिक होती है।

उन्होंने कहा कि हमारी भावना और शरणागति अच्छी होने से प्रभु की कृपा प्राप्त हो जाती है। भगवान केवल भावना देखते हैं। फल नीयत का ही मिलता है। नीयत ठीक है तो क्रिया का महत्व नहीं। प्रभु से जाने- अनजाने में हुए प्रेम का भी फल जरूर मिलता है। ठीक उसी तरह, जैसे अमृत या विष कोई जाने में पिए या अनजाने में, उसका असर होता ही है। प्रभु सर्वज्ञ हैं, वो हमारे अन्तःकरण में बैठे हैं और हमारे कर्मों को नोट करते हैं।

इस धार्मिक आयोजन के लिए एडवोकेट सतीश चौबे, अशोक परसरामपूरीआ, सतीश सिंह, माधव जी, डॉ दिनेश यादव हुकुम सिंह यादव, कमलेश उपाध्याय, अशोक पांडे, जी. के. सिंह, महेश  कबड्वाल, अरुण दुबे, धर्मेंद्र सिंह, पवन शुक्ला, सुभाष मिश्रा, संजय सालूँके, विनोद पटौदीया, शिव रतन शर्मा, रमेश सिंह, कमलेश उपाध्याय, रेणु उपाध्याय, क्षमा सिंह, सुनीता पांडे इत्यादि जुटे हुए हैं। .य़ह प्रवचन धारावाहिक होने के वजह से प्रतिदिन सुनने से विशेष लाभ होगा, ऐसा आयोजकों का कहना है। दिनाँक 21.02.2020 से 08.03.2020 तक प्रतिदिन शाम को 7.30 बजे से रात्रि 9.30 बजे तक महाराज जी का प्रवचन चल रहा है, जिसमें नीलमणि कृपालु दास जी वेदों उपनिषदों गीता भागवत महापुराण और रामायण के प्रमाण के द्वारा विभिन्न विषयो को अच्छी तरह साधकों को समझा रहे हैं ।

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