हैदराबाद में वैश्विक हार्ट्फुलनेस मुख्यालय और श्री रामचंद्र मिशन (SRCM) के वैश्विक मुख्यालय में विश्व के सबसे बड़े ध्यान केंद्र का उद्घाटन

श्री रामचंद्र मिशन और हार्टफुलनेस संस्था की स्थापना की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक भव्य ध्यान केंद्र का उद्घाटन हुआ। यह विश्व का सबसे बड़ा ध्यान केंद्र है। इस ध्यान केंद्र को हार्टफुलनेस के वर्तमान गाइड श्री कमलेश पटेल जिन्हें सभी प्यार से दाजी कहते हैं, ने हार्टफुलनेस के प्रथम गाइड परम पूज्य लालाजी महाराज को समर्पित किया। इस अवसर पर अन्य सुप्रसिद्ध व्यक्तियों के साथ योग गुरु बाबा रामदेव, अखिल भारतीय श्री गुरुदेव सेवा मंडल, गुरुकुंज आश्रम के श्री जनार्दन पंत बोथे और  सुरेश प्रभु भी उपस्थित थे। इस ध्यान केन्द्र के उद्घाटन से हैदराबाद और भारत की मानव के आध्यात्मिक रूपांतरण के प्रतीक के तौर पर एक और वैश्विक पहचान बनी है।

30 एकड़ जमीन में फैले हुए इस विशाल ध्यान केन्द्र में एक केंद्रीय हॉल और 8 छोटे हॉल हैं। इस ध्यान केंद्र में एक बार में 100,000 जिज्ञासु बैठ सकते हैं। यह ध्यान केन्द्र इसलिए भी अनोखा है कि इसे हार्टफुलनेस संस्थान के निपुण सदस्यों द्वारा ही डिज़ाइन किया गया और इसका निर्माण केवल 3 वर्ष में पूर्ण हुआ।

इस शुभ अवसर पर हार्टफुलनेस के गाइड आदरणीय दाजी ने कहा, ‘मानवता की सेवा में इस संस्थान के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज इतिहास में एक अद्वितीय क्षण उजागर हो रहा है। इस ध्यान केंद्र का डिज़ाइन न केवल एक भौतिक संरचना के तौर पर महत्वपूर्ण है बल्कि यह उन सबके लिए प्रेरणा स्वरुप है जो ध्यान के अभ्यास से अपना जीवन बेहतर बनाना चाहते हैं – ध्यान सृष्टि के द्वारा मानवता को प्रदान किया गया एक महानतम उपहार है।’

ध्यान का अभ्यास सभी के लिए निःशुल्क है, इस तथ्य को विस्तारपूर्वक बताते हुए दाजी ने कहा कि “उनके आध्यात्मिक गुरु और श्री रामचंद्र मिशन के संस्थापक बाबूजी महाराज कहते थे कि ‘ईश्वर बिक्री के लिए नहीं है और यदि मान भी लें कि बिक्री के लिए हैं तो आप ईश्वर का कितना मूल्य दे सकते हैं?’ इसलिए इस अभ्यास के लिए कभी भी कोई शुल्क नहीं लिया जाता। कान्हा शांति वनम् की संपूर्ण संरचना केवल स्वैच्छिक अनुदान से निर्मित हुई है, यह इस बात का सबूत है कि जब हृदय द्रवित हो जाता है तब लोग स्वेच्छा से आगे आते हैं और जब भी व जहां भी आवश्यकता होती है, सहयोग करते हैं।”

दाजी का सभी आध्यात्मिक संस्थाओं का एक दूसरे के साथ एकजुट होने का स्वप्न

योग ऋषि बाबा रामदेव के शब्दों में, ‘किसी ऐसे कार्य को करने के लिए जो इतिहास का स्वरूप बदल दे, प्रखर बुद्धिमत्ता, साहस और दूरदर्शिता की ज़रूरत होती है। दाजी का सभी आध्यात्मिक संस्थाओं को एक साथ मिलकर विश्व को बेहतर बनाने के लिए काम करने का आह्वान यक़ीनन ऐसा ही कार्य है। उनके दृष्टिकोण को जानना बहुत ही प्रेरक और स्फूर्तिदायक था और इसे उनके भाव और कर्म में देखा जा सकता है। संपूर्ण मानवता की सेवा में विभिन्न संस्थाओं और पद्धतियों का एक साथ इकट्ठे होना एक नयी शुरुआत है। यहां मेरी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि मैं यहां आने का निमंत्रण पाकर बहुत अधिक सम्मानित महसूस कर रहा हूँ।’

 महाराष्ट्र की एक प्रमुख आध्यात्मिक तुकड़ोजी महाराज संस्था ने हाल ही में हार्टफुलनेस पद्धति को अपनाया और उनके प्रतिनिधि उद्घाटन समारोह में उपस्थित थे। इन प्रतिनिधियों ने अपने भजनों के द्वारा वहां उपस्थित जिज्ञासुओं को बांधे रखा। अखिल भारतीय श्री गुरुदेव सेवा मंडल के महासचिव श्री जनार्दन पंत बोथे जी के साथ कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी सभी ध्यान सत्रों में उपस्थित रहेंगे।

SRCM / हार्टफुलनेस संस्थान के 75 वर्षों का स्मृति उत्सव

3 तीन-दिवसीय-सत्रों याने क्रमशः 28 से 30 जनवरी, 1 से 3 फरवरी और 7 से 9 फरवरी 2020 के दौरान मिशन की 75 वीं वर्षगांठ के शुभ अवसर पर इस केंद्र में 1.2 लाख जिज्ञासु सामूहिक ध्यान करेंगे। भारत के राष्ट्रपति महामहिम श्री रामनाथ कोविंद जी और श्री अन्ना हजारे जी क्रमशः 2 फरवरी और 8 फरवरी को जिज्ञासुओं को संबोधित करेंगे और योगगुरु बाबा रामदेव 29 जनवरी 2020 को अपना संबोधन देंगे। ऐसी उम्मीद है कि कई गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ अनेक राज्यों के राज्यपाल भी इस उत्सव और उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे।

यह हार्टफुलनेस केंद्र 1400 एकड़ भूमि में फैला हुआ एक आत्म-निर्भर इकोसिस्टम है जिसमें 40,000 से भी ज़्यादा व्यक्तियों की मेजबानी की जा सकती है। यहां उपलब्ध अनेक सुविधाओं में एक, आत्मनिर्भर व पूरी तरह स्वचालित सामुदायिक रसोईघर है जिसमें 1 दिन में 100,000 लोगों के लिए खाना बनाया जा सकता है। एक 350 बिस्तरों वाला आयुष चिकित्सालय भी यहाँ बनाया जा रहा है। इस केंद्र में 6 लाख पौधों वाली एक नर्सरी है और पिछले 4 वर्षों में कई लाख वृक्ष लगाए जा चुके हैं। छोटी उम्र से ही अपने मन का नियमन करने के लिए एक हार्टफुलनेस लर्निंग सेंटर और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हैं।

हार्टफुलनेस ध्यान का सार यौगिक प्रसारण या ‘प्राणाहुति’ की प्राचीन कला है (‘प्राण’ का अर्थ है जीवन-शक्ति और ‘आहुति’ का अर्थ है अर्पण )। प्राणाहुति के साथ हार्टफुलनेस ध्यान का ब्रेनवेव पैटर्नस, हार्टरेट और ब्लडप्रेशर, वेगस नर्व एक्टिविटी, क्रोमोज़ोम की टेलोमियर लम्बाई तथा अन्य चीज़ों पर प्रभाव को वैज्ञानिक खोज के द्वारा प्रमाणित किया गया है। कई जिज्ञासु अपने कुछ ही प्रारंभिक ध्यान सत्रों में प्राणाहुति का अनुभव करते हैं और अक्सर ध्यान के दौरान स्वयं के ध्यानस्थ अवस्था में डूब जाने पर आश्चर्य करते हैं।

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