एनसीपीए प्रस्तुत करता है ‘एनसीपीए समाः द मिस्टिक एक्स्टसी’ का दसवां संस्करण!

 भारत का अग्रणी सांस्कृतिक संस्थान द नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (एनसीपीए) साल के सूफी संगीत उत्सव ‘एनसीपीए समाः द मिस्टिक एक्स्टसी’ के साथ लौट आया है। यह तीन दिवसीय उत्सव 7 से 9 फरवरी 2020 तक चलेगा, जिसमें सूफी विचारधारा को संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा और इसमें प्रख्यात व्यक्तित्व भाग लेंगे, जैसे पार्वती बौल, मोहम्मद वकील एंड ग्रुप, हडारैट्स सौरियाट्स (मोरक्को का ग्रुप, जिसमें केवल महिलाएं हैं) और नीरज आर्या का कबीर कैफे।

सूफी संगीत का अभ्यास विभिन्न शैलियों के माध्यम से दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में किया जाता है। सूफीवाद शांति, सहिष्णुता और अनेकता का उपदेश देता है। संगीत ईश्वर से जुड़ने का माध्यम माना जाता है, तो समा के साथ अपनी भौतिकता को विलीन करें और आध्यात्मिक ब्रह्मांड में विचरण करें, जिसके लिये आप संगीत सुनेंगे, गुनगुनाएंगे और झूमेंगे और अंततः आध्यात्मिक उल्लास में खो जाएंगे।

इस उत्सव के बारे में डॉ. सुवर्णलता राव, प्रोग्रामिंग हेड- इंडियन म्यूजिक, एनसीपीए ने कहा, ‘‘हर साल एनसीपीए सूफीवाद के सम्बोधन के तौर पर अपने तीन दिवसीय सूफी संगीत उत्सव- समाः द मिस्टिक एक्स्टसी का आयोजन करता है। इस उत्सव के माध्यम से हम अनगिनत कविता रूपों और संगीत शैलियों के जरिये दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों और संस्कृतियों की सूफी संगीत परंपराएं दिखाने का प्रयास करते हैं। सूफीवाद का आशय भाईचारे से है और आज असहिष्णुता के युग में सूफी दर्शन लोगों को प्रेम से जोड़ सकता है। एनसीपीए के समा को विगत वर्षों में काफी लोकप्रियता मिली है और अपने असाधारण सांस्कृतिक अनुभव के कारण यह हर आयु के दर्शक को पसंद आया है।’’

7 फरवरी 2020 को पार्वती बौल अपने सॉन्ग ऑफ द सोल में अपनी शैली में 15वीं सदी के रहस्यवादी गीत प्रस्तुत करेंगी, जिसमें थियेटर के तत्‍वों और स्टोरीटेलिंग की गायिकी के साथ अंग्रेजी में वर्णन करने वाली टिप्पणियाँ होंगी। बौल का अर्थ है दोनों, यह बंगाल के रहस्यवादी गवैयों का एक समन्वयात्मक पंथ है और संगीतमय परंपरा उनकी बुद्धि दर्शाती है। बौल की विचारधारा में तंत्र, सूफी, भक्ति और बुद्धिस्ट विचारों के तत्व हैं। बौल के गीतों का विषय प्रेम है और यह रहस्यवाद और ईश्वर के साथ एकाकार होने की गहन भावना के साथ ज्ञान और भक्ति को मिश्रित करते हैं।

8 फरवरी 2020 को मोहम्मद वकील एंड ग्रुप के रक्समः शेड्स ऑफ सूफी कलाम में खुसरो, शाह कबीर, आदि के सूफी कलामों का प्रदर्शन किया जाएगा और गुरू नानक तथा मीराबाई जैसे अन्य रहस्यवादी कवियों की रचनाओं की तुलना होगी। गजल गायकों के परिवार में जन्मे मोहम्मद वकील ने नौ वर्ष की आयु में मंच संभाला था। उन्हें हुसैन ब्रदर्स ने प्रशिक्षित किया है, जो एक प्रसिद्ध गजल गायक जोड़ी और उनके चाचा हैं और वकील ने वर्ष 1998 का सारेगामा मेगा फाइनल जीता था। सलीम आरिफ नाटक और फिल्मों की दुनिया के जाने-माने लेखक, निर्देशक और डिजाइनर हैं।

इस उत्सव में शबनम वीरमणि की एक फिल्म चलो हमारा देसः जर्नीस विथ कबीर एंड फ्रैंड्स की स्क्रीनिंग गोदरेज डांस थियेटर, एनसीपीए में की जाएगी।

9 फरवरी 2020 को हडारैट्स सौरियाट्स की सूफी प्रस्तुति का आनंद मिलेगा, जो मोरक्को का केवल महिलाओं का ग्रुप है और यह महिलाएं विभिन्न वाद्ययंत्र बजाती हैं। यह ग्रुप आध्यात्मिकता के रंगों में डूबे अपने ट्रांस म्यूजिक से ईश्वर को याद करता है और प्रेम तथा शांति का संदेश देता है। खासकर मोरक्को का सूफीवाद से गहरा नाता है और कम से कम 1000 अलग सूफी ब्रदरहूड्स को सूफी शिक्षकों ने स्थापित किया है। वे सहिष्णुता के संदेश के लिये प्रसिद्ध हैं और उन्हें लंबे समय से नैतिक आचरण के अनुकरणीय आदर्शों के रूप में देखा जा रहा है। मोरक्को के प्रमुख सूफी ब्रदरहूड्स हैं ग्नाउआ, आइस्सावा, हमादचा और जाजोउका।

एनसीपीए समा का समापन नीरज आर्या के कबीर कैफे एंड ग्रुप से होगा, जो एक नियो-फोक फ्यूजन बैण्ड है और विशेषकर कबीर की रहस्यवादी कविताओं को समर्पित है। कबीर के दार्शनिक संदेश को युवा पीढ़ी की प्लेलिस्ट में जगह दिलाने के उद्देश्य से इस ग्रुप ने अनूठी शैली अपनाई है, जिसमें भारतीय लोक संगीत, रॉक की समकालीन शैलियों, रेगे, पॉप और कार्नाटिक म्यूजिक का मिश्रण है। संयुक्त स्वर कबीर का संदेश प्रेषित करते हैं, अदृश्य और निर्गुण ब्रह्म के प्रति भक्ति का भाव रखते हैं, वह ईश्वर जो सभी के मन में वास करता है और जिसे केवल आस्था और भक्ति से अनुभव किया जा सकता है।

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