मुझे नहीं, बनारस घराने के संगीत को मिला पद्मविभूषण: पं. छन्नू लाल मिश्र

  वाराणसी। बनारस गायकी और ठुमरी गायकी के सशक्त हस्ताक्षर पं. छन्नूलाल मिश्र को पद्मविभूषण और नगर के जाने-माने सर्जन प्रो. एनएन खन्ना को पद्मश्री पुरस्कार मिलने की घोषणा से शहर में खुशी की लहर है।
गणतंत्र दिवस पर रविवार को पूरे दिन शहर के जाने माने कलाकारों, संगीत प्रेमियों, संभ्रांत लोग दोनों विशिष्ट व्यक्तियों को सेलफोन से बधाई देते रहे। दोनों विशिष्ट जनों के आवास पर भी दिन चढ़ने के साथ बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। विशिष्ट जनों के परिजन लोगों की बधाई खुशमिजाजी से स्वीकार करते रहे। दोनों विशिष्ट जनों ने पद्म पुरस्कार मिलने की घोषणा पर सरकार का आभार भी जताया। वर्ष 2014 में जब पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वाराणसी से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे, तब  ख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र उनके प्रस्तावक बने थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रशंसक पं. छन्नूलाल मिश्र ने पुरस्कार को बाबा विश्वनाथ, देश पर मर मिटने वाले शहीदों को समर्पित कर कहा कि पुरस्कार उनके गुरु और संगीत साधना का पुरस्कार है। मुझे नहीं, बनारस घराने के संगीत को यह सम्‍मान मिला है। गदगद कलाकार ने कहा कि अब तो आशीर्वाद देने की उम्र हो गई है। सब लोग आगे बढ़ें, हमारा देश आगे बढ़े, यही हमारा आशीर्वाद है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री के नेतृत्व और कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने समाज के सभी वर्गों के साथ समान भाव रखते हैं। जब भी कोई अवसर होता है तब वे संगीत हो या खेल, विज्ञान, आर्थिक सहित तमाम क्षेत्रों के विशिष्‍ट लोगों को अपने विचार का हिस्‍सा बनाते हैं।
खेले मशाने में होली दिगम्बर से लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचे ‘खेले मसाने में होली दिगंबर…’ गीत से लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचे पं. छन्नू लाल मिश्र बनारस और पंजाब गायकी, दादरा, ठुमरी, चैती, कजरी, होरी और भजन के सशक्त हस्ताक्षर बन चुके हैं। मूल रूप से आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर गांव निवासी पं. छन्नू लाल मिश्र ने अपने पिता पं. बद्रीनाथ मिश्र से संगीत का ककहरा सीखा। किशोरावस्था में उस्ताद गनी खां से भी संगीत की बारीकियां सीखीं। ​कठिन साधना से आल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन में शीर्ष ग्रेड कलाकार बनने की ऊंचाई तय करते-करते वर्ष 2010 में पद्मभूषण, वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुए। संगीत की तपस्या में आगे बढ़ने पर यश भारती, डी-लिट्, संगीत शिरोमणि, संगीत मार्तंड, गायनाचार्य पुरस्कार भी मिला। 23 दिसम्बर, 2017 को अवधेश प्रताप विश्वविद्यालय रीवां, मध्यप्रदेश ने उन्हें डीलिट् की मानद उपाधि प्रदान की। इसी क्रम में सुर संसद मुंबई का शिरोमणि अवार्ड, नौशाद अवार्ड, बिहार संगीत शिरोमणि अवार्ड भी मिल चुका है।
सर्जन डॉ. एनएन खन्ना ने पुरस्कार को बताया सेवा और मेहनत का प्रतिफल पद्मश्री सम्मान मिलने की घोषणा से गदगद नगर के जाने माने वयोवृद्ध चिकित्सक डॉ. एनएन खन्ना ने इसे सेवा और मेहनत का फल बताया है। बृज इन्क्लेव कालोनी सुंदरपुर स्थित आवास पर शुभचिंतकों से घिरे (80) चिकित्सक लोगों के बधाई को मुक्तकंठ से स्वीकार करते रहे। चिकित्सक के पुत्र डॉ. राहुल खन्ना व पुत्रवधू डॉ. सीमा खन्ना आगंतुकों का बधाई विनम्रता पूर्वक स्वीकार कर मुंह भी मीठा कराते रहे।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सर सुन्दरलाल चिकित्सालय के सर्जरी विभाग में अपनी सेवाएं देने के दौरान डा. खन्ना विभागाध्यक्ष, संकाय प्रमुख सहित चिकित्सा विज्ञान संकाय के निदेशक के पद का गुरुतर दायित्व भी संभाल चुके है। डॉ. खन्ना के कार्यकाल में ही बीएचयू अस्पताल में प्लास्टिक व कैंसर सर्जरी की शुरूआत हुई थी। सेवानिवृत्ति के 25 साल बाद भी डॉ. खन्ना पूरी उर्जा और निष्ठा के साथ शिवाला स्थित माता आनंदमयी अस्पताल में नि:शुल्क मरीजों की सेवा कर रहे हैं।
(हि.स.)

Check Also

रिटायर्ड फौजी ने कोरोना से लड़ने को दान कर दी जीवन भर की कमाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, सेवानिवृत्त होने के बाद भी कम नहीं होता सैनिक का देश …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *