एनसीपीए की प्रस्तुति प्रवाह डांस फेस्टिवल- डांस में नए प्रयोगों का महोत्सव 12 दिसंबर से

 मुंबई। एनसीपीए एड आर्ट फेस्टिवल की सफलतापूर्ण लॉन्चिंग के बाद एनसीपीए प्रस्तुत करने जा रहा है – प्रवाह डांस फेस्टिवल। यह डांस फेस्टिवल नृत्य के उन प्रयोगों का महोत्सव है जो मंथन कर देने वाले अनुभव से पैदा होकर रचनात्मक रूप से सामने आए। इस तीन दिवसीय महोत्सव में जो 12, 15 और 19 दिसंबर को आयोजित हो रहा है, भारतीय नृत्य कला की कई जानी-मानी हस्तियां अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी जिनमें मालविका सरूकाई, लता पाडा, शमा भाटे, कलामंडलम पियल और निरूपमा-राजेन्द्र का नाम उल्लेखनीय है।

प्रवाह डांस फेस्टिवल के बारे में एनसीपीए की प्रमुख सुश्री स्वप्नोकल्पा दासगुप्ता ने कहा कि ‘‘ प्रवाह डांस फेस्टिवल नृत्य की सिम्फनी के माध्यम से आकार लेने वाली विविध विचार धाराओं का सम्मेलन है। इस फेस्टिवल में प्रस्तुति देने वाले वरिष्ठ कलाकारों की प्रस्तुति में उनके वर्षों का अनुभव व्यक्त होगा। यह फेस्टिवल मानवीय संवेदनाओं के सार के साथ कला को जोडकर अनूठी शैली में उत्सव मनाता है। ’’

 इस फेस्टिवल के पहले दिन 12 दिसंबर को इसकी शुरूआत -द बेटल विदइन नामक नाटकीय व्याख्या से होगी जो श्रीमद् भगवतगीता से प्रेरित है, इसमें विख्यात भरतनाट्यम् डांसर और नृत्यनिदेशक मालविका सरूकाई अपनी प्रस्तुति देंगी। भगवदगीता का प्रादुर्भाव कुरूक्षेत्र के युद्ध के मैदान में होता है और आगे जाकर शारीरिक और मानसिक दोनों ही अवस्थाएं कुरूक्षेत्र के युद्ध के मैदान में तब्दील हो जाती हैं। हालाकि महाभारत का युद्ध दो परिवारों के बीच हुआ विख्यात युद्ध था लेकिन इस युद्ध से जन्मी गीता एक कालातीत वैश्विक रचना है जो हममें से प्रत्येक के भीतर चल रहे संघर्ष को संबोधित करती है। यह कोरियोग्राफी अर्जुन और कृष्ण के बीच के मानवीय और दैवीय को समाहित करने और सूक्ष्म और वृहद स्तरों पर संचालित होने वाले महाकाव्य प्रवचन का पता लगाती है। अभिव्यक्ति की भाषा का उपयोग करते हुएए सरुकई संघर्ष की भावनाओं, निराशा और रूपांतरण के माध्यम से दिल और दिमाग की आंतरिक जगहों को जीवंत कर देती हैं. यह अभिनव विजुअल डिजाईन इस कोरियोग्राफी का महत्वपूर्ण भाग है जो स्थिर और चलचित्र दोनों में ही प्रकाश और प्रक्षेपण का प्रयोग करता है जबकि डांस करते हुए शरीर का शिल्प अपने आप में जादुई प्रभाव जाग्रत कर देता है। ध्वनि,संगीत,पाठ और डांस एक दूसरे से बात करते हैं इस महाकाव्य की परतें खोलते हुए। इस महानृत्य का स्टेज सुमंत्रा घोषाल ने डिजाईन किया है जो एक जानी -मानी फिल्ममेकर हैं और इस प्रकल्प के निर्माण में सरूकाई की सहयोगी हैं ।

 15 दिसंबर को टोरंटो मूल की डांसर और कोरियोग्राफर लता पाडा एक नए आलोक में भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगी। वे अपने समूह -सम्प्रदाय डांस क्रिएशन के साथ अपनी प्रस्तुति देंगी (जो कनाडा में पुरस्कार प्राप्त दक्षिण एशियाई डांस कंपनी है)। उनके डांस में भरतनाट्यम के साथ बैले नृत्य की भी छटा देखने मिलेगी। भावनात्मक रूप से शक्तिशाली और कलात्मक रूप से अनूठा प्रलय आपको पौराणिक, जादुई और रहस्यलोक में ले जाता है जहां पाडा और सम्मानित बैले डांस स्कालर और कोरियोग्राफर विआन डीबीया उल्लेखनीय समकालीन मल्टीमीडिया प्रोडक्शन में एक साथ आते हैं।

इस समारोह में अगली प्रस्तुति शमा भाटे की होगी जो कथक आधारित एक तरंगित कर देने वाली प्रस्तुति देंगी जिसका नाम है निःशब्दभेद। यह जैक्यूस कास्टेयू और लुईस माले की फ्रेंच डॉक्यूमेंटरी से प्रेरित है। यह एक ऐसे व्यक्ति की कथा है जो अपने भीतर की खामोशी को कभी जानकर और कभी अनजाने में खोजता रहता है और संतुलन साधने की कोशिश करता है, एकांत के लिए प्रयास करता है, उस अमूर्त को छूने की इच्छा करता है जो सर्वव्यापी है और मानव मन की गहराई को दर्शाता है। इस कोरियोग्राफी मे भाटे- फॉर्म ,गति, लय, संगीत के साथ और इनके अभाव में भी उस अनंत से संबंध जोडती हैं जो उन्होंने देखा है।

 19 दिसंबर को इस फेस्टिवल का समापन कलामंडलम पियल और ट्रापी तथा निरूपमा-राजेन्द्र की दो प्रस्तुतियों के साथ होगा। पियल और ट्रोपी आपके लिए प्रकृति और ऋतुओं का लौकिक समन्वय और दिव्य संगति लेकर उपस्थित होंगी । इसमें प्रकृति आगे जाकर नायिका के रूप में और ऋतु विभिन्न नायकों के रूप में उपस्थित होती हैं। ग्रीष्म पीडा देने वाला है, वर्षा प्रदान करने वाला है, शरद संतुलन और उत्सवधर्मिता लेकर आता है जबकि शिशिर क्षणभंगुरता और पतन लेकर आता है।

 अभिसारः इन परसूट ऑफ ….में निरूपमा -राजेन्द्र की जोडी एक अनूठा आख्यान प्रस्तुत करेगी जिसमें संस्कृति, प्रकृति और भावनाओं की कथा है। इसकी पृष्ठभूमि भारतीय साहित्य के अभिसार अवधारणा से प्रेरित है। दार्शनिक रूप से यह एक व्यक्ति की अपने भीतर निहित सौंदर्य की तलाश है। इस प्रस्तुति में आपको नाट्यशास्त्र में पाये जाने वाली शब्दावली को जीवंत कर देने वाली नृत्य भंगिमाएं देखने को मिलेंगी जिन्हें समकालीन संवेदनाओं से ऊर्जा मिलती है। अभिसार को युगल संगीत के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, विशेष रूप से महान संगीतकारों द्वारा तैयार किये गए मूल संगीत से, एनसीपीए ने इन दो अनूठी प्रस्तुतियों के लिए जी वी रामानी नाट्यकला फाउंडेशन के साथ मिलकर काम किया है। इनमें से अभिसार ए परस्यूट– अनुपमा-राजेंद्र के न्यू ऐज कथक प्रोडक्शन निरुपमा द्वारा और मृग नृत्य कलामंडलम पियल और ट्रापी के साथ । पियल ने मृग नृत्य भारतीय नाट्य शास्त्र की महान परंपरा पर शोध करने के बाद तैयार किया है।

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