Saturday , December 14 2019
Home / Headline / ऐतिहासिक रूप में हुआ गुरुकुंज आश्रम में राष्ट्र संत तुकडोजी महाराज का श्रद्धांजलि समारोह

ऐतिहासिक रूप में हुआ गुरुकुंज आश्रम में राष्ट्र संत तुकडोजी महाराज का श्रद्धांजलि समारोह

 मुंबई। हार्टफुलनेस संस्थान और तुकडोजी महाराज की संस्था के बीच चल रहे सम्बन्धों के परिणामस्वरूप श्री कमलेश पटेल (दाजी) को अमरावती, महाराष्ट्र राज्य के समीप गुरुकुंज में राष्ट्र संत वंदनीय तुकडोजी महाराज के श्रद्धांजलि वार्षिक समारोह में शामिल होने के लिये आमंत्रित किया गया था, जहाँ १,५०,००० से अधिक अनुयायी कार्यक्रमों में भाग लेने के लिये एकत्रित हुए थे।

वहाँ एक बड़ा समूह उनके स्वागत के लिये एकत्रित हुआ था। लगभग एक हज़ार से अधिक आगंतुकों ने हार्टफुलनेस के परिचयात्मक ध्यान सत्रों में भाग लिया, और अधिकांश ने अपने पहले सत्र में ही स्वयं को ध्यान में डूबा हुआ पाया। इस आयोजन के लिये विभिन्न स्थानों से एकत्र हुए हमारे वॉलंटियरों द्वारा प्रदान की गई नि:स्वार्थ सेवा से श्री तुकडोजी महाराज के अनुयायी विस्मित थे।

इस गठबंधन पर टिप्पणी करते हुए दाजी ने कहा, ‘‘चंचल मन को स्थिर करने के लिये ध्यान एक तकनीक है। मन पहले शान्त हो जाता है, फिर उसे दिशा देने की ज़रूरत होती है। मन के स्थिर हो जाने के बाद हम क्या करते हैं? एक विद्यार्थी पढ़ाई पर ध्यान देगा, एक व्यापारी पैसा कमाने पर ध्यान देगा, लेकिन इसका सबसे योग्य उपयोग ईश्वर की प्राप्ति, ब्रह्म विद्या को प्राप्त करने के लिये होगा। यहाँ तक कि भगवान श्रीकृष्ण भी कहते हैं कि ध्यान करना एक श्रेष्ठ काम है। केवल ध्यान के माध्यम से ही हम अपने हर प्रयास में उत्कृष्ट हो सकते हैं।

‘‘अकेलापन बहुत सारी समस्याओं का कारण होता है। लोग भले ही शादीशुदा हों लेकिन वे फिर भी अकेलापन महसूस करते हैं। यह अकेलेपन की महामारी आज समाज की सबसे बड़ी समस्या है। जब हम ईश्वर की ओर जा रहे होते हैं तब हमें इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ता क्योंकि हम हर किसी में ईश्वर को देखते हैं। हम ऐसा महसूस करते हैं इसीलिये इस बारे में बोलने की कोई ज़रूरत नहीं है। हर कोई जानता है कि ईश्वर सर्वव्यापी है, लेकिन जब यह विचार वास्तविकता बन जाता है तब सच में कुछ हो सकता है।’’

‘‘हर कोई ख़ुशी चाहता है। दु:ख कौन चाहता है? कोई नहीं। हम कब ख़ुश हो सकते हैं? जब मन मननशील हो जाता है। हम कब विचार कर सकते हैं? जब संकल्प लेने के बाद मन एक बात पर टिका हो। यह केंद्रित हो जाता है। और मन कब केंद्रित हो सकता है? जब इसे नियमित किया जाता है। और यह कब नियमित होगा? जब हम ध्यान करेंगे। अब ऊपर दिये गये कथनों को जोड़ें। क्या ध्यान के बिना ख़ुशी सम्भव है? हार्टफुलनेस में, प्राणाहुति के कारण, ध्यान बहुत सरल हो जाता है।

दाजी ने तुकडोजी महाराज की पुण्यतिथि में भाग लिया, कार्यक्रम भगवद्गीता से भजन-कीर्तन और श्लोकों के साथ शुरू हुआ, सभी अनुयायि ध्यान हॉल में इकट्ठा हुए थे। जब दाजी ने कहा कि उन सभी ने उन्हें बिना किसी प्रश्न के स्वीकार कर लिया है और उन्हें अपना बना लिया तो श्री तुकडोजी महाराज के अनुयायी भावविह्वल हो उठे। यह एक ऐसा पल था जिसमें बहुत सी आँखों से आँसू बह रहे थे। जिस तरह उन्होंने अपने विचारों को बड़ी सरलता से व्यापक रूप में प्रस्तुत किया दाजी की उस सादगी ने ज़्यादातर लोगों को छू लिया था। कई लोग जिन्हें दाजी, हार्टफुलनेस और कान्हा के बारे में पता लगा, वे आने वाले समय में कान्हा आना चाहते हैं।

Check Also

नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नागरिकता संशोधन विधेयक – 2019 पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *