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रिश्तों को कैंची नहीं सुई-धागा बनकर जिएं

जोधपुर। चंद्रप्रभ महाराज ने कहा कि रिश्ता वो नहीं होता जो दुनिया को दिखाया जाता है। रिश्ता वह होता है जिसे दिल से निभाया जाता है। अपना कहने से कोई अपना नहीं होता, अपना वो होता है जिसे दिल से अपनाया जाता है। रिश्तों को बनाने में नहीं, अपितु निभाने में विश्वास रखिए। रिश्ते बनाना उतना ही आसान है जैसे मिट्टी से मिट्टी पर मिट्टी लिखना, पर रिश्तों को निभाना उतना ही कठिन है जैसे पानी से पानी पर पानी लिखना। बचपन में हम सौ बार लड़ते थे, तो भी रिश्ता खतम नहीं होता था। अब दूसरी बार लडऩे की नौबत नहीं आती,क्योंकि पहली लड़ाई में ही हम रिश्तों का खतम कर देते हैं। रिश्तों की खूबसूरती बरकरार रखनी है तो बात मनवाने पर नहीं,
समझाने पर जोर दीजिए।

संतप्रवर रविवार को संबोधि धाम में आयोजित पॉजिटिव लाइफ प्रोग्राम में साधक भाई बहनों को संबोधित कर रहे थे उन्होंने कहा कि रिश्तों में अहंकार को पैदा मत होने दीजिए। एक दिन हम सब एक दूसरे को सिर्फ यह सोचकर खो देंगे कि वो मुझे याद नहीं करता, तो मैं क्यों करूँ। रिश्ते में पूरी पारदर्शिता रखिए, क्योंकि रिश्ते बर्फ के गोले जैसे होते हैं। बनाना सरल, पर बनाकर रखना मुश्किल। खुशी उन्हें नहीं मिलती जो रिश्तों को अपनी शर्तों पर जीते हैं बल्कि खुशी उन्हें मिलती है, जो अपने परिजनों की खुशी के लिए अपनी शर्तों को बदल लेते हैं। रिश्ता और शीशा दोनों नाजुक होते हैं। फर्क सिर्फ इतना होता है कि शीशा गलती से टूटता है और रिश्ता गलतफहमी से।

उन्होंने कहा कि हम रिश्तों को गाय की तरह जिएँ, साँप की तरह नहीं। गाय घास खाकर भी दूध देती है और साँप दूध पीकर भी जहर उगलता है। परिवार में सुई बनकर रहें, कैंची की तरह नहीं। सुई दो को एक कर देती है और कैंची एक को दो कर देती है। रिश्तों में दीवार भले ही खड़ी हो जाए, पर दरार मत पडऩे दीजिए। यह सच है कि जब कोई अपना दूर चला जाए तो तकलीफ होती है, पर असली तकलीफ तब होती है जब कोई अपना पास होकर भी दूरियाँ बना लेता है। रिश्तों में कभी समझौता करना भी सीखिए, क्योंकि थोड़ा-सा झुक जाना किसी रिश्ते को हमेशा के लिए तोडऩे से अच्छा है।

वक्त पडऩे पर परिवार में सॉरी कहने का बड़प्पन दिखाइए। माफी माँगने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप गलत हैं और सामने वाला सही है, वरन् इसका अर्थ यह है कि आप रिश्तों को निभाना जानते हैं। रिश्तों में कभी खटास घुल जाए तब भी उन्हें मत तोडिय़े। याद रखिए, गंदा पानी पीने के काम तो नहीं आता, पर आग बुझाने के काम जरूर आता है।

उन्होंने कहा कि जीवन में चार चीजें कभी मत तोडिय़े – रिश्ता, विश्वास, दिल और वचन ये टूटते हैं तो आवाज नहीं होती, पर दिल बहुत दुखता है। दुनिया में कोई भी चीज बेकार नहीं होती बस नजरिया ठीक करना होता है। लोग कहेंगे स्वार्थ बेकार है पर एक यही तो है जिसने लोंगो को आपस में जोड़ रखा है। रिश्तों में कभी किसी को मतलबी मत समझिए। आप खुद भी भगवान को तभी याद करते हैं जब आप मुसीबत में होते हैं।

इस अवसर पर शिल्पा भंडारी ने भी संबोधित किया। प्रोग्राम में साधकों को मुनि शांतिप्रिय सागर ने सामूहिक प्रार्थना करवाते हुए यौगिक क्रियाओं और हेल्थ थेरेपी का प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहरवासी उपस्थित थे।

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