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दिव्य भाव में गुरु भक्तों में मौजूद रहते हैं : त्रयंबकेश्वर चैतन्य जी महाराज

अश्वनी राय 

संत-सम्मेलन में हुई यज्ञ सम्राट वीरव्रती श्री प्रबल जी महाराज की श्रद्धांजलि सभा

यदि शिष्यतव भावना रहेगी, तो दिव्य लोक से भी गुरुदेव की कृपा प्राप्त हो जाएगी : डॉ. गुणप्रकाश चैतन्यजी महाराज

जब तक शास्त्र रहेंगे, मर्यादाएं भी रहेंगी 

 मुुुंबई।  कांदिवली पूर्व स्थित भूमि वैली खेल मैदान, ठाकुर विलेज में आयोजित 100 कुंडीय श्री महालक्ष्मी महायज्ञ, श्रीमद् भागवत कथा व संत सम्मेलन में यज्ञ सम्राट वीरव्रती श्री प्रबल जी महाराज की श्रद्धांजलि सभा में वीतराग शिरोमणि त्रयंबकेश्वर चैतन्य जी महाराज ने कहा कि एक महापुरुष के ब्रह्मलीन होने की आराधना का यह पर्व है। यज्ञ सम्राट श्री प्रबल जी महाराज की पावन कीर्ति, उनके अद्भुत संकल्पों, उनकी निर्भयता और साधुता का स्मरण होती ही आंखें भर आती हैं। प्रबल जी महाराज में चिंता का भाव कभी नहीं दिखा। उन्होंने कभी भी किसी के सामने दीनता भाव नहीं दिखाया । वे गाय को भूखा नहीं देखना चाहते थे। वे गाय को चलता- फिरता मंदिर मानते थे।

जिन्होंने परम श्रद्धेय स्वामी श्री करपात्री जी महाराज की अनुकंपा को नहीं देखा, उन लोगों को प्रबल जी महाराज में उस अनुकंपा की झलक दिखी। उनके संकल्प को साकार करने की जिम्मेदारी उनका सानिध्य प्राप्त करने वाले हर व्यक्ति की है।

गुरु देह भाव में भले ही मौजूद नहीं है, लेकिन दिव्य भाव में वे आज भी भक्तों में मौजूद रहते हैं। गुरु अपने शिष्यों का रोपण करते हैं । अपनी उपासना के अंश से सनातन धर्म की रक्षा के लिए अपने शिष्यों में संस्कार डालते हैं। इस सृष्टि में एकमात्र गुरु और शिष्य का संबंध ही बंधन के बजाय मुक्ति का संबंध है। संकल्पों में बल त्याग से आता है। यह मंच भारत का भविष्य है। धर्म की रक्षा के लिए कोई भी समझौता नहीं करना है, भले ही प्राण देना पड़े।

युवा संत सनातन संस्कृति की ध्वजा को फहराने वाले हैं। हम सभी प्रत्येक व्यक्ति तक सनातन परंपरा को पहुंचाएं। जब तक शास्त्र रहेंगे, तब तक मर्यादाएं रहेंगी। त्रंबकेश्वर महाराज जी ने कहा कि कुछ लोगों ने भागवत कथा को नाचने- गाने का धंधा बना दिया है। अनैतिकता का विरोध करने की जिम्मेदारी केवल साधु-संतों की ही नहीं आप सबकी भी है। भागवत आत्म कल्याण का साधन है, मनोरंजन का नहीं । ऐसा कर्म हम सभी करें कि भारत हर रूप में संपन्न हो, सभी पवित्रता के साथ अंदर और बाहर से प्रसन्न हों।

 डॉ. गुणप्रकाश चैतन्यजी महाराज ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते कहा कि यदि शिष्यतव भावना रहेगी, तो दिव्य लोक से भी गुरुदेव की कृपा प्राप्त हो जाएगी। सनातन संस्कृत को पूरी दुनिया में प्रसारित करने वाले परम श्रद्धेय श्री करपात्री जी महाराज के बेहद कृपा पात्र थे प्रबल जी महाराज । आज पूरे देश भर की सभी संबंधित संस्थाओं में यज्ञ सम्राट प्रबल जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है।

 ज्ञानेन्द्र महाराज ने प्रबल जी महाराज की अतुलनीय बताया तो बृजेश चैतन्य महाराज ने उनके जीवन को धर्म को समर्पित बताते प्राणियों में सद्भावना और धर्म की विजय के उनके संकल्पों का जिक्र किया। सत्येन्द्र महाराज, डॉ. भारद्वाज और ब्रह्मचारी महाराज ने भी सनातन धर्म को आगे बढ़ाने में उनके पुनीत कार्यों को याद किया। इस दौरान काशी सहित देश के कई राज्यों संत समाज की उपस्थिति रही।

इससे पूर्व भागवत कथा सुनाते बाल व्यास ऋषभदेव जी महाराज ने राजा दक्ष के वध का विस्तृत वृतांत एवं उसका मर्म तथा राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव की संपूर्ण कहानी सुनाते हुए संकल्पों की ताकत को विस्तार से समझाकर उपस्थित लोगों को किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए शुभ संकल्प रखने की प्रेरणा दी।

मंच संचालन आचार्य स्वदेश महाराज, आचार्य पं. राजेंद्र जोशी, विनोद गौड़, रविन्द्र जोशी और नरेश जोशी ने किया।

 अखिल भारतीय धर्म संघ व स्वामी करपात्री फाउंडेशन की ओर से वीतराग शिरोमणि त्रयंबकेश्वर चैतन्य जी महाराज के सानिध्य एवं डॉ. गुण प्रकाश चैतन्य जी महाराज के दिशानिर्देशन में हो रहे इस सम्पूर्ण आयोजन के संरक्षक पदमाराम कुलरिया, अनिल अग्रवाल, सत्यनारायण काबरा और मनमोहन गुप्ता हैं। जबकि मुख्य यजमान गीतादेवी गौरीशंकर चांडक और रंजना शिवकुमार चांडक हैं। महालक्ष्मी मंदिर यजमान जगदीश गोयंका है। विशिष्ट यजमान एवं सहयोगी सत्यनारायण अग्रवाल, गंगाधर अग्रवाल, जवाहर पुरोहित, दिलीप काबरा,मनोज रूपारेल, हरिदास राठी, अनिल राईका, सरला संपत ढोकवाल, तिरुपति मुरारका, सुनील लोहिया, दिनेश सोमानी, भंवरलाल तापड़िया, बांकेलाल शुक्ल, सुनील शर्मा, विमला कैलाशचंद्र पाटोदिया हैं। सहयोगी यजमान में मुरारीलाल तिवारी,अवतार कृष्ण संधल , नगराम चौधरी, सुधीर शर्मा, अमित शर्मा, अनिल मसकरा और अरुण बंसल हैं।

व्यासपीठ के समक्ष विशिष्ट जन

 

यज्ञशाला के समक्ष काशी के पंडितों द्वारा की जा रही भव्य आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का समूह।

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