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वेद रूपी कल्पवृक्ष का पका हुआ फल है श्रीमद् भागवत महापुराण : ऋषभदेव जी

अश्वनी राय 

 मुंबई। अखिल भारतीय धर्म संघ व स्वामी करपात्री फाउंडेशन की ओर से वीतराग शिरोमणि त्रयंबकेश्वर चैतन्य जी महाराज के सानिध्य एवं डॉ. गुण प्रकाश चैतन्य जी महाराज के दिशानिर्देशन में कांदिवली पूर्व के भूमि वेली खेल मैदान ठाकुर विलेज में 100 कुंडीय श्री महालक्ष्मी महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा तथा विशाल संत सम्मेलन का भव्य आयोजन चल रहा है,

 जिसमें कथा सुनाते नव वर्षीय बाल व्यास ऋषभदेव जी ने भगवान को इस सृष्टि का देही बताते हुए कहा कि जैसे देह में कुछ भी होने पर देही यानी जीव को पता चल जाता है, उसी प्रकार इस जगत में भगवान से कुछ भी अनजाना नहीं है। विश्व जगत के अभियंता भगवान सृष्टि के कोने-कोने से परिचित है। माया के कारण ही यह जगत असत्य होने पर भी सत्य लगता है। लेकिन जैसे ताली बजाने से पंछी उड़ जाते हैं, उसी प्रकार श्रीराम और श्रीकृष्ण की कथा सुनने से जीवन के संशय रूपी पंछी उड़ जाते हैं।

 परम श्रद्धेय करपात्री महाराज जी के कृपापात्र शिष्य यज्ञ सम्राट वीरव्रती श्री प्रबलजी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि पर समायोजित इस विशाल कार्यक्रम में बाल व्यास जी ने बताया कि सर्दियों में जिस प्रकार कोहरे के कारण आगे का रास्ता नहीं दिखता, उसी प्रकार अज्ञानता रूपी कोहरे के कारण प्रभु की भक्ति का मार्ग नहीं दिखता। लेकिन ज्ञान रूपी सूर्य के उदय होते ही अज्ञानता का कोहरा खत्म हो जाता है। श्रीमद भागवत महापुराण की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि यह भागवत महापुराण वेद रूपी कल्पवृक्ष का पका हुआ फल है। इसमें अमृत रूपी रस भरा है। भागवत पुराण में धर्म निवास करता है। जन्म-जन्मांतर के पुण्य से यह कथा सुनने का संयोग बनता है। इसलिए इस कथा को सुनते पलक मत झपकना अर्थात निंदा में मत चले जाना। सुभद्रा की थोड़ी सी निंदा से अभिमन्यु एक चक्रवयूह तोड़ने से वंचित रह गए। अपने आराध्य की भक्ति ही कल्याण का साधन है।

 व्यासपीठ से उन्होंने कहा कि जैसा चित्र देखते हैं, वैसा ही चित्त बनता है और जैसा चित्त रहता है, वैसा ही चिंतन होता है। फिर जैसा चिंतन होता है, वैसा ही चरित्र बनता है।

  प्रतिदिन कथा के पश्चात संत सम्मेलन होता है।

मनोहारी धार्मिक अनुष्ठान

 100 कुण्डीय मंडप परिसर में सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि विधान से संपन्न कराए जा रहे हैं। भक्तिमय स्रोतों की धुन पर ब्राह्मणों द्वारा आरती सहित अन्य मनोहारी धार्मिक क्रियाएं देख उपस्थित लोग भाव विभोर हो रहे हैं।

संरक्षक, यजमान व सहयोगी

इस सम्पूर्ण आयोजन के संरक्षक पदमाराम कुलरिया, अनिल अग्रवाल, सत्यनारायण काबरा और मनमोहन गुप्ता हैं। जबकि मुख्य यजमान गीतादेवी गौरीशंकर चांडक और रंजना शिवकुमार चांडक हैं। महालक्ष्मी मंदिर यजमान जगदीश गोयंका है। विशिष्ट यजमान एवं सहयोगी सत्यनारायण अग्रवाल, गंगाधर अग्रवाल, जवाहर पुरोहित, दिलीप काबरा,मनोज रूपारेल, हरिदास राठी, अनिल राईका, सरला संपत ढोकवाल, तिरुपति मुरारका, सुनील लोहिया, दिनेश सोमानी, भंवरलाल तापड़िया, बांकेलाल शुक्ल, सुनील शर्मा, विमला कैलाशचंद्र पाटोदिया हैं। सहयोगी यजमान में मुरारीलाल तिवारी,अवतार कृष्ण संधल , नगराम चौधरी, सुधीर शर्मा, अमित शर्मा, अनिल मसकरा और अरुण बंसल हैं।

विशाल भंडारा 

 विश्व कल्याण कि भावना से सुख, समृद्धि एवं शांति के लिए हो रही कथा व आरती के पश्चात सभी लोगों के लिए महाप्रसाद भंडारा का आयोजन चल रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग लंबी लाइन में कतारबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। यज्ञ एवं कथा का आयोजन 20नवंबर तक चलेगा। कथा में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति हो रही है। लोग यज्ञ कुंड की परिक्रमा का लाभ ले रहे हैं।

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