… जब बर्बरीक को भगवान ने कहा, कलियुग में मेरे ही नाम खाटूश्याम से पूजे जाओगे

श्री कृष्ण रासलीला महोत्सव में खाटूश्याम लीला का जीवंत मंचन

 मुंबई। श्री ब्रजमंडल द्वारा गिरगांव चौपाटी पर आयोजित किए जा रहे श्री कृष्णलीला महोत्सव में १४ अक्टूबर, सोमवार को खाटूश्याम की लीला का जीवंत मंचन किया गया, जिसमें दिखाया गया कि भीम का नाती और घटोत्कच्छ का पुत्र बर्बरीक ने शंकर भगवान की आराधना कर तीन वरदान के रूप में तीन बाण प्राप्त किया था। उन बाणों में त्रिलोकी को समाप्त करने की ताकत थी। भगवान ने सोचा कि यदि कौरवों की ओर से लड़ेगा तो पांडवों की हार निश्चित है। इसलिए ब्राह्मण का वेष धारण कर बर्बरीक की परीक्षा लिए। शर्त थी एक ही बाण में पेड के सभी पत्तो में छेद होना चाहिए । एक पत्ता भगवान अपने पैर के नीचे दबा लेते हैं। बाण वहीं मंडराने लगता है। इस पर बर्बरीक ने कहा वहां बाण होगा। भगवान बर्बरीक से शीश का दान मांग लेते हैं। पहाड़ पर पेड़ की डाली से शीश लटका देते हैं।

बर्बरीक ने पूरा महाभारत अपनी आंखों से देखा। पांडवों की जीत के बाद श्रेष्ठ योद्धा कौन?  इसके उत्तर में बर्बरीक ने कहा कि भगवान का सुदर्शन चक्र ही संहार कर रहा था बाकी लोग तो निमित्त मात्र थे और सिर्फ खड़े थे। असली योद्धा तो द्वारिकानाथ ही हैं। भगवान ने कहा तुमने जो कार्य किया है वह कोई नहीं कर सकता है। कलियुग में तुम मेरे ही नाम खाटूश्याम के नाम से पूजे जाओगे। संसार से हारा हुआ जो भी व्यक्ति तुम्हारी आराधना करेगा उसे विजयी बना दोगे। इसीलिए बर्बरीक कलियुग हारे के सहारे के नाम से विख्यात हैं। कृष्ण के रूप में पूजे जाते हैं।

आज की लीला के यजमान अभिषेख प्रदीप बंसल थे। ट्रस्टी/अध्यक्ष सुरेशचंद अग्रवाल की अध्यक्षता और उनके मार्गदर्शन में श्री कृष्ण रासलीला महोत्सव का आयोजन हो रहा है। ट्रस्टी बृजकिशोर अग्रवाल और कृष्णलीला के संयोजक सुनील अग्रवाल ने बताया कि 20 तारीख को कवि सम्मेलन इसी मंच पर होगा, जिसके संयोजक अनिल पी. अग्रवाल होंगे। यह जानकारी महोत्सव के मीडिया प्रभारी रामप्रकाश मित्तल ने दी ।

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