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भारत की सामाजिक संरचना एवं पारिवारिक व्यवस्था में मानव अधिकार की रक्षा समाहित हैं: अमित शाह

 नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के 26वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर अपना संबोधन दिया। मंच पर आयोग के अध्यक्ष, पूर्व न्यायाधीश एच एल दत्तू भी उपस्थित रहे।

भारत की सामाजिक संरचना में मानव अधिकारों की वर्तमान स्थिति पर अपने विचार रखते हुए शाह ने कहा कि मानव अधिकार के मामले में भारत और विश्व की मान्यताएं एवं परिस्थितियां बहुत भिन्न है। विश्व के मानव अधिकार मानकों पर भारत का आंकलन करना सही नहीं होगा। भारत की सामाजिक संरचना एवं पारिवारिक व्यवस्था में मानव अधिकार की रक्षा समाहित हैं, चाहे वे बच्चों के हो, महिलाओं के हो या पिछड़ी वर्ग के लोगों के हो। किसी भी गांव या शहर में देखें तो बिना किसी कानून की आवश्यकता के मानव अधिकारों की रक्षा करने की संरचना और संस्थाएं स्थापित मिलेंगी।

मानव अधिकारों का संकुचित अर्थ निकालने का विरोध करते हुए शाह ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि हर एक नागरिक को संविधान प्रदत्त रक्षा मिलनी ही चाहिए, परंतु, इस विषय के कई ऐसे आयाम और दृष्टिकोण हैं जिनके बारे में गहनता से चिंतन करने की आवश्यकता है, ताकि उनका दुरुपयोग ना हो। भारतीय समाज सदियों से केवल अपने परिवार के लिए सोचने वाली संकुचित धारणा से ऊपर उठकर ‘वसुधैव कुटुंबकम सूत्र’ का पाठ विश्व को पढ़ाता आया है। इस सूत्र में मानव अधिकार का विषय समाहित है। आज हमें इस सूत्र को एक वैश्विक मंच प्रदान करने की आवश्यकता है। भारत के कई संतों ने अपने जीवन के कार्यकलापों के द्वारा मानव अधिकार के संरक्षण के लिए काम किया है और साहित्य की रचना की है। आज की परिस्थिति में इस साहित्य का महत्व किसी भी मानव अधिकार कानून से ऊपर है।

गृह मंत्री ने पूछा कि आज़ादी के 70 साल बाद भी देश में अगर 5 करोड़ लोग बिना घर के जी रहे थे या 3.5 करोड़ लोग ऐसे थे जिनके घर में बिजली नहीं थी या वे करोड़ों महिलाएं जिनके घर में गैस चूल्हा नहीं था और धुएं से उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा था, तो क्या यह उनके मानव अधिकार का उल्लंघन नहीं है? गृह मंत्री ने स्वास्थ्य सुविधाओं और शौचालयों के अभाव में करोड़ों लोगों के बिगड़ते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद ये सारी सुविधाएं भारत के करोड़ों नागरिकों को मिलीं। उन्होंने कहा कि मानव अधिकार की रक्षा हेतु भारत सरकार की इन पहलों और उपलब्धियों को विश्व पटल पर रखने की आवश्यकता है।

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