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पश्चिम रेलवे की रचनात्मक अपील : ‘नो’ बोलो जी ‘नो’ बोलो, सब प्लास्टिक को ‘नो’ बोलो …

अश्वनी राय

 मुंबई। पश्चिम रेलवे के ट्वीटर पर अपलोड किया गया एक वीडियो इन दिनों काफी पसंद किया जा रहा है। इस वीडियो में सिंगल प्लास्टिक पर प्रतिबंध का पैगाम गरबा गीत के रूप में दिया गया है। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी रवींद्र भाकर के अनुसार पश्चिम रेलवे ने नवरात्रि पर्व को ध्यान में रखकर 28 सितंबर को अपने ट्वीटर पर गरबा गीत ” नो प्लास्टिक ” को अपलोड किया। इस वीडियो को रेल मंत्री पियूष गोयल ने भी अपने ट्वीटर पर शेयर किया , जिसे अब तक हजारों लोगों ने देखा है।

फिलहाल पूरे देश में नवरात्रि में धर्म – आराधना का माहौल बना हुआ है। साथ ही रात्रि में माँ अम्बे की स्थापित प्रतिमा वाले पंडाल परिसरों में गरबा गीतों पर डांडिया खनक रहे हैं। ऐसे में पश्चिम रेलवे का यह संदेशपरक गरबा गीत पूरी तरह से समसामयिक होकर अपने अभिप्रेत को फलीभूत कर रहा है। पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ जनसम्पर्क अधिकारी गजानन महतपुरकर द्वारा रचित इस गीत में रोजमर्रा के व्यवहार में वैकल्पिक सुविधा के रूप में आये प्लास्टिक के दुष्परिणामों को रचनात्मक ढंग से सम्प्रेषित करते हुए भविष्य के खतरों से आगाह किया गया है। इस गीत में प्लास्टिक रुपी राक्षस से बचने के लिए माँ अम्बे से गुहार लगाने के साथ ही लोगों से अपने दिलों पर इसकी भयावहता को तौलने की भावुक अपील भी की गई है। पूरा गीत इस प्रकार है –

प्लास्टिक वापरने की आदत, दुनिया के लिए बन गई आफत,
खतरनाक है इसकी फितरत, बनी है सबसे बड़ी मुसीबत
पश्चिम रेल का है पैगाम, प्लास्टिक का करो काम तमाम,
इसके प्रयोग से अपने जीवन में ज़हर ना घोलो…!
‘नो’ प्लास्टिक का नारा, सब मिलकर ज़ोर से बोलो…!
‘नो’ बोलो जी ‘नो’ बोलो, सब प्लास्टिक को ‘नो’ बोलो…!

प्लास्टिक है बुरी बला जनाब, सेहत को करता है खराब,
कुदरत से खिलवाड़ का इक दिन सबको देना होगा हिसाब,
इससे पर्यावरण भी बिगड़े और प्रदूषण भी फैले,
आइये, हम शुरू करें, वापरना कपड़े के थैले,
प्लास्टिक है इक बड़ी बीमारी, यह सच्चाई जान लें हम,
इसको खत्म करेंगे जड़ से, आज सभी ठान लें हम,
प्लास्टिक है इक ज़हर की पुड़िया, इसको कभी ना खोलो…!
‘नो’ प्लास्टिक का नारा, सब मिलकर ज़ोर से बोलो…!
‘नो’ बोलो जी ‘नो’ बोलो, सब प्लास्टिक को ‘नो’ बोलो…!

नवरात्रि के पावन पर्व पर अम्बे माँ से यही गुहार,
प्लास्टिक रूपी राक्षस का हम सबको करना संहार,
आइये, हम सब मिल-जुलकर करें एक अच्छा संकल्प,
प्लास्टिक को कहें अलविदा ढूंढें इसका सही विकल्प,
जब तक हम सब प्लास्टिक से नहीं बनायेंगे दूरी,
‘स्वच्छ रेल – स्वच्छ भारत’ की मुहिम ना होगी पूरी,
इस कड़वी सच्चाई को दिल की तराज़ू पे तोलो…!
‘नो’ प्लास्टिक का नारा, सब मिलकर ज़ोर से बोलो…!
‘नो’ बोलो जी ‘नो’ बोलो, सब प्लास्टिक को ‘नो’ बोलो…!

 

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One comment

  1. A very good attempt by the Western railway to be socially active.

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