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खुलेपन में मर्यादाएं खत्म हो जाती हैं – आचार्य श्री सुदर्शनलाल जी म.सा

‘चरण स्पर्श’ कार्यक्रम ने किया भाव विभोर

महिला शिविर में पहुंची देश भर से बहनें
श्री. श्वे. स्था. जैन स्वाध्यायी संघ गुलाबपुरा, भीलवाड़ा का राष्ट्रीय अधिवेशन भी हुआ
मुंबई। युवा मनीषी, शासन गौरव, आगम ज्ञाता, पूज्य गुरुदेव, आचार्य श्री सुदर्शन लाल जी म.सा. के सानिध्य में श्री श्वेतांबर स्थानकवासी जैन स्वाध्यायी संघ गुलाबपुरा, भीलवाड़ा का वार्षिक अधिवेशन एवं महिला शिविर का समापन समारोह श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई के तत्वावधान में कांदिवली पश्चिम स्थित रघुलीला मॉल में हर्षोल्लास संपन्न हुआ। इससे पहले गुरु दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से चातुर्मास स्थल बोरीवली के वृंदावन वाटिका पहुंचे श्रद्धालुओं को व्याख्यान सुनाते आचार्य श्री सुदर्शन लाल जी म.सा. ने फरमाया कि संघ और समाज की व्यवस्थाओं के बारे में चिंतन करो कि ये किस दिशा में चल रही हैं। आजकल सभी समाजों में खुलेपन की हवा चल रही है। जिस समाज में चरित्र की पूजा होती रही है, वहां चरित्रहीनता बढ़ जाए, तो क्या कहेंगे? कालिदास जिस डाली पर बैठे थे, उसी को काट रहे थे तो लोगों ने उन्हें मूर्ख कहा। आप अपने बारे में भी सोचिए। आडंबरों का हिस्सा बनकर आप भी तो वही कर रहे हैं। कभी सोचा, आपका खुलापन बच्चे देखेंगे तो उन्हें कैसा लगेगा?

गुरुदेव ने फरमाया कि आजकल एक ही मकान के अलग – अलग कमरों में अलग टीवी लगाने का चलन आ गया है। क्या आपको अंदाजा है कि कौन क्या देख रहा है? एक साथ टीवी देखने से घर में दुष्चरित्रता नहीं आती। ध्यान रखना ये ऐसी हवा है, जो हमारी सभ्यता व संस्कृति की लौ को बुझा देगी। इसलिए विचार करना कि अपने समाज को किस दिशा में ले जाना है। समाज में ऐसे सभी प्रकार के आडंबरों को बंद कर दो, जो हमारे समाज की युवा पीढ़ी को पददलित कर रहे हों। खुलेपन में मर्यादाएं खत्म हो जाती हैं। यह परिवार व व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी कटार है। आचार्य श्री ने प्रवचन सभा में आए सभी लोगों को सामूहिक रूप से अपने घर – परिवार में प्री-वेडिंग की व्यवस्था नहीं करने के नियम कराएं।

‘चरण स्पर्श’ कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता बंग्लौर से आये राहुल कपूर जैन ने बेहद मार्मिक तरीके से चरण छूने के सांस्कृतिक व अध्यात्मिक महात्म्य से लगभग 1500 की संख्या में उपस्थित महिला-पुरुषों को अवगत कराकर भाव विभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि अपने से बड़ों का अभिवादन करते समय उनके चरण छूने की हमारी सांस्कृतिक परंपरा रही है। चरण छूने का मतलब है पूरी श्रद्धा के साथ किसी के आगे नतमस्तक होना। इससे विनम्रता आती है और मन को शांति मिलती है। हमारे बड़े-बुजुर्ग जिन्होंने हमें बनाने में अपना तन-मन अर्पित किया उनके प्रति श्रद्रधा अर्पित करना ईश्वर की उपासना करने से भी बड़ा माना गया है।

उन्होंने कहा कि जब हम किसी आदरणीय व्यक्ति के चरण छूते हैं, तो आशीर्वाद के तौर पर उनका हाथ हमारे सिर के ऊपरी भाग को और हमारा हाथ उनके चरण को स्पर्श करता है। ऐसी मान्यता है कि इससे उस पूजनीय व्यक्ति की पॉजिटिव एनर्जी आशीर्वाद के रूप में हमारे शरीर में प्रवेश करती है। इससे हमारा आध्यात्मिक तथा मानसिक विकास होता है।

राहुल कपूर जैन ने वैज्ञानिक रूप से भी चरण स्पर्श के फायदे बताते कहा कि सिर को उत्तरी ध्रुव और पैरों को दक्षिणी ध्रुव माना गया है। इसका मतलब यह हुआ कि गुरुत्व ऊर्जा या चुंबकीय ऊर्जा हमेशा उत्तरी ध्रुव से प्रवेश कर दक्षिणी ध्रुव की ओर प्रवाहित होकर अपना चक्र पूरा करती है। यानी शरीर में उत्तरी ध्रुव (सिर) से सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश कर दक्षिणी ध्रुव (पैरों) की ओर प्रवाहित होती है। दक्षिणी ध्रुव पर यह ऊर्जा असीमित मात्रा में स्थिर हो जाती है। पैरों की ओर ऊर्जा का केंद्र बन जाता है। पैरों से हाथों द्वारा इस ऊर्जा के ग्रहण करने को ही हम ‘चरण स्पर्श’ कहते हैं। कपूर ने भगवान महावीर की वाणी को वैज्ञानिक पैमाने से भी सभी रोगों के निदान में सहायक बताया। इस अवसर पर देश भर के मंडलों को सम्मानित किया गया।

अधिवेशन कार्यक्रम के समारोह गौरव अरुण टाटिया (तूतीकोरीन), मुख्य अतिथि सुभाष वेदमूथा (माधवनगर), अति विशिष्ट अतिथि अगरचंद चौरड़िया (विरुदाचलम), अशोक कुमार बोहरा (अहमदनगर), पूर्व एमएलए ओमप्रकाश पोखरणा (नादेड़), विशिष्ट अतिथि मसुधा के विधायक राकेश पारीक, बिजयनगर पालिका अध्यक्ष सचिन सांखला, समाजसेवी संग्राम सिंह, समाज सेविका डॉ. अर्चना जैन (जयपुर), ज्ञानचंद सोनी (मदुरै), राजेंद्र कुमार चौधरी (अरकलगुड), महावीर चंद नाहर (मायावरम्), अनिल कुमार पीपाड़ा (मुंबई), प्रमोद कुमार कावड़िया (अजमेर) थे।

महिला शिविर समापन समारोह में समारोह गौरव वसंता कोठारी (अजमेर), कोकिला कोठारी (मुंबई), अध्यक्ष मीना कर्णावट (बिजयनगर), मुख्य अतिथि उमरावबाई जपलोत, मीना संचेती, (मुंबई), विशिष्ट अतिथि सुमन देवी पीपाड़ा, प्रीति लोढ़ा(मुंबई), रतन देवी संचेती (गुलाबपुरा), विद्या देवी डाबरिया (मुंबई), पुष्पा कावड़िया (अजमेर), मंजू देवी चपलोत (गुलाबपुरा) थीं।

आयोजन में श्री श्वेतांबर स्थानकवासी जैन स्वाध्यायी संघ गुलाबपुरा के अध्यक्ष पारसमल दोषी, महामंत्री पुखराज कांठेड़, श्री जैन स्वाध्यायी महिला समिति गुलाबपुरा की संरक्षिका आशा लुणावत, अध्यक्षा सुशीला पोखरणा एवं श्री अखिल भारतीय नानक जैन श्रावक संघ प्रधान कार्यालय बिजयनगर के संरक्षक पद्मचंद खाबिया, अध्यक्ष पी. सी. जैन, कार्याध्यक्ष ज्ञानचंद सिंघवी, महामंत्री गौतम चंद विनायक्या की उपस्थिति रही।

सम्पूर्ण कार्यक्रम में चातुर्मास संयोजक सम्पतराज चपलोत एवं श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई के अध्यक्ष ललित कुमार डांगी के नेतृत्व में मंत्री साकेत पोखरणा, कोषाध्यक्ष अभिषेक भटेवरा, युवा संघ मुंबई के अध्यक्ष जितेंद्र रांका, मंत्री त्रिलोक खटोड़, कोषाध्यक्ष कुशल मेहता सहित चातुर्मास समिति की पूरी टीम ने अथक परिश्रम करके आयोजन को यादगार बनाया।

महिला शिविर के दौरान नाटक, वाद-विवाद प्रतियागिता और प्रश्न चिह्न स्पर्धा सहित कई ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रम हुए। सभी विजेताओं को प्रोत्साहन पुरस्कार दिये गये। पूरे देश से आयी बहनों की व्यवस्थाओं में श्री प्राज्ञ जैन महिला मंडल मुंबई की अध्यक्ष रीना चपलोत, मंत्री कविता पोखरणा और कोषाध्यक्षा रीता मेहता सहित पूरी महिला समिति की टीम लगी रही। संचालन श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई के अध्यक्ष ललित डांगी ने किया।

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