Home / Headline / घर सुंदर बने ना बने, घर के रिश्ते सुंदर ज़रूर बनाना : श्री सुदर्शन लाल जी म. सा.

घर सुंदर बने ना बने, घर के रिश्ते सुंदर ज़रूर बनाना : श्री सुदर्शन लाल जी म. सा.

अद्भुत चातुर्मास मुंबई

मुंबई। श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई के तत्वावधान में वृंदावन वाटिका, बोरीवली पश्चिम में चल रहे अद्भुत चातुर्मास में व्याख्यान देते शासन गौरव, आगम ज्ञाता, युवा मनीषी पूज्य गुरुदेव श्री सुदर्शन लाल जी म.सा. ने फ़रमाया कि बिना संबंधों के संसार की व्यवस्थाएं नहीं चलती। यदि मैं पूछूं, रिश्ते बनते क्यों हैं? तो आप कहेंगे, पिछले जन्म की वजह से। लेकिन यदि किसी से अनबन है, तो क्या यह भी पिछले जन्म का ही संबंध है? विचार करना, इन संबंधों का कोई तो कारण रहा होगा। कर्म सिद्धांत संबंधों को पिछले जन्म का कारण नहीं मानता। कोई भी व्यक्ति रिश्तों को छोड़ना नहीं चाहता, बल्कि उसे बदलना चाहता है । क्योंकि वर्तमान के संबंध उसे स्वीकार नहीं है। ऐसा कोई रिश्ता नहीं, जहां कभी विवाद ना हुआ हो। लेकिन ध्यान रखना, रिश्तों में सौंदर्य बहुत जरूरी है। आप डिस्टेंस मेंटेन करने के साथ खुलेपन को स्वीकार करिए। आप रिश्तों की मर्यादाओं को पहचानिए। मर्यादाओं की दूरियों और भीतर की नजदीकियों का मूल्यांकन करें। किस तरह किससे पेश होना है, आपने अपने बच्चों को सिखाया या नहीं, इसके बारे में सोचना। आज मर्यादायें तार-तार होती जा रही हैं। गुस्से के बोल आपके घर की गरिमा को तहस-नहस कर देते हैं। आप मर्यादा में रहिए। पारिवारिक सदस्यों में इतनी नजदीकी हो कि कोई भी मन की बात परिजनों को बता दें। आप मन को खोलने वाले नहीं हैं। आपस में एक दूसरे के बारे में सोचते ही नहीं। रिश्तों में इतना खुलापन होना चाहिए कि बेटा सच बता कर पैसा मांगे, कभी छुपाने की कोशिश ना करें । मर्यादा और खुलेपन से रिश्तों का सौंदर्य सामने आ जाएगा। तीसरी महत्वपूर्ण बात यह है त्याग का होना। सामने वाले की पीड़ा को पहचान लेने से रिश्तों में सौंदर्य आ जाता है।

गुरुदेव ने फरमाया कि आज रिश्तों को तोड़ने में बड़ा कारण अहम है। आपको यह समझना होगा कि घर को बढ़ाने में सभी का योगदान रहता है। आप पैसा दे देते हैं, लेकिन प्यार तो मां देती है। रिश्ते पैसों से नहीं चलते। रिश्तों में प्यार और त्याग की जरूरत होती है। इसलिए पैसे देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री मत समझना। प्रेम और त्याग के रहते पैसों की कमी नहीं होती। लेकिन पैसे से प्रेम नहीं हासिल किया जा सकता। परिवार के होते हुए भी परिवार साथ ना हो, तो पैसा किस काम का ? रिश्ते में कर्तव्य निभाये जाते हैं। पत्नी के साथ मां-बाप के प्रति भी कर्तव्य को पूरा करना। अपना कर्तव्य समझने वाला व्यक्ति अपने सभी रिश्ते निभा ले जाता है। बेटे और बाप के प्रति एक साथ अपना कर्तव्य पालन करने से रिश्ते में दूरियां नहीं आती। सोच एकतरफा होने से रिश्तों में टूटन आने लगता है। एक प्रसंग सुनाते हुए गुरुदेव ने समझाया कि कर्तव्य का भान आते ही रिश्ता ना होते हुए भी रिश्ता बन जाता है। अपने कर्तव्यों को तय जरूर कर लेना। समस्या हमारे अपने दृष्टिकोण से आती है। घर अच्छा बने, ना बने, लेकिन घर में रिश्ते सुंदर जरूर बनाएं। आपके यहां आने वाले को अच्छा लगेगा। कोई आपका घर देखने नहीं, आपका प्रेम देखने आता है। घर बनाने से पहले प्रेम को अपने घर में ला लेना।

प्रवचन के दौरान विनय प्रज्ञा जी म. सा. , विधि प्रज्ञा जी म. सा. और विदेह प्रज्ञा जी म. सा. भी मौजूद रहीं। संचालन करते संघ अध्यक्ष ललित डांगी ने कहा कि प्रेम के साथ मर्यादित व्यवहार वाला घर सदैव खुशहाली से भरा रहता है। इस बात को गुरुदेव बहुत ही सरल शब्दों में समझा रहे हैं। इसका हम अधिकाधिक रूप से लाभ लेने की प्रेरणा रखें। उन्होंने जानकारी दी कि छोटे बच्चों के लिए धार्मिक शिविर महिला मंडल की ओर से चलाए जा रहे हैं। रविवार के स्वामी वात्सल्य का लाभ नौरतन मल, मनीष कुमार और आशीष कुमार लोढ़ा ने लिया। चातुर्मास को सफल बनाने में संयोजक संपतराज चपलो त, रणजीत सिंह कुमठ, कैलाश चंद संचेती, ज्ञानचंद संचेती, लक्ष्मी लाल बडोला, साकेत पोखरना, राजेंद्र खटोड़, महेंद्र मेहता, अनिल पोखरणा, सुरेंद्र चपलो त, अशोक डूंगरवाल, राजेंद्र कांवडिया, दिनेश चौधरी, अमृत कोठारी, हेमराज गोखरू, महिला मंडल की रीना चपलो त, कविता पोखरना, रीता मेहता, मंजू संचेती, मीना संचेती, चंचल बडोला, नरेंद्रा बंब, जितेंद्र रांका और त्रिलोक चंद खटोड सहित चातुर्मास समिति की पूरी टीम व्यवस्थाओं में लगी हुई है।

Check Also

नागरिकता संशोधन विधेयक ऐतिहासिक फैसला: पीएम मोदी

भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं ने लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी नागरिकता संशोधन ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *