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आधुनिक संसाधनों के परिणामों पर सदैव विचार करना: आचार्य सुदर्शन लाल जी म. सा.

श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई के तत्वाधान में बोरीवली पश्चिम में चल रहे अद्भुत चातुर्मास में आगम ज्ञाता पूज्य गुरुदेव श्री सुदर्शन लाल जी म.सा. ने फरमाया कि नशा करने से मनुष्य जड़ता से युक्त और संवेदना से शून्य हो जाता है। जब हम खुद से अलग होते हैं तो जड़ता आ जाती है। जड़ता का तात्पर्य है उचित- अनुचित का बोध मिट जाना। नशा जब आदत बन जाती है तो जड़ता गहरी होकर मन मस्तिष्क पर छा जाती है। इसलिए विचार करना कि कहीं जड़ता के शिकार तो नहीं होते जा रहे।

गुरुदेव ने फरमाया कि आधुनिक संसाधनों की उपयोगिता और परिणामों पर सदैव विचार करना । एक घर में रहते हुए हर आदमी अकेला होता जा रहा है। रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं। पता नहीं ये दूरियां कहां लेकर जाएंगी। मोबाइल और टीवी रूपी नशे से मुक्त होना मुश्किल होता जा रहा है। देर रात तक मोबाईल – टीवी से जुड़े रहना आदत बनती जा रही है। ध्यान रखना सूर्योदय के बाद तक सोने वालों के यहां दरिद्रता आ जाती है। आर्थिक न सही मानसिक दरिद्रता तो आ ही जाती है। घरों में एक दूजे से छुपाव की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। छुपाने लायक चोरी होती है । सही को छिपाने की जरूरत नहीं होती । हम अपनी संस्कृति और अपने संस्कारों को खुद ही खत्म करते जा रहे हैं । प्रवचन के दौरान कई श्रावकों ने रात 11बजे के बाद बात करने के अलावा अन्य रूप में मोबाईल का उपयोग न करने और टीवी न देखने का नियम लिए।

इस अवसर पर प्राज्ञ जैन संघ मुंबई के अध्यक्ष ललित डांगी ने चातुर्मास के दौरान तपस्या से संबंधित पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही अधिक संख्या में व्याख्यान में आकर अपने जीवन का कल्याण करने की अपील की। आज के प्रवचन में चातुर्मास संयोजक संपत राज चपलोत, मंत्री साकेत पोखरना, कोषाध्यक्ष अभिषेक भटेवरा, संरक्षक रंजीत कुमठ, कैलाश संचेती, लक्ष्मी लाल बडोला, ज्ञान चंद संचेती, राकेश सांखला, जितेंद्र राणा, रीना चपलोत, कविता जैन आदि मौजूद थे। संचालन संघ अध्यक्ष ललित डांगी ने किया।

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