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एनपीसीए में विलायत खान की कलात्मकता पर श्रवण सत्र नाद – निनाद

नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स (एनसीपीए) अपने अनमोल अभिलेखागार के खजाने से प्रस्तुत करता है- नाद निनाद: 28 जुलाई, 2019 को एक्सपेरीमेंटल थिएटर, एनसीपीए में विलायत खान की कलात्मकता पर आधारित श्रवण सत्र। विलायत खान के बेटे शुजात खान द्वारा प्रस्तुत दस-सत्रीय श्रृंखला के इस पहले भाग का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन द्वारा किया जाएगा।

सत्रों का संचालन और मार्गदर्शन अरविंद पारिख करेंगे, जिन्हें विलायत खान से प्रशिक्षण लेने का सौभाग्य प्राप्त है। उस्ताद के साथ छह दशकों से चली आ रही घनिष्ठ संगति ने उन्हें इटावा इमदादखानी घराने के खजाने और उसकी बारीकियों की एक अंतर्दृष्टि प्रदान की है।

यह कार्यक्रम हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रेमियों को एनसीपीए की अभिलेखीय रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने के लिए रचा गया है। सत्रों की श्रृंखला सितार वादक विलायत खान (1927-2004) की उन दुर्लभ रिकॉर्डिंग्स पर आधारित है, जिन्हें एनसीपीए के अभिलेखागार के लिए विशेष रूप से 1976-79 के दौरान रिकॉर्ड किया गया था। पहले सत्र में उनकी सात पीढ़ियों की महान विरासत को समाहित किया जाएगा, जिसमें विलायत खान द्वारा सुनाया और प्रदर्शित किया गया इमदाद खान (1848-1920) की संगीतमय कलात्मकता का बारीक विवरण शामिल होगा।

श्रवण सत्र पर टिप्पणी करते हुए एनसीपीए में इंडियन म्यूजिक की प्रोग्रामिंग हेड डॉ. सुवर्णलता राव ने कहा, “एनसीपीए हमेशा भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। हमें अपने सरपरस्तों के लिए एनसीपीए के विशाल अभिलेखागार से महान सितार वादक विलायत खान की संपूर्ण 30-घंटे लंबी साक्षात्कार आधारित रिकॉर्डिंग्स दस सत्रों में प्रस्तुत करते हुए अपार प्रसन्नता हो रही है। उनके वरिष्ठतम शिष्य अरविंद पारिख के मार्गदर्शन में ये सत्र विलायत खान की स्वयं की यात्रा को कालक्रम के अनुसार अभिलेखित करेंगे, जिसमें उस्ताद अपने पूर्वजों और उनकी शैली के बारे में पर्याप्त प्रदर्शन करते हुए बात करते हैं। 28 जुलाई को पहला सत्र विलायत खान के बेटे शुजात खान द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा और तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन द्वारा इसका उद्घाटन किया जाएगा।“

विलायत खान का जन्म गौरीपुर (अब बांग्लादेश में) में असाधारण संगीतकारों के परिवार में हुआ था: उनके दादा इमदाद खान और पिता इनायत खान अपने समय के सबसे सुप्रसिद्ध सुरबहार और सितार वादक थे। एक विलक्षण बालक के रूप में जन्में विलायत खान 20 वीं सदी के सबसे प्रभावशाली वाद्यनवाजों में से एक बन गए। उनकी विशिष्ट गायकी अंग (स्वर उच्चारण शैली) ने उनके सितार को “गाते” हुए पेश किया और उनकी शैली शायद आज सबसे अधिक व्यापक रूप से अनुसरण की जाने वाली सितार शैली है।

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