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चिंताजनक है चुनावी बयानों का गिरता स्तर

सतीश अग्रवाल

हाल में संपन्‍न हुए लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान कुछ नेताओं ने ऐेेसी-ऐसी टिप्पणियां की, जो हमारी संस्कृति के बिल्कुल खिलाफ थे। मतदाताओं का रुझान अपने पक्ष में करने के लिए कुछ राजनेताओं ने सार्वजनिक चिंताओं के व्‍यापक मामलों पर ध्‍यान केंद्रित करने की जगह व्‍यक्तिगत हमले किये। यह बेहद दुःखद पहलू है कि राजनेता यह नहीं समझ पा रहे हैं कि वे केवल प्रतिद्वंद्वी हैं शत्रु नहीं, इसलिए भाषा गाली गलौच वाली नहीं होनी चाहिए। सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए। हाल के चुनावों में किसी ने प्रतिद्वंद्वी महिला प्रत्याशी के खिलाफ अशिष्ट भाषा का प्रयोग किया, तो कुछ ने अपने बयानों से आदर्श आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई, जिस पर चुनाव आयोग ने उन पर कुछ दिन के प्रचार पर पाबंदी भी लगाई। वहीं किसी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर ही अमर्यादित टिप्पणी करके सारी सीमाएं तोड़ दी।

काफी दुख होता है जब कोई हमारे देश के बापू महात्मा गांधी के हत्यारे गोड्से को देशभक्ति कहता है। हमे केवल यह समझना चाहिए कि आखिर उसने हत्या तो की थी, चाहे मतलब कुछ भी रहा हो। लेकिन हत्या तो हत्या है और हम हत्यारे को देशभक्त कहें यह कहां तक उचित है। जिस बापू जी के लिए सम्पूर्ण भारत ही नहीं विश्व के लोग नतमस्तक होते हैं, उनकी हत्या करने वाला कैसे देशभक्त हो सकता है। हम मान सकते हैं गोडसे हत्या करने से पहले अच्छा इंसान हो, लेकिन उसने हत्या करके जघन्य अपराध किया। उसे उसकी सजा भी मिल चुकी है। इसलिए हत्या करने वाला कोई भी हो वह अपराधी है। अपराधी को देशभक्त कहना गलत है। महात्मा गाँधी जी ने अपना पूरा जीवन देश सेवा में लगाया। हमें उनकी कुर्बानी हमेशा याद रखनी चाहिए ।

भारत का सम्‍मान दुनिया के अन्‍य देशों द्वारा उसके सदियों पुराने चरित्र और सभ्‍यतागत मूल्‍यों तथा हमेशा शांति और अहिंसा के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए किया गया। आज के नेताओं को पहले के राजनीतिज्ञों के राजनीतिक जीवन से सीख लेनी चाहिए कि कैसे वो अपने विरोधियों की काफी आलोचना किया करते थे, उनकी नीतियों की कड़ी निंदा करते थे, लेकिन कभी भी वो व्यक्तिगत हमले नहीं करते थे। आज के नेताओं को राजनीति के सभी उच्च मानकों एवं मूल्यों को हर हाल में बनाये रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए। ऐसा करके वे अगली पीढ़ी के सामने भारतीय संस्कृति की परंपरागत आदर्शवादिता को एक प्रेरणा के रूप में रख सकेंगे।

जय हिंद जय भारत

(लेखक मुरैना, म. प्र. के वरिष्ठ समाजसेवी हैं)

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