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भारत में फ्रेंडशिप करने में भी रखा जाता है अपने पैशन का ध्यान – ’मीट इंडियाज पैशनिस्ट्स’की रिपोर्ट में खुलासा

सिंगापुर टूरिज्म बोर्ड की ओर से किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, अपने पैशन में डूबे लोग मुंबई और नई दिल्ली में हैं ज्यादा

76.2 फीसदी मुंबईकर और 82.4 फीसदी दिल्ली निवासी अपने शौक पर अपनी मासिक कमाई का एक हिस्सा खर्च करते हैं। दोनों शहरों में दो तिहाई से अधिक उत्तरदाताओं (दिल्ली – 63.4 फीसदी और मुंबई – 73.4 फीसदी) का कहना है कि उनका कोई न कोई पैशन, छिपा शौक या दिलचस्पी हैं, जिसे उन्होंने अपने परिवार, दोस्तों या सहकर्मियों तक से छिपा रखा है।

मुंबईकरों के एक तिहाई से अधिक (34.9 फीसदी) और दिल्लीवासियों के एक चैथाई से अधिक (25.2 फीसदी) का दावा है कि वे अपने जुनून को आगे बढ़ाने के लिए वेतन में कटौती करने के लिए तैयार होंगे। छह में से एक मुंबईकर (15.8 फीसदी) और आठ में से एक दिल्लीवासी (12.4 फीसदी) का कहना है कि सोशल मीडिया पर उनके ’फ्रेंड्स’, ’लाइक्स’ और ’फॉलोवर्स’ को तय करने में परस्पर शौक या रुचियां एक बड़ी भूमिका निभाती हैं। रिपोर्ट के अनुसार पैशन किसी व्यक्ति के जीवन को परिभाषित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश के उत्तरदाताओं का एक तिहाई से ज्यादा (36.5 फीसदी) सामाजिक तौर पर पहली बार किसी से मुलाकात होने पर खुद के परिचय में अपने शौक या दिलचस्पी को शामिल करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देते है।

धन और समय के नियोजन के प्रति किसी व्यक्ति के दृष्टिकोण में भी उसके जुनून का बड़ा हाथ होता है। सिंगापुर टूरिज्म बोर्ड ’मीट इंडियाज पैशनिस्ट्स’ की ओर से करवाए गई इस रिसर्च में देश भर के 14 शहरों से हासिल किए गए बुनियादी डेटा के आधार पर यह भी पता चला है कि भारतीय अब पारंपरिक विवरणों जैसे पारिवारिक स्थिति, कैरियर विकल्प और निवास या मूल निवासी वाली अपनी पहचान से परे अब नई भूमिकाओं, परिभाषाओं और रिश्तों को कहीं अधिक मोल दे रहे हैं।

उदाहरण के लिए, दिल्ली (24.3 फीसदी), कोलकाता (19.2 फीसदी) और पुणे (21.4 फीसदी) में उन उत्तरदाताओं का अनुपात जिन्होंने दावा किया कि उन्होंने शौक या दिलचस्पी के आधार पर दोस्ती की है, राष्ट्रीय औसत (17.98 फीसदी) से अधिक है। मुंबई और जयपुर में अपने पैशन के आधार पर दोस्ती करने की प्रवृत्ति क्रमशः 30.6 फीसदी और 30.2 फीसदी अधिक है। इसके विपरीत, अहमदाबाद मित्रता के दृष्टिकोण में पारंपरिक है और 74.3 फीसदी लोग अपने नजदीक या पड़ोस के लोगों से दोस्ती करते हैं।

रिपोर्ट में मिली एक दिलचस्प जानकारी यह थी कि सर्वेक्षण में शामिल सभी शहरों में लोगों ने अपने शौक को एक रहस्य बनाए रखने या गुप्त रखने की भी बात की, उदाहरण के लिए, दिल्ली (59.6 फीसदी), जयपुर (62.1 फीसदी), पुणे (59.7 फीसदी), कोच्चि (59.5 फीसदी) और मुंबई (58.9 फीसदी) के लोग अपने पैशन को छिपा कर आगे बढऩे में इतने प्रवण हैं कि उनके दोस्तों, रिश्तेदारों और सहकर्मियों को भी इस बारे में पता नहीं चलता, ऐसा करने वालों का राष्ट्रीय औसत तुलनात्मक रूप से 52.4 फीसदी है। हैदराबाद में छिप कर अपने पैशन को पूरा करने की प्रवृत्ति में असाधारण बढ़त (95.7 फीसदी) देखने को मिली।

हैदराबाद में 95.2 फीसदी उत्तरदाताओं का दावा है कि वे अपने पैशन का पीछा करने के लिए अपनी मासिक कमाई का 50 फीसदी से अधिक खर्च करते हैं, और 77.3 फीसदी दैनिक या सप्ताहांत पर अपने शौक पूरे करते हैं साथ ही साथ एक नियमित नौकरी भी करते हैं। वहीं 64.4 फीसदी के शौक की जानकारी उनके अपने परिवार, दोस्तों और सहकर्मियों तक को नहीं है।

इन जानकारियों की सेकेंडरी डेटा से पुष्टि भी की गई थी जिससे पता चलता है कि 26 फीसदी महिलाएं न केवल एक यात्रा का अनुभव करने के लिए बल्कि नए लोगों से मिलने और नई संस्कृतियों के बारे में जानने के लिए अकेली यात्राओं पर भी गई हैं। लगभग 27 फीसदी महिलाओं का कहना है कि उनके अपने शौक और पैशन को पूरा करने के लिए भविष्य में अकेले ट्रेवल करने की योजना बना रही हैं।

सिंगापुर टूरिज्म बोर्ड में रीजनल डायरेक्टर (दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका) जी बी श्रीधर ने बताया कि ’पैशनिस्ता’ की अवधारणा को सिंगापुर टूरिज्म बोर्ड के ब्रांड ’पैशन मेड पॉसिबल’ के साथ जोड़ कर देखा गया है जो बताती है कि भारतीय कैसे खुद को देखते हैं, किनसे वे जुड़ते हैं और कैसे वे अपने जुनून को किसी सार्थक काम के साथ जोड़ते हैं। उन्होंने कहा, ’भारत सिंगापुर के लिए तीसरा सबसे बड़ा आगंतुक आगमन स्रोत बाजार बना हुआ है। 2018 में, हमने भारत से 1.4 मिलियन से अधिक आगंतुकों का स्वागत किया, 2017 में 13 फीसदी की वृद्धि हुई। अपने जुनून को पूरा करने के लिए लोगों की यात्राएं तेजी से बढ़ी है। यात्री ऐसे अनोखे अनुभव चाहते हैं जो उन्हें उनके पैशन से जोडऩे में मदद करें। इसके अलावा, वे अपने अवकाश पर उन गतिविधियों में अपना समय और पैसा खर्च करने के लिए तैयार हैं जो उन्हें उन चीजों से जोड़ती हैं जिनका उन्हें जुनून है। ’मीट इंडियाज पैशनिस्ता’ रिपोर्ट यह पुष्टि करती है कि भारतीय यात्रियों का पैशन यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं कि वे समाज से कैसे जुड़ते हैं, कहां जाते हैं और कैसे अपनी ऊर्जा खर्च करते हैं।’

एसटीबी ने अगस्त 2017 में अपना ब्रांड अभियान ’पैशन मेड पॉसिबल’ शुरू किया। यह दृष्टिकोण सिंगापुर के बेजोड़ रवैये और मानसिकता को दर्शाता हैः पैशन से प्रेरित, दृढ़ संकल्प और उद्यम की भावना जो पूरी कभी भी संभावनाओं का पीछा करने में ढीली नहीं पड़ती। यह एक ऐसा ब्रांड है जो सिंगापुर के अंतर्मन को अभिव्यक्त करता है: लोगों के जुनून को आकार देना और उनके जुनून से प्रेरित प्रगति के लिए लगातार नई संभावनाओं को पेश करते रहना। ब्रांड अभियान के हिस्से के रूप में, एसटीबी ने अपनी ’पैशन ट्राइब’ स्ट्रेटजी भी पेश की है जो जो संभावित आगंतुकों को उनकी जीवन शैली, रुचियों और यात्रा की उनकी वजह के आधार पर समूहबद्ध करती है। ’पैशन ट्राइब्स’ कंज्यूमर को सात भागों में बांट कर सिटी में अपने पैशन और दिलचस्पी को पूरा करने का मौका देती हैः एक्शन सीकर्स, फूडीज, कलेक्टर, कल्चरशोपर्स, एक्सप्लोरर, सोशलवाइजर और प्रोग्रेसर्स। यह स्ट्रीट सर्वे भारतीय उपभोक्ताओं को बेहतर ढंग से समझने और उनसे जुड़ने के लिए एसटीबी का नवीनतम प्रयास है।

श्रीधर ने कहा कि रिपोर्ट के निहितार्थ तत्काल यात्रा और पर्यटन क्षेत्र से अलग हैं। समय आ गया है कि लोगों को यह मानना होगा कि उनका पैशन कुछ वास्तविक करने, निवेश करने योग्य है – समय और धन दोनों के माध्यम से। आज, यह पैशन ही है कि जो लोगों को चला रहा है। पैशन जब विचारधारा बनते हुए किसी विशेष कारण की ओर निर्देशित हो जाता है तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निर्णयों तक पर प्रभाव डाल सकता है जैसे कि देश की अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संबंध आदि।

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