Wednesday , January 29 2020
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चंद सिक्कों के लिए देश के शत्रु बनने वाले पुलिसकर्मी

आर.के. सिन्हा जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी देविंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद लगातार जिस तरह के खुलासे हो रहे हैं, वह वाकई दिल दहलाने वाले हैं। यकीन नहीं होता कि कोई पुलिस अफसर चंद सिक्कों के लिए इतना गिर जाएगा कि देश के दुश्मनों से हाथ मिला लेगा। पर अफसोस ...

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सदन में सार्थक चर्चा का संवैधानिक महत्व

डॉ. दिलीप अग्निहोत्री संसद व विधानमंडल में सार्थक व सकारात्मक चर्चा को ही उचित माना जाता है। इसमें पक्ष-विपक्ष के विचार स्वभाविक हैं। लेकिन समाज व राष्ट्रहित से विषयों पर एक प्रकार की सहमति भी होनी चाहिए। सदस्यों को अपनी क्षमता में विकास का प्रयास करना चाहिए, जिससे वह किसी ...

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फैशन इंडस्ट्री और ग्राहकों की सोच को बदल रहा है डिजिटल फैशन

 समय के साथ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। हर रोज लोगों और वैज्ञानिकों के द्वारा इंटरनेट के माध्यम से नए इनोवेशन्स का हम सब के बीच शेयर किया जाता है। फैशन इंडस्ट्री भी अपनी विनिर्माण और पोस्ट-प्रोडक्शन के लिए टेक्नॉलजी का इस्तेमाल कर रही है। ऐसी ही एक ...

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सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण कितना उचित ?

बीएसएनएल एमटीएनएल भी जाएंगी अब निजी हाथों की गिरफ्त में? इनकी दुर्दशा का जिम्मेदार कौन? गजब का गणित, बीएसएनएल एमटीएनएल को पुनर्जीवित करने का खर्चा 75 हजार करोड़, जबकि इन्हें समाप्त करने पर लगेंगे 95 हजार करोड़ ?  5 से 10 दस गुना फीस लेकर भी निजी संस्थान आईआईटीयंस से ...

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कब तक ‘बाहरी’ होने का झेलते रहेंगे दंश

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने को लेकर पक्ष-विपक्ष में ढेरों तर्क-कुतर्क गढ़े गये. सार्वभौमिक तर्क है कि एक देश, एक विधान. यह तर्क लोकतांत्रिक दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ है, लेकिन क्या एक देश, एक विधान सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लिए हैं, देश के अन्य हिस्सों में ऐसा भेदभाव नहीं है. सवाल ...

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मतभेद बनाम मनभेद

मतभेद और मनभेद दो ऐसे शब्द हैं, जिनकी आवाज में भले एकरूपता का आभास होता है, लेकिन परिणाम में ये बिल्कुल एक दूसरे के प्रतिकूल हैं। किसी के प्रति हमारा वैचारिक अंतर मतभेद कहलाता है। जिसकी वजह से हम उसके विचारों के अतिरिक्त उसके हर निर्णय व तथ्य को स्वीकार ...

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महाजनी खाते” से निकली किसानों की फर्जी लाटरी बनाम “जीरो बजट खेती”

*जीरो बजट खेती ,नाम में ही खोट है,* *10,000 और किसान उत्पादक संगठन बनाने की घोषणा, जबकि पहले के किसान उत्पादक संगठन बदहाल पड़े हैं।* कैसे होगी किसानों की आय 2022 में दोगुनी? यक्ष प्रश्न  कल भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्री ने देश का बजट 2019 पेश किया। ...

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चिंताजनक है चुनावी बयानों का गिरता स्तर

हाल में संपन्‍न हुए लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान कुछ नेताओं ने ऐेेसी-ऐसी टिप्पणियां की, जो हमारी संस्कृति के बिल्कुल खिलाफ थे। मतदाताओं का रुझान अपने पक्ष में करने के लिए कुछ राजनेताओं ने सार्वजनिक चिंताओं के व्‍यापक मामलों पर ध्‍यान केंद्रित करने की जगह व्‍यक्तिगत हमले किये। यह बेहद ...

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फिर धोखे के शिकार हो रहे हैं किसान

# देश की घटती हुई विकास दर तथा दिन प्रतिदिन बढ़ती बेरोजगारी, आईसीयू में पड़ी खेती तथा आत्महत्या कर रहे किसान, अब नहीं रहे चुनावी मुद्दे. # देश का समग्र विकास तथा राम मंदिर जैसे टिकाऊ मुद्दे कब और कहां दफन हो गए पता नहीं चल रहा. # गरीबी-विकास, राम-रोटी-रोजगार, ...

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आईसीयू में ‘इंद्रावती’ और एक नदी की मौत के मायने

“पृथ्वी दिवस” पर विशेष लेख: मिनी नियाग्रा के नाम से प्रसिद्ध बस्तर का चित्रकोट जलप्रपात अंततः सूख गया, एक सप्ताह तक एक बूंद पानी नहीं,। क्षेत्र के पुराने जानकारों का कहना है कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। इस नीले ग्रह में मानव समाज को बचाना है तो हमें अपने ...

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