Thursday , December 12 2019
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समीक्षा

अब्दाली की जीत की नहीं, मराठों की राष्ट्रीय सोच की कहानी है ‘पानीपत’

अश्वनी राय   आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में अर्जुन कपूर, संजय दत्त और कृति सेनन की मुख्य भूमिकाओं से सजी फिल्म ‘पानीपत’ 1761 में अफगान शासक के विरुद्ध वीर मराठा सदाशिव राव भाऊ के नेतृत्व में लड़े गए पानीपत के तीसरे युद्ध की कहानी है। ‘पानीपत’ फिल्म हर युवा को मराठा साम्राज्य ...

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मज़ेदार व रोचक फ़िल्म है ‘पति पत्नी और वो’

गायत्री साहू  एक वो दौर था जब अरेंज मैरिज में आपसी खुशी ना होते हुए भी दंपत्ति अपना पूरा जीवन एक साथ निभाते थे और यदि पति बेवफाई भी करे तो पत्नी अपनी किस्मत समझ यह दुख भी स्वीकार लेती थी। अब नए जमाने में अरेंज तो छोड़िए लव मैरिज ...

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एक लड़की के मनोभाव को लेकर प्यार को परिभाषित करती है ‘लव यू टर्न’

 संतोष साहू 3 स्टार  प्रेम कहानी में एक लड़का होता है और एक लड़की होती है। लेकिन हरीश राउत निर्देशित फिल्म ‘लव यू टर्न’ प्रेम त्रिकोण पर आधारित है जिसमें एक लड़की है और उसके दो प्रेमी हैं। इस फ़िल्म में एक लड़की के मनोभाव का गहराई पूर्वक चित्रण करने ...

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मानसिक प्रवृत्ति और विकृति को दर्शाती है ‘टोनी’

 विपुल के रावल की फ़िल्म ‘टोनी’ की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जो एक चर्च में पादरी है और लोगों को शांति का संदेश देता है वहीं उसका दूसरा पहलू बेहद खतरनाक है। वह समाज की बुराई को खत्म करने के बुरे लोगों की हत्याएं भी करता है। शहर ...

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देशप्रेम और सौहार्द का पैग़ाम लेकर आया ‘कमांडो 3’

3.5 स्टार  भारत में आजादी के समय से ही हिन्दू और मुस्लिम के बीच एक नफरत की लकीर खिंची है। बहुत प्रयास किये गए आपसी नफरत को मिटाने के लिए लेकिन इस दर्द की टीस कोई मिटा नहीं पाया। इस विषय पर कई फ़िल्म बनी है और कामयाब भी रही ...

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मर्डर मिस्ट्री साधारण स्तर की ‘लफंगे नवाब’

ढाई स्टार  रहस्य, रोमांच को आधार बनाकर जो भी फिल्में बनती है उससे दर्शक शुरू से अंत तक कुर्सी से चिपके रहते हैं। पूरी फिल्म देखते हुए निर्देशक के सोच के साथ दर्शक भी अपने दिमाग का घोड़ा दौड़ाते रहता है मगर कुछ ही फिल्मकार उनके दिमाग के साथ खेल ...

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कॉमेडी और ड्रामा में संतुलन नहीं बिठा पाया ‘बागपत का दूल्हा’

ढाई स्टार  पश्चिम यूपी की क्षेत्रीय बोली को इन दिनों फ़िल्म और टीवी में जमकर भुनाया जा रहा है। लेकिन इस बार तो वहां के मशहूर शहर बागपत के नाम से ही फ़िल्म बन गई है। निर्देशक करण कश्यप की फ़िल्म की कहानी में बागपत में शुक्ला जी और मिश्रा ...

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जनजागृति के लिए बनी है ‘झलकी’

4 स्टार  जानवर हो या इंसान उसकी जिंदगी उनके बच्चों में ही समाहित होती है वह अपना दुख और तकलीफें भुलाकर अपनी संतान को हर सुख देने का प्रयास करते हैं। जानवर की परिस्थिति तो समझ आती है पर मनुष्य अपने बच्चों को कैसे उनका बचपन छोड़कर बंधवा मजदूरी की ...

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मनोरंजन में प्रभाव नहीं ला पाता ‘लाफ्टर के चैप्टर’

दो स्टार  आयुष फिल्म्स इंटरनेशनल की प्रस्तुति निर्माता किशोर सावलानी और निर्देशक जाबिर अली की फ़िल्म ‘लाफ्टर के चैप्टर’ में एक नए प्रयोग के साथ रील और रियल खलनायकों की कॉमेडी को परोसा गया है। फ़िल्म में दिखाया गया है कि एक फ़िल्म निर्माता को लेखक अपनी काल्पनिक कहानी सुनाता ...

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आज के रिश्ते को बुनियादी तौर पर मजबूत करती है ‘लव शॉट्स’

 सेक्स के विषय में जब भी चर्चा होती है लोग इस विषय में बात करने से बचना चाहते है। सेक्स शब्द सुनते ही लोगों को शर्मिंदगी का अहसास होता है। सरकार भी सेक्स के प्रति जागरूकता फैलाने और उससे होने वाली बीमारियों और दुष्प्रभाव से बचने के लिए पाठ्यक्रम में ...

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