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जीवन में सम्यक पुरुषार्थ करना

अद्भुत चातुर्मास मुंबई

श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई के तत्वावधान में बोरीवली पश्चिम के वृंदावन वाटिका में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री सुदर्शन लाल जी म.सा. ने जीवन व्यवस्थित करने के लिए समय प्रबंधन की प्रेरणा देते कहा कि साधना करनी है, तो जीवनचर्या, खानपान व्यवस्थित होने चाहिए। हमें समय के मूल्य को समझना होगा, उसका सदुपयोग करना होगा। गलत होने पर सामने वाला छोटा हो तो भी माफी मांग लेना, मन हल्का हो जाएगा। सफाई में बुद्धि का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। इससे आपकी महानता बढ़ेगी।

आचार्य श्री ने कहा कि पुरुषार्थ, ज्ञान अंतर्मुखी होना चाहिए। जो करना चाहिए, उसे नहीं करना और जो नहीं करना चाहिए, उसे करना ही प्रमाद कहलाता है। वो पुरुषार्थ जो राग – द्वेष बढ़ा दे, मिथ्या त्व पुरुषार्थ है और जो त्याग बढ़ाए, उसे सम्यक पुरुषार्थ समझना चाहिए। सोचना जीवन कौन सा पुरुषार्थ करते व्यतीत हो रहा है। मिथ्या त्व में व्यक्ति सरलता से चला जाता है। लेकिन उसे छोड़ने में ताकत लगानी पड़ती है। इसीलिए प्रभु संकेत करते हैं कि आपके जीवन में सम्यकत्व का पराक्रम आए। प्रवचन के दौरान गुरुदेव ने किसी अनजान साधु के प्रति भी असीम श्रद्धा और विश्वास के प्रसंग सुनाए ।

संचालन करते चतुर्मास परामर्श समिति के सदस्य लक्ष्मी लाल बडोला ने गुरु महिमा का गीत प्रस्तुत करते कहा कि गुरु की शरण में बैठकर हम अपने पुरुषार्थ की दिशा का मूल्यांकन करें और आत्म कल्याण की ओर अग्रसर होने की साधना करें। संवत्सरी के बाद भी संघ में तप की निरंतर लड़ी चलने की जानकारी देते उन्होंने श्रावकों से भक्तामर आराधना के लिए युवा संघ के मंत्री त्रिलोक खटोड़ को अपना नाम लिखाने की बात कही। पारस देवी पोखरणा के आठ की तपस्या की अनुमोदना तप से की गई। आज के स्वामी वात्सल्य का लाभ तपस्वी के परिवार वालों ने लिया।

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