Home / धर्म-अध्यात्म / भाव शुद्धि और निर्भयता का मुख्य आधार है क्षमापना

भाव शुद्धि और निर्भयता का मुख्य आधार है क्षमापना

पूरे वर्ष में जैन मतावलंबियों को पर्वाधिराज पर्यूषण का शुद्ध अंतःकरण से इंतजार रहता है। यह ऐसा अध्यात्मिक पर्व है, जिसमें हम अपने कषायों को कम करके आत्मोन्नति के लिए अग्रसर होते हैं। पूरी दुनिया में मानवता के लिए हमारा जैन धर्म प्रसिद्ध है। हमारा धर्म ना केवल इंसान बल्कि समस्त सृष्टि में व्याप्त प्राणी मात्र के प्रति संवेदना का पाठ पढ़ाता है।

हमारे धार्मिक ग्रंथों में सहज भाव से अपनी गलतियों के लिए प्रायश्चित कर लेने की प्रेरणा देते हुए कहा गया है कि किसी भी समस्या का समाधान राग, द्वेष और प्रतिशोध से नहीं हो सकता। इसलिए इन कषायों को खत्म करने की पहल होनी चाहिए और इस पहल का सुअवसर होता है, हमारा क्षमापना पर्व। यह पर्व अपने कषायों पर विजय प्राप्त कर अपना अगला भव सुधारने की प्रेरणा देता है।
क्षमा और सहनशीलता में धर्म की आत्मा निवास करती है। साम्प्रदायिक सौहार्द क्षमाभाव से ही संभव है। अब कट्टरता का कोई महत्व नहीं रहा। वर्तमान युग में ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण से भी खतरनाक है मानसिक प्रदूषण। जब हम क्षमा देते हैं और लेते हैं तो उसके शुध्द परमाणु पूरे विश्व में प्रसारित होकर प्राणियों को बहुत हद तक मानिसक शांति प्रदान करते हैं। मानसिक प्रदूषण से विश्व की रक्षा करने के लिये वर्तमान परिवेश में जैन धर्म सर्वोत्तम धर्म है । विशाल हृदय के बिना मानव महान नहीं बनता। क्षमाभाव जैन का मूल धर्म है। मजा प्रेम ओर क्षमा में है, झगड़ने में नहीं।
हमारी जाने-अनजाने की चूक से यदि किसी का दिल दुखा हो, तो उसके लिए हमें बस हृदय की गहराइयों से इतना ही कहना होता है मिच्छामि दुक्कड़म। लेकिन इसके बदले में हमें अपार आत्मिक सुख की अनुभूति की प्राप्ति होती है। हमारे ग्रंथों में भी कहा गया है कि बस, आप सच्चे दिल से क्षमा मांगे और उसका परिणाम अपनी आत्मा में महसूस करें। क्षमापना कर प्रत्येक व्यक्ति चित्त में प्रसन्नता ला देती है। फिर चित्त की प्रसन्नता से सभी प्राणियों, भूतों और जीवों के प्रति मैत्री भाव आ जाता है, जो राग और द्वेष भाव को मिटा देता है। क्षमायाचना चित्त प्रसन्नता, मैत्री भाव, भाव शुद्धि और निर्भयता का मुख्य आधार है। अतः हम सभी इस जगत सभी बोल-अबोल जीवों के प्रति भगवान महावीर स्वामी के दिखाए ‘क्षमा’ के मार्ग पर चलकर विश्व में अहिंसा और शांति संदेश के वाहक बनें।

Check Also

नए सिरे से लिखा जाएगा भारत की सीमाओं का इतिहास: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी इजाजत

नई दिल्ली। भारत की सीमाओं का इतिहास नए सिरे से लिखा जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *