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सांसारिक रिश्ते दर्द देने वाले हैं : आचार्य श्री सुदर्शन लाल जी म. सा.

अद्भुत चातुर्मास मुंबई

वृंदावन वाटिका, बोरीवली पश्चिम में श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई के तत्वावधान में हो रहे अद्भुत चातुर्मास में युवा मनीषी, आगम ज्ञाता, पूज्य गुरुदेव श्री सुदर्शन लाल जी म.सा. ने फरमाया कि यह संसार क्षणिक मात्र के सुख और लंबे समय के दुख से घिरा हुआ है। जिस संसार को सुख के लिए जी रहे हैं, उसे वीतराग प्रभु ने दुख का कारण बताया है। आदमी संबंधों से सुख की उम्मीद करता है। लेकिन दुख की घड़ी में ये सांसारिक संबंध काम नहीं आते। सोचना, जब आप कभी तकलीफ में थे, तो आप के कितने रिश्ते नजदीक खड़े रहे। साथ देने सुख में ही लोग आते हैं। सारी उम्मीदें निराश कर जाती हैं। जिन पर पूरा भरोसा था, वह टूट जाता है। रिश्ते जोड़ते खुशी हुई होगी, परंतु रिश्तों में जीते वह उम्मीद पूरी नहीं हो पाती। सांसारिक रिश्ते तुम्हें दर्द देने वाले हैं। सोचो, संसार की वास्तविकता क्या है, यह जानने का दृष्टिकोण क्यों नहीं पैदा हुआ? यहां तनिक सुख भी मिलना बड़ी बात है। बेटे – बहू के पास रहकर भी मिलने को तरसने वाली बूढ़ी मां की परिस्थिति को महसूस करना। ऐसी परिस्थिति किसी की भी हो सकती है। यह संसार का सबसे बड़ा दर्द है ।इस संसार ने दर्द के सिवा दिया क्या है?

गुरुदेव ने फरमाया कि कभी सोचा कि आप कमी यानी कामना में जी रहे हैं । संसार का पहला सुख स्वास्थ्य है। बीमारी कर्म से नहीं, शारीरिक कारणों, तत्वों के असंतुलन से आती है। खाना-पीना, भोग विलास भी कभी-कभी बीमारी का कारण बन जाते हैं। लोग संसार के भोगों में सुख देखते हैं। याद रखना ज्यादा भोग भी दुख का कारण बन जाता है । शरीर ही दुख का कारण बन जाता है। ऐसे में मौत से ज्यादा दर्द शरीर ही दे जाता है। भोग में लगने वाला पैसा किसी के काम नहीं आता। लेकिन किसी के काम में आने वाला पैसा कुछ नहीं तो संतुष्टि तुरंत दे जाता है। एक बार इसे महसूस करके देखना। सौभाग्य मिला है तो उसका सदुपयोग करना, नहीं तो उसका परिवर्तन दुर्भाग्य में होने लगता है।

संचालन करते संघ के मंत्री साकेत पोखरणा ने गुरुदेव के सानिध्य में निरंतर लग रहे धर्म – ध्यान के ठाट में अधिकाधिक संख्या में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ लेने का आह्वान किया। मुंबई में लगातार हो रही बारिश के बावजूद प्रवचन में भारी संख्या में महिलाओं और पुरुषों की उपस्थिति रही।

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