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हर हाल में मुस्कुरा कर जिएं: लालितप्रभ जी

जोधपुर। महोपाध्याय ललितप्रभ सागरजी महाराज ने कहा की जीवन में हजार खुशियों को पाने का एक ही मंत्र है : हर हाल में खुश रहना सीखें। परेशानियां महापुरुषों के जीवन में भी आती है पर वे उसे हंसते हुए सामना करते हैं लेकिन हम परेशानियों के सामने रोना शुरू कर देते हैं। अगर हम रोकर के जिएंगे तो जिंदगी नरक बन जाएगी और हंसकर के जिएंगे तो जिंदगी स्वर्ग बन जाएगी।उन्होंने कहा कि सुबह उठकर के खुद से यह जरूर पूछें कि तुझे सुखीराम बनना है या दुखीराम। तुरंत फैसला करें और संकल्प लें कि मैं सुखीराम बनूंगा। जीवन की खुशियां महंगी कार, सुंदर पत्नी, आलीशान बंगला, मोटा बैंक बैलेंस या नौकर चाकर में नहीं होती, हमारे भीतर में रहने वाले अच्छे विचारों में खुशियां छुपी होती हैैं। उन्होंने कहा कि जब मनचाहा हो केवल तभी मत मुस्कुराओ वरन जब अनचाहा हो तब भी मुस्कुराओ। अगर हम अपनी आलोचना और टिप्पणी को मुस्कुरा कर लेंगे तो उससे पार हो जाएंगे नहीं तो जिंदगीभर परेशान होते रहेंगे।

संतप्रवर गांधी मैदान में सुखराज नीलम मेहता परिवार द्वारा आयोजित सत्संगमाला में स्वास्थ्य सप्ताह के तीसरे दिन एक हजार खुशियां पाने का एक मंत्र विषय पर भाई बहनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि खुशी पाने के लिए कभी भी गलत रास्ते पर न जाएं। अगर हम गलत रास्ते पर चलेंगे तो आईने में कभी खुद से आंखें नहीं मिला पाएंगे और सही रास्ते पर चलेंगे तो खुद को आईने में देखकर गर्व करने लगेंगे। उन्होंने गलत रास्ते पर चलने वालों को सावधान करते हुए कहा कि भगवान अच्छे लोगों की परीक्षा तो लेता है, पर बुरे वक्त में साथ नहीं छोड़ता और भगवान बुरे लोगों की परीक्षा नहीं लेता, उन्हें सब कुछ देता है पर बुरे वक्त में कभी साथ नहीं देता है।
ख्वाहिशें कम करने की सलाह देते हुए संतप्रवर ने कहा कि हमारी इच्छाएं कभी पूरी नहीं होती, पर इच्छाशक्ति कभी अधूरी नहीं रहती। इच्छाएं तो सम्राट की भी पूरी नहीं होती, पर आवश्यकताएं भिखारी की भी पूरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि इंसान बड़ा गजब का है सिर पर बाल न आए तो दवाई ढूंढता है, बाल आ जाए तो नाई ढूंढता है, बाल काले हो तो लुगाई ढूंढता है और बाल सफेद हो जाए तो डाई ढूंढता है, पर जिंदगी भर कुछ न कुछ ढूंढता रहता है। हम अपनी इच्छाओं पर अंकुश लगाएं क्योंकि सफर आसान बनाना है तो सामान कम रखिए  और जिंदगी को आसान बनाना है तो अरमान कम रखिए।

विचार शैली को पॉजिटिव बनाने की प्रेरणा देते हुए संतप्रवर ने कहा कि कभी हमारे पैरों में पहनने को जूते भी न रहे तो भी हमें यह सोचकर खुश होना चाहिए कि भगवान ने जूते नहीं दिए तो क्या हुआ कम से कम पांव तो दिए हैं दुनिया में लाखों लोग ऐसे हैं जिनके पास पांव ही नहीं है।  उन्होंने कहा कि जिंदगी जलेबी की तरह भले ही टेडी मेडी है, पर मुस्कान  और  पॉजिटिविटी की चासनी लगते ही वह स्वादिष्ट हो जाती है। इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं – कुछ खिलाकर खुश होते हैं तो कुछ खाकर, कुछ देकर के खुश होते हैं तो कुछ लेकर के और कुछ लुटाकर के खुश होते हैं तो कुछ लूटकरके खुश होते हैं। अगर हम खिलाकर या देकर के खुश हो रहे हैं तो समझ लेना चाहिए कि हमारी विचार शैली बहुत अच्छी है।

खुशियां पाने के अन्य मंत्रों में संतप्रवर ने शिकायत की आदत छोड़ने और हर चीज का स्वागत करने की प्रेरणा दी, संतुष्ट रहने और किसी से वैर की गांठ न बांधने की सलाह दी।

प्रवचन के दौरान जब संतप्रवर ने  हंसते मुस्कुराते हुए जीना जिसको आ गया, टूटे हुए दिलों को सीना जिसको आ गया… भजन गुनगुनाया तो श्रद्धालु हंसते मुस्कुराते हुए झूमने लगे।
इससे पूर्व मुुनि शांतिप्रिय सागर ने कहा कि सदाबहार स्वस्थ और प्रसन्न रहने के लिए पांव को गर्म, पेट को नरम और माथे को ठंडा रखें। दिन में कम से कम 4 घंटे मेहनत अवश्य करें, शारीरिक श्रम से जी न चुराए, पेट को साफ रखें, पेट में कब्जी न होने दें और माथे को हमेशा कूल रखें तो बीमारियां आपसे 100 कदम दूर रहेगी।
प्रवचन समारोह में दीप प्रज्वलित करने का सौभाग्य रमेश जैन, पदम चंद जैन, पारस सिंघवी, गौरव कटारिया, पुष्पा मेहता, संजय शाह, दिव्या चोपड़ा, डॉ चिरंजीव जैन ने लिया
प्रवचन में आभार अशोक पारख ने दिया।
चातुर्मास समिति के विनोद प्रजापत ने बताया कि को संत चंद्रप्रभ गुरुवार को गांधी मैदान में सुबह 8:45 बजे कैसा करें आहार निरोगी रहे परिवार  विषय पर संबोधित करेंगे।

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