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व्यक्तिगत अनुकूलता की इच्छा पारिवारिक विघटन का कारण बनती है : श्री सुदर्शन लाल जी म. सा.

मुंबई। वृंदावन वाटिका बोरीवली पश्चिम में श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई के तत्वावधान में चल रहे अद्भुत चातुर्मास में व्याख्यान देते शासन गौरव, आगम ज्ञाता, युवा मनीषी पूज्य गुरुदेव श्री सुदर्शन लाल जी म.सा. ने फ़रमाया कि परिवार को एकजुट रखने के लिए व्यक्तिगत अनुकूलताएं छोड़नी पड़ती हैं। जब अनुकूलता की इच्छाएं बढ़ने लगती हैं तो परिवार टूटने की स्थिति में आने लगता है। जबकि महत्वपूर्ण बात तो यह है कि अनुकूलताएं छोड़ने से किसी का सुख नहीं छूटता। परिवार में एक दूसरे का ध्यान रखने से बिखराव नहीं होता ।

जिस परिवार में अपने से ज्यादा पारिवारिक सदस्यों का ध्यान रखा जाता है, वहां प्रेम और समन्वय रहता है। एक दूसरे का ध्यान रखने वाला परिवार खुशहाल रहता है। परिवार में त्याग की भावना रहने से प्रेम निरंतर बढ़ता रहता है। चुनाव आपका है कि परिवार की एकता के लिए अपना सुख छोड़ना है ? या अपने सुख के लिए परिवार को छोड़ना है ?

आचार्य श्री ने श्रावकों को प्रेरणा देते हुए फरमाया कि रोज सुबह परिवार में सामूहिक रूप से मंदिर में प्रार्थना करना और अपने – अपने संबंधों का मूल्यांकन करना। कोर्ट में जाने से परिवार की इज्जत नीलाम होती है। त्याग की भावना आते ही प्रेम की धारा बहने लगती है। जबकि अपने सुख की चाहत संकुचित बनाती है। अपना – अपना सुख देखने के कारण ही परिवार टूटता है। गुरुदेव ने प्रवचन में सभी को पारिवारिक मामलों को लेकर कभी भी कोर्ट ना जाने के संकल्प करवाए।

संचालन करते संघ अध्यक्ष ललित डांगी ने कहा कि हम परिवार में एक दूसरे के प्रतियोगी ना बनकर सहयोगी बने तो परिवार उत्तरोत्तर विकास करेगा। संघ में धर्म आराधना धूमधाम से चल रही है। उन्होंने जानकारी दी कि छोटे बच्चों के लिए धार्मिक शिविर महिला मंडल की ओर से चलाए जा रहे हैं। चातुर्मास को सफल बनाने में संयोजक संपतराज चपलो त, रणजीत सिंह कुमठ, ललित डांगी, साकेत पोखरना, राजेंद्र खटोड़ महेंद्र मेहता, अनिल पोखरणा, सुरेंद्र चपलो त, अशोक डूंगरवाल, राजेंद्र कांवडिया, दिनेश चौधरी, अमृत कोठारी, हेमराज गोखरू, महिला मंडल की रीना चपलो त, कविता पोखरना, नाम रीता मेहता, मंजू संचेती, मीना संचेती, चंचल बडोला, नरेंद्रा बंब, जितेंद्र रांका और त्रिलोक चंद खटोड सहित चातुर्मास समिति की पूरी टीम व्यवस्थाओं में लगी हुई है।

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