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चातुर्मास की सार्थकता ज्ञान की आराधना और तप की साधना में है : श्री चंद्र यश विजय जी म. सा.

जिन शासन के जयकारों के साथ भव्य रूप से हुआ मुनि श्री का चातुर्मास प्रवेश

मुंबई। श्री भारत नगर श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ, ग्रांट रोड के तत्वावधान में आचार्य देवेश श्रीमद् विजय हेमेंद्र सूरीश्वर जी म.सा. के सुशिष्य रत्न एवम् श्रीमद् विजय ऋषाभचंद्र सूरीश्वर जी म. सा. के आज्ञा नुवर्ती मुनिराज श्री चंद्र यश विजय जी म.सा. के 2019 का भव्य चातुर्मास प्रवेश झूमते युवाओं के उमंग और महिलाओं के मंगल गीत के साथ हुआ। अपने चातुर्मास प्रवेश पर आध्यात्मिक प्रवचन देते हुए श्री चंद्र यश विजय जी म.सा.

ने कहा कि ज्ञान का उपयोग नहीं होगा, तो संसार में भटकाव बना रहेगा। हमारे जिन शासन में कहा गया है कि जब तक जीवन में दर्शन, ज्ञान, चरित्र और तप को अंगीकार नहीं किया जाएगा, तब तक मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो सकती। चातुर्मास की सार्थकता ज्ञान की आराधना और तप की साधना में ही है।

मुनि श्री ने कहा कि सिद्धि तप की यात्रा मुंबई से ही प्रारंभ हुई थी। हमें तप के उस पुण्य से आगे बढ़ना है । उन्होंने पूर्व के चातुर्मासों में क्रमश 201 और 275 की संख्या में सिद्धि तप होने का हवाला देते हुए कर्म बद्ध को तोड़ने के लिए सिद्धि तप की महिमा बताई और इस चातुर्मास में अधिक संख्या में सिद्धि तप करने की प्रेरणा दी। साथ ही कहानियों के माध्यम से उपयोग की जानकारी की महत्ता भी बताई। गुरुदेव ने दक्षिण मुंबई के सकल जैन संघ को सिद्धि तप के लिए आमंत्रित करने पर भारत नगर श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ को साधुवाद भी दिया।

इस अवसर पर मुनि श्री पियूष चंद्र म.सा. ने कहा कि श्रीमद विजय राजेंद्र सूरीश्वर जी म. सा. का तेजस्वी जीवन रहा है। उनको याद करते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वर्तमान में जिनशासन ध्वज का ऐसा प्रभाव दिख रहा है कि आज मुंबई में 7 चातुर्मास हो रहे हैं। उन्होंने अपने समाज के आचार्य भगवंतों की गौरवशाली परंपरा और उनके योगदान पर प्रकाश डालते श्रीमद् विद्या चंद्र जी महाराज जी की साधना की ऊंचाइयां और उनके प्रभावों से श्रावक – श्राविकाओं को परिचित कराया। श्री विवेक विजय जी म. सा. ने सभागार में बैठे लोगों को अपनी माटी की भाषा में चातुर्मास के दौरान अधिकाधिक धर्म लाभ लेने की प्रेरणा दी।

इससे पूर्व सुबह काफी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने ग्रांट रोड पूर्व स्थिति सिद्धेश ज्योति टावर से भव्य वरघोड़ा निकाल कर श्री चंद्र यश विजय जी म. सा. , श्री हृदय यश विजय जी म. सा. , श्री रश्मि रेखा श्रीजी म. सा. , श्री विराग यशाश्री जी म. सा. , श्री कीर्ति यशा श्री जी म. सा. और श्री कुसुम यशाश्री जी म.सा. का भारत नगर जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में दिव्य चातुर्मास प्रवेश कराया। इस दौरान बारिश की रिमझिम बूंदों के बीच बैंड बाजों के साथ श्रावक – श्राविका गुरु भगवंतों के वरघोड़े में हर्षोल्लास चल रहे थे । स्वागत यात्रा में शामिल सिर पर कलश लिए महिलाएं चातुर्मास की दिव्यता के प्रति अपना समर्पण व्यक्त कर रही थी।

गुरु भगवन्तों के चातुर्मास प्रवेश के बाद अन्य कार्यक्रमों की शुरुआत सामूहिक गुरु वंदना से हुई। इस दौरान गुरु पूजन, कांबली और प्रभावना के चढ़ावे की बोलियां तथा अन्य विधि-विधान पारंपरिक रूप से विधिवत संपन्न हुए। 201 रुपए से श्री संघ की पूजा की गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान गायक संगीतकार विनीत गेमावत ने अपने मधुर गीत – संगीत से आयोजन में भक्ति का प्रवाह बनाए रखा।
चातुर्मास प्रवेश कार्यक्रम में श्री मोहनखेड़ा तीर्थ मध्य प्रदेश के ट्रस्टी पृथ्वीराज सेठ , हुक्मीचंद बागरेचा, जयंतीलाल, बाफना, सुखराज, कबदी, मांगीलाल रामानी , संजय सराफ, शांतिलाल जैन थराद, शांतिलाल जैन सियाणा , श्री पारसनाथ राजेंद्र धाम नाकोड़ा तीर्थ के*
*श्री राज हर्ष हेमेंद्र जैन ट्रस्ट के ट्रस्टी* सायरमल नाहर, रमेश हरण, रमेश वाणीगोता, मोहन लाल जैन, अरविंद मदानी, महेंद्र कोठारी, फुटरमल जी रामाणी,
तथा हैदराबाद, बेंगलोर, चेन्नई, अहमदावाद, विजयवाड़ा, गुंटूर, काकीनाडा, रतलाम, राजगड़, महिदपुर, इंदौर,
एवं दक्षिण भारत व मध्यप्रदेश के अनेक नगरों के गुरुभक्त शामिल हुए।

आराधना युक्त – आडंबर मुक्त के इस चातुर्मास में प्रत्येक रविवार को विशेष रूप से विविध अनुष्ठान होंगे। इसके तहत श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ अट्ठम तप की भव्य आराधना, श्री महावीर निर्वाण कल्याणक आराधना, श्री ज्ञान पंचमी आराधना के विविध आयोजन, श्री नवकार महामंत्र आराधना, श्री हेमेंद्र सूरीश्वर पुण्योत्सव, श्री पर्यूषण महापर्व आराधना और श्री नवपदजी ओली आराधना के आयोजन किए जाएंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति के सभी कार्यकर्ता लगे हुए थे।

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