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हल्बी गोंडी दोरली का अस्तित्व बचाने हुई बैठक

हल्बी, गोंडी, दोरली,भतरी आदि बस्तर अंचल की क्षेत्रीय बोलियों, भाषाओं के संरक्षण व संवर्धन के लिए छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य परिषद “आदिवासी शोध व कल्याण परिषद” व जनजातीय सरोकारों की राष्ट्रीय पत्रिका ककसाड के सयुंक्त तत्वावधान में बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया कार्यशाला की शुरुआत शिप्रा त्रिपाठी द्वारा बस्तर की भतरी बोली में प्रस्तुत मां दंतेश्वरी की वंदना से हुई। कार्यशाला का उद्देश क्षेत्रीय बोलियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए ठोस उपाय सुझाना था।

इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ी के साथ साथ हल्बी गोंडी,दोरली बोलियों के संरक्षण, संवर्धन हेतु इन बोलियों को राजभाषा का दर्जा देने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई । बैठक में बोलते हुए आयोजन के सूत्रधार डॉ राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी बोली अथवा भाषा की समाप्त होने के साथ ही उसे बोलने वाले समुदाय के द्वारा संचित हजारों हजारों साल का परंपरागत ज्ञान, लोक साहित्य, कला तथा संस्कृति विलुप्त हो जाती है, इसलिए बस्तर की हल्बी ,गोंडी, दोरली भतरी आदि बोलियों को बचाने तथा के लिए अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी छतीसगढी के साथ साथ हल्बी ,गोंडी ,दोरली,भतरी को भी राजभाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए।

बृजेश तिवारी ने क्षेत्रीय बोली व भाषा के महत्व को रेखांकित किया । वरिष्ठ साहित्यकार सुरेंद्र रावल ने हल्बी सहित क्षेत्रीय भाषाओं को राजभाषा बनाने का पुरजोर समर्थन किया। शोधार्थी अखिलेश त्रिपाठी ने बस्तर की क्षेत्रीय बोलियों पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया, उन्होंने बताया कि बस्तर की गदबी बोली , अभी हाल में ही विलुप्त हो गई है ।कुछ दिनों पूर्व इसे जानने वाला एक व्यक्ति बचा था वो भी अब नहीं रहे।गदबी बोली के समाप्त होने के साथ ही उस समुदाय के द्वारा अर्जित हजारों साल का ज्ञान भी समाप्त हो गया। परिषद के अध्यक्ष हरेंद्र यादव ने भी अपनी विचारों में इन बोलियों को राजभाषा बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों में अपनी सहभागिता दिखाई कार्यक्रम संचालिका वरिष्ठ कवित्री मधु तिवारी ने प्राथमिक शिक्षा में हल्बी गोंडी क्षेत्रीय भाषाओं मैं वह पर अपने विचार रखे हल्बीके सशक्त हस्ताक्षर महेश पांडे राष्ट्रपति पुरस्कृत शिल्पकार तथा बस्तर के शिल्पकार संगठन के प्रमुख तीजू राम विश्वकर्मा, आस्कर पुरस्कार हेतु नामित ‘ न्यूटन’ फेम वरिष्ठ रंगकर्मी खीरेन्द यादव युवा लेखक हर्ष लाहोटी, तथा पत्रकार परिषद के अध्यक्ष जमील खान ने अपने वक्तव्य में हल्बी गोंडी दोरली को राजभाषा बनाए जाने का समर्थन किया । कार्यक्रम के मध्य में हलबी भाषा शोध कार्य करने व बढ़ावा देने के लिए किरण नूरुटी का शाल -श्रीफल से सम्मान किया गया ।

इस अवसर पर जनजातीय सरोकारों की दिल्ली से प्रकाशित होने वाली राष्ट्रीय मासिक पत्रिका “ककसाड़” के नवीनतम जुलाई अंक का लोकार्पण भी उपस्थित अतिथियों के कर कमलों से के द्वारा किया गया।

परिषद के वरिष्ठ संरक्षक टीएस ठाकुर ने परिषद द्वारा क्षेत्रीय बोलियों अस्तित्व बचाने के लिए यह जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए शुभकामनाएं दी इस अवसर पर वरिष्ठ गजलकार मनोहर सिंह सग्गू, पंकज द्विवेदी, ऋषिराज,नीरज वर्मा संपदा समाजसेवी संस्थान की अध्यक्ष दसमती नेताम सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी गण उपस्थित थे।

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