Home / Headline / भारतीय क्रिकेट के स्टार हरफनमौला रहे युवराज ने की संन्यास की घोषणा

भारतीय क्रिकेट के स्टार हरफनमौला रहे युवराज ने की संन्यास की घोषणा

भारत के लिए लगभग 17 साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के बाद आज हरफनमौला खिलाड़ी युवराज सिंह (37) ने क्रिकेट के सभी फार्मेट से संन्यास की घोषणा कर दी। संन्यास की घोषणा के लिए हुई प्रेस कांफ्रेंस में युवराज ने भावुक होकर कहा कि मैंने कभी हार नहीं मानी। 2011 का वर्ल्ड कप जीतना मेरे लिए सपने सरीखा था। मैंने अपने पिता का सपना पूरा किया। युवराज सिंह ने कहा कि कहा कि क्रिकेट में 25 और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 17 साल के उतार-चढ़ाव के बाद मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इस खेल ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है कि कैसे लड़ना है और गिरने के बाद फिर से कैसे उठना है और आगे बढ़ना है।

युवराज सिंह ने 20-20 विश्व कप 2007 में इंग्लैंड के खिलाफ स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर की 6 गेंदों में 6 छक्के मार कर विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसके साथ ही 20-20 में 12 गेंदों में अर्धशतक बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी उनके नाम है। युवराज सिंह के लिए सबसे बड़ी चीज 2011 का वर्ल्ड कप था, जिसमें उन्होंने चार अर्धशतक और एक शतक लगाया था। इस दौरान उन्होंने 15 विकेट भी झटके थे। उनके इस प्रदर्शन की बदौलत वे मैन ऑफ द टूर्नामेंट बने थे। टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर रहे युवराज सिंह 2 बार की वर्ल्ड चैंपियन (2007 वर्ल्ड टी20 और 2011 वनडे वर्ल्ड कप) टीम के सदस्य रहे।

युवराज ने 304 वनडे की 278 पारियों में  8701 रन बनाए थे। इसमें उनके 14 शतक और 52 अर्द्धशतक शामिल हैं। एकदिवसीय मैचों में उनका श्रेष्ठ स्कोर150 रन है। युवाराज ने 2003 से 2012 के बीच 40 टेस्ट मैच की 52 पारियों में 1900 रन बनाये। इसमें एक शतक और 11 अर्द्धशतक शामिल हैं। टेस्ट मैच में उनका श्रेष्ठ स्कोर 169 रहा। उन्होंने 58 टी20 मुकाबले भी खेले थे जिसमें उन्होंने 1177 रन जमाए।

युवराज सिंह ने खुलासा कि बीसीसीआई ने ‘यो-यो’ टेस्ट में विफल होने पर उन्हें विदाई मैच का वादा किया था। हालांकि वो ‘यो-यो’ टेस्ट में सफल रहे और उन्हें विदाई मैच खेलने का मौका कभी नहीं मिला। इस बाबत उन्होंने कहा कि मुझे बोला गया था कि अगर आपसे ‘यो-यो’ टेस्ट पास नहीं होता तो आप विदाई मैच खेल सकते हैं। लेकिन मैं ऐसा मैच खेलना नहीं चाहता था। अगर मैं अच्छा था, मेरे अंदर क्षमता थी तो मैं मैदान से संन्यास लेता। इसलिए मैंने बीसीसीआई से कह दिया था कि मुझे विदाई मैच नहीं चाहिए, यो-यो टेस्ट पास नहीं होगा तो मैं चुपचाप घर चला जाऊंगा। यो यो टेस्ट मैंने पास किया और इसके बाद चीजें मेरे हाथ में नहीं थी।

क्या है यो-यो टेस्ट

‘यो-यो’ टेस्ट खिलाड़ी की फिटनेस और मजबूती का आकलन होता है। इसमें 20 मीटर की दूरी पर दो कोन रखे जाते हैं और बीप की आवाज के साथ खिलाड़ी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचना होता है।भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए अब इस टेस्ट को पास करना जरूरी है।

12 दिसंबर 1981 को चंडीगढ़ में भूतपूर्व क्रिकेट खिलाड़ी योगराज सिंह के यहाँ सिख पंजाबी परिवार में जन्मे युवराज सिंह ने कैंसर से जंग जीतने के बाद क्रिकेट के मैदान पर वापसी की थी, लेकिन कुछ खास प्रदर्शन नहीं करने की वजह से वो टीम से बाहर चल रहे थे। युवराज ने भारत की ओर से पिछला मैच  जून 2017 में खेला था। वे इंडियन प्रीमियर लीग में किंग्स इलेवन पंजाब, पुणे वॉरियर्स इंडिया, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर, दिल्ली डेयरडेविल्स, और सनराइजर्स हैदराबाद से खेल चुके हैं।

Check Also

पीएम बोले, सबके लिए घर का सपना पूरा करने में कसर नहीं छोड़ेगी सरकार

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि सभी के लिए घर का सपना साकार करने ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *