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अकादमिक पढ़ाई के साथ लोगों को पढ़ना भी बेहद जरूरी

अश्वनी राय

भूमिहार समाज युवा मंच ने आयोजित किया ‘युवा चेतना संगम’

मुंबई। भूमिहार समाज युवा मंच मुंबई की ओर से 09 अगस्त,2019 को मालाड पूर्व स्थित शारदा ज्ञानपीठ इंटरनेशनल स्कूल में युवा चेतना संगम का आयोजन किया गया। दीप प्रज्वलन भूमिहार समाज मुंबई के अध्यक्ष एड. आर.पी. सिंह, राम बचन राय, संयुक्त आयकर आयुक्त सौरभ कुमार राय, सेंट एंजेलो वीएनसीटी वेंचर्स के अध्यक्ष एग्नेलो राजेश अठैडे और पेस आईआईटी-मेडिकल के एमडी प्रवीण त्यागी ने किया।

सफल लोगों के संषर्षमय जीवन की प्रेरक घटनाओं से युवाओं को रू-ब-रू कराने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मंजू सिंह द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। प्रमुख वक्ता एग्नेलो राजेश अठैडे ने अपने अभावग्रस्त बचपन का हृदयविदारक चित्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि मेरी मां की केवल एक सीख ‘परिस्थिति को कंट्रोल करों या उसका शिकार हो जाओ’, ने मेरे भविष्य का मार्ग स्पष्ट कर दिया। प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़कर मैं इतना मजबूत हो गया हूं कि अब दुनिया के किसी भी कोने में, किसी भी तरह के लोगों में रहकर काम करने की हिम्मत आ गयी है। मैं आज भी अपनी असलियत नहीं भूलता। डोर टु डोर सेल करने का अनुभव ही मेरा असली एमबीए है। उन्होंने कहा कि अकादमिक पढ़ाई के साथ लोगों को पढ़ना भी बहुत जरूरी है। हम बहुतों को देख-सुन कर भी काफी कुछ सीख सकते हैं।

दूसरे वक्ता प्रवीण त्यागी ने अपने जीवन के कुछ दिलचस्प किस्से सुनाते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के मुकाम के निर्धारण में उसके परिवार की सोच की अहम भूमिका होती है। अभिभावक अपने बच्चों से पॉजिटीव बातें करें, ना जाने कौन सी बात आपके बच्चे के लिए वन लाइनर बन जाएगी, जिससे उसकी पूरी जिंदगी की दिशा तय हो जाएगी। दौलत और शोहरत के बजाय इंसानियत को सफलता का पैमाना बताते हुए उन्होंने कहा कि शिद्दत और मेहनत में कमी न हो तो कामयाबी का मिलना निश्चित है। संघर्षशील लोगों के जीवन से अपने को सदैव प्रेरित किया जा सकता है।

समारोह के अंतिम वक्ता सौरभ कुमार राय ने गीता के श्लोक से भूमिका बनाते हुए भोजपुरी भाषा और लहजा का ऐसा फुहार छोड़ा कि अब तक के गहन विचारों में डूबे समारोह पर हास्य का रंग चढ़ गया। उन्होंने बेहद चुटीले अंदाज में एक ग्रामीण परिवेश के पारंपरिक किसान परिवार से मिले संस्कारों, आरएसएस का प्रोडक्ट बनने से लेकर एक उम्र की रुमानियत की कसक को बयां कर माहौल को हल्का कर दिया। सिविल सेवा की तैयारी करने वालों को सुझाव देते उन्होंने कहा कि पहले जीविका के लिए कोई प्रोफेशनल शिक्षा ले लें और हो सके तो कुछ दिन नौकरी भी कर लें। लर्निंग दौर आगे का रास्ता आसान बना देता है। दाल- रोटी का जुगाड़ पहले कर लेना श्रेयस्कर है। समाचार पत्र-पत्रिकाओं के लगातार अध्ययन की प्रवृति को अपनी सफलता का मजबूत पक्ष बताते हुए उन्होंने पुस्तकों को प्रेरणा का स्रोत बताया। समाज को एक बड़ा परिवार बताते हुए राय ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं भूमिहार परिवार का अंश हूं। भूमिहार समाज के आराध्य पर प्रकाश डालते कहा कि पिता की आज्ञा पर अपनी ही मां का गला काट देना और फिर उसे जिंदा करा देने के जज्बे का नाम है परशुराम। अपने गरिमापूर्ण पेशे और हरफनमौला प्रवृति संबंधी एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एक ही तो जिंदगी है, उसको एक ही रस से भरने के बजाय सभी रसों से सराबोर करना समझदारी का काम है।

महाराष्ट्र सरकार में महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती विद्या ठाकुुर के पुत्र एवं गोरेगांव के नगरसेवक दीपक ठाकुर के संचालन में हुए इस कार्यक्रम को सफल बनाने में भूमिहार समाज मुंबई की महिला अध्यक्षा सुधा शर्मा, धनंजय सिंह, विशाल सिंह, अभिषेक राय, डॉ. शिल्पा सिंह, डॉ. बृजेश सिंह, मनोज सिंह, शैलेष शर्मा, अनिल राय और सिद्धार्थ सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तीनों वक्ताओं का स्वागत शॉल और उनके प्रोट्रेट से योगिता राय – राजेश राय, नीतू सिंह- सूरज सिंह और भव्या राय – सिद्दार्थ राय ने किया। इस अवसर पर प्रतिभाशीला बच्चों को प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम में काफी संख्या समाज के स्त्री-पुरुषों की उपस्थिति रही।

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