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शब्द और अध्यात्म की ताकत

इस धरती पर पलने वाले लगभग सभी जीव आवाज निकालते हैं। कोई गुर्राता है, कोई दहाड़ता है, कोई मिमियाता है, कोई फुफकारता है। लेकिन सिर्फ़ इंसान ही ऐसा जीव है जो लय ताल में शब्दों का उच्चारण करता है। उसे हम बोली या ज़बान कहते हैं। किसी और जानवर में ये हुनर नहीं कि वो जो आवाज़ निकालता है उसे एक लड़ी में पिरोकर भाषा का रूप दे दे। ईश्वर ने शब्दों को लय-ताल में पिरोकर अभिव्यक्त करने की मेहरबानी केवल इंसानों पर की है।

शब्दों में बड़ी ताकत होती है। शब्द ज्ञानवर्द्धन के साधन तो हैं ही, इसके अलावा ये एक तरफ गैरों को भी अपना बनाने का हुनर सिखाते हैं, तो दूसरी तरफ अपनों के बीच भी महाभारत के कारण भी बन जाते हैं। शब्द समाज की धरोहर हैं, इसका उपयोग कर यश-अपयश कमाना लोगों पर निर्भर है। कुछ शब्द तो अपने में इतनी सार्थकता लिए होते हैं कि उनके कुछ अक्षर हटाने जाने पर भी वे किसी ना किसी आदर्श की संज्ञा होते हैं। जैसे संगीत शब्द को ही लें, तो इसमें से यदि पहला अक्षर हटाते हैं, गीत शब्द बनता है। दूसरा हटाते हैं तो संत शब्द बनता है और यदि तीसरे का लोप करते हैं ती संगी शब्द बनता है।

अध्यात्म के क्षेत्र में पूरी दुनिया में हमारा कोई सानी नहीं है। पाश्चात्य देश भौतिकता में भले ही सुख-सुविधाओं से संपन्न हों, लेकिन जब बात आध्यात्मिकता की आती है, तो वे भारतीयता के आध्यत्मिक सूर्य के सामने एक टिमटिमाते छोटे से दीपक की तरह नजर आते हैं। अपनी अध्यात्म विद्या पर हम नाज कर सकते हैं, कि जीवन का ऐसा मंत्र पूरे विश्व में किसी के पास नहीं है। हमें यह विरासत हमारे कई ऋषि-मुनियों की गहन चिंतन परंपरा से सत् की कसौटी पर निखर कर हमें मिली है। लेकिन अफसोस कि पाश्चात्यकरण के इस अंधी दौड़ में कुछ लोग अपनी इस अमूल्य शास्त्र विद्या को अंधविश्वास का नाम दे देते हैं।

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी अध्यात्म विद्या हमारे जीवन का स्तर ऊंचा उठाने वाले हैं। इसे यदि हम अपने जीवन में उतारेंगे, तो नित नई ऊंचाइयों को छूते जाएंगे। हमें अपने समाज और अध्यात्म की अहमियत समझनी होगी। क्योंकि बिना महत्व समझे सोना भी पीतल लग सकता है। हमारे अज्ञान को दूर करने के लिए अच्चे पथ-प्रदर्शक की आवश्यकता होती है। ये पथ-प्रदर्शक कई विकल्पों में हमारे पास धरोहर के रूप में मौजूद हैं। आप चाहे अध्यात्म विद्या को आत्मसात करें या ऋषि-मुनि परंपरा के आचार्यों का अनुसरण, चुनना आपको है ।

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