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छत्तीसगढ़ की साहित्यिक संस्थाओं ने किया डॉ. राजाराम त्रिपाठी का सम्मान

‘कलम वीर सम्मान-2019 ‘ तथा ‘वागेश्वरी सम्मान-2019’:एक ही दिन में मिले दो दो प्रतिष्ठित सम्मान,

देश के जंगलों की कई दुर्लभ वनौषधियों का अंधाधुंध वैज्ञानिक तरीके से दोहन करने तथा अवैध तस्करी के कारण देश की कई बहुमूल्य दुर्लभ वनस्पतियां हुई विलुप्त : डॉ राजाराम

सोमलता, संजीवनी, तेलिया कंद, अष्टवर्ग,हिरनतूतियां , मंजूर गोड़ी,भ्रमरमारी आदि वनौषधियां हुई विलुप्त, अब मिलेंगी केवल ग्रंथों में,

प्रदेश की सबसे पुरानी साहित्यिक संस्थाओं में से एक छत्तीसगढ़ साहित्य मंडल ,जो कि प्रदेश की साहित्यिक सेवा के ९० नब्बे वर्ष पूर्ण कर रही है, के तत्वावधान में बीते शनिवार की शाम को प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल जैतूसाव मठ में “हर्बल औषधियां मानव के लिए वरदान हैं” विषय पर कार्यशाला तथा छंद विषय पर कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि तथा विषय पर बीज वक्तव्य देने हेतु कोंडागांव के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हर्बल कृषि विशेषज्ञ तथा पर्यावरणविद डॉ राजाराम त्रिपाठी को आमंत्रित किया गया था। डॉ त्रिपाठी दे अपने बीज वक्तव्य में विस्तार से बताया कि वर्तमान में पूरे विश्व में हर्बल उत्पादों का प्रयोग बड़ी तेजी से बड़ा है मैं केवल बीमारियों के इलाज करने में बल्कि सौंदर्य प्रसाधनों में भी जड़ी बूटियों का शतप्रतिशत उपयोग करने की दिशा में विश्व बाजार अग्रसर है। बड़े दुर्भाग्य की बात है की हमारे देश के जंगलों की कई दुर्लभ वनौषधियों का अंधाधुंध वैज्ञानिक तरीके से दोहन करने तथा अवैध तस्करी के कारण देश की कई बहुमूल्य दुर्लभ वनस्पतियां लगभग विलुप्त हो गई है। सोमलता, संजीवनी, तेलिया कंद, अष्टवर्ग,हिरनतूतियां , मंजूर गोड़ी,भ्रमरमारी आदि वनौषधियां अब केवल ग्रंथों में ही रह गई हैं।विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लोलुप नजरें हमारी इस अनमोल प्राकृतिक संपदा पर लगी हुई है, इनसे इन वन औषधियों को बचाना हमारे आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है।

ध्यान रहे कि, एक भी वनऔषधि की प्रजाति अगर इससे ग्रह से विलुप्त हो जाती है तो विश्व के सारे वैज्ञानिक मिल कर भी उसे फिर से नहीं बना सकते इसलिए वनऔषधियों का विलुप्त होना मानवता की अपूर्ण क्षति है जिसे शीघ्र से हम सबको मिलकर विश्व हित में रोकना ही होगा। कार्यक्रम के संयोजक आचार्य इंजीनियर अमन या त्यागी ने रक्त चाप तथा पीलिया की “सिंगलडोज -औषधि” जिसमें की एक बार दवा लेने पर पूरे जीवन में दवा लेने की आवश्यकता नहीं होती के बारे में विस्तार से बताया। डॉ त्रिपाठी ने उपस्थित सभी माननीय साहित्यकारों तथा पत्रकारों अपने कोंडागांव स्थित जैविक खेती के लिए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म पर निमंत्रित करते हुए कहा कि आप सब सादर आमंत्रित हैं आप पधारे और आकर देखें कि किस तरह कैंसर, लकवा, रक्तचाप, ह्रदय रोग, एचआईवी, डायबिटीज आदि असाध्य बीमारियों के देश विदेश से प्रतिदिन कोंडागांव पधार रहे हैं तथा मां दंतेश्वरी हर्बल की शुद्ध जड़ी बूटियों के जरिए बेहद सीमित खर्च में आरोग्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं ।डॉ त्रिपाठी ने इसका पूरा श्रेय बस्तर की माटी , जलवायु में उत्पन्न विशुद्ध जड़ी बूटियों को तथा इन जड़ी-बूटियों को सदियों तक संरक्षित करने वाले बस्तर के जनजातीय समुदाय को दिया।

इस कार्यक्रम में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आचार्य इंजीनियर अमरनाथ त्यागी जी के द्वारा डॉ राजाराम त्रिपाठी को जनजातीय सरोकारों की दिल्ली से प्रकाशित मासिक पत्रिका पत्रिका ‘ककसाड़’ के संपादन तथा उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित ‘वागेश्वरी सम्मान’ तथा शाल श्रीफल ,सम्मान पत्र से सम्मानित किया गया, इसी तारतम्य में प्रदेश की कई दशकों से कार्य रत अग्रणी साहित्यिक तथा समाजसेवी संस्था वक्ता मंच की अध्यक्ष श्री राजेश पराते तथा महासचिव श्री शुभम साहू के द्वारा डॉ राजाराम त्रिपाठी को उनके काव्य संग्रह “मैं बस्तर बोल रहा हूं ” के लिए प्रतिष्ठित ‘कलम वीर अवॉर्ड-2019’ से सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में अंबर अंबरीश जी, लतिका भावे जी,एबी दुबे दीप, संजीव ठाकुर जी ,जगदलवी उपस्थित थे । कार्यक्रम के द्वितीय चरण में कोलकाता से प्रकाशित होने वाली देश की सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली समसामयिक मुद्दों की लोकप्रिय पाक्षिक पत्रिका ‘गंभीर समाचार’ तथा जनजातीय सरोकारों की मासिक पत्रिका के नवीनतम अंक का लोकार्पण उपस्थित अतिथियों के कर कमलों से किया गया, तत्पश्चात, सहित प्रदेश के जाने-माने रचनाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया जिसमें आचार्य अमरनाथ त्यागी, वरिष्ठ गजलकार संजीव ठाकुर, लतिका भावे, कुमार ,आशा मानव, शिवा बाजपेई, जगदलवी, शिवानी मैत्रा, डी.के.बाजपेयी, सुनील पांडेय, कवि मोहम्मद हुसैन ‘मजाहीर’शोभा देवी शर्मा, विकास कश्यप आदि की रचनाओं को बेहद सराहा गया कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि सुनील पांडे के द्वारा किया गया। यह जानकारी अपूर्वा त्रिपाठी ने दी।

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