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विश्व होम्योपैथी दिवसः होम्योपैथी उत्पादों की सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और निरंतरता पर जोर

आयुष मंत्रालय के सचिव डॉ. वैद्य राजेश कोटेचा ने आज विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। होम्योपैथी के संस्थापक डॉ. क्रिश्चि‍यन फ्रेडरिक सेमुएल हनीमैन के जन्मदिन के अवसर पर विश्व होम्योपैथी दिवस आयोजित किया जाता है। इस अवसर पर केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के चेयरमैन श्री नीलांजल सान्याल और श्री त्रिदंडी चिन्‍ना रामानुज जीयार स्‍वामी जी उपस्थित थे। होम्‍योपैथी संकाय, ब्रिटेन के अध्‍यक्ष डॉ. गैरी स्मिथ और एलएमएचआई (अंतर्राष्‍ट्रीय) के अध्‍यक्ष डॉ. आलोक पारीक ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

डॉ. कोटेचा ने कहा कि विज्ञान और परंपरा के अंतर को शोध के माध्यम से कम करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय शोध व होम्योपैथी उत्पादों के निर्माण तथा होम्योपैथी कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने होम्योपैथी के विकास के लिए मंत्रालय द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी की विश्वसनीयता के लिए होम्योपैथी उत्पादों की सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और निरंतरता आवश्यक है। अपने स्वागत भाषण में सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. राज.के.मनचंदा ने कहा कि शिक्षा को शोध तथा व्यवहार के साथ जोड़ने की आवश्यकता है।

आयुष मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री रोशन जग्गी ने कहा कि वैज्ञानिकों और शिक्षकों के बीच समन्वय को विकसित करने के लिए शैक्षिक और अनुसंधान में परस्पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने जून 2014 में स्नातक छात्रों के लिए अल्प अवधि होम्योपैथी योजना (एसटीएसएच) लागू करने के लिए परिषद की सराहना की। उन्होंने कहा कि एमडी की पढाई कर रहे छात्रों के लिए सीसीआरएच छात्रवृत्ति योजना छात्रों में शोध को बढ़ावा देगी और क्षमता निर्माण करेगी। इस अवसर पर आयुष निदेशालय, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा डेंगू, चिकनगुनिया, क्षयरोग और अन्य संक्रामक रोगों पर शोध तथा क्लीनिक शोध के लिए जेएसपीएस गर्वमेंट होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज, रामनाथपुर, हैदराबाद के साथ सहमति पत्रों का आदान-प्रदान हुआ। इस अवसर पर ‘सोवेनिर ऑफ कन्वेंशन’, होम्योपैथी – ए साइंस ऑफ जेंटल हिलिंग, एक कॉफी टेबल बुक और स्टेंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस भी जारी किए गए। एक डिजिटल कोष – सीसीआरएच आरकाइव्स ऑन होम्योपैथी – भी लांच किया गया।

डॉ. कोटेचा ने होम्योपैथी शोध के क्षेत्र में योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान किए। डॉ. रमनलाल पी.पटेल को लाईफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार (चिकित्सा) प्रदान किया गया। होम्योपैथी के क्षेत्र में डॉ. पटेल को 50 वर्षों का अनुभव है और उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। डॉ. रवि एम.नायर को लाईफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार (शिक्षण) से सम्मानित किया गया। प्रोफेसर (डॉ.) कन्जक्शा घोष को लाईफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार (शोध) प्रदान किया गया। डॉ. तापस कुंडु को सर्वेश्रेष्ठ शोध प्रबंध पुरस्कार दिया गया। सुश्री मुनमुन सिन्हा को जापानी बुखार पर किए गए कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ शोध प्रबंध (दवा शोध) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. पोन्नम हिमा बिन्दु और डॉ. मुनमुन कोले को संयुक्त रूप से युवा वैज्ञानिक पुरस्कार (क्लीनिक शोध, होम्योपैथी) प्रदान किया गया।, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के प्रो. डॉ. शैलेन्द्र के.सक्सेना को युवा वैज्ञानिक पुरस्कार (होम्योपैथी में औषधि शोध) प्रदान किया गया। डॉ. दिव्या तनेजा को होम्योपैथी में भाषायी शोध के लिए युवा वैज्ञानिक पुरस्कार दिया गया। सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार डॉ. अभिन चंद्र होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, भुवनेश्वर, ओडिशा के पूर्व प्रो. लक्ष्मीकांत नंदा को प्रदान किया गया।

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