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अधूरी नींद की बजह से 81% मुंबईकर अनिद्रा (इनसोम्निया) के शिकार: सर्वे

 कार्यस्थल पर नींद की मात्रा में दिखी वृद्धि 

मुंबई: मुंबईकर नींद को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहे हैं जिसकी वजह से अनिद्रा (इनसोम्निया), असंतुलित नींद जैसी समस्याओं ने उन्हें घेर रखा हैं। भारत के अग्रणी मैट्रेस और नींद संबंधित उत्पाद इनोवेटर, वेकफिट.को द्वारा देश की नींद संबंधित जानकारी मिलाने के लिए किए गए ग्रेट इंडियन स्लीप स्कोरकार्ड 2019 सर्वे में कुछ चौंकानेवाले तथ्य सामने आए हैं। कम सोने की वजह से 81% मुंबईकरों को अनिद्रा (इनसोम्निया) है, जबकि 78% मुंबईकर अपनी नींद पूरी करने के लिए हफ्ते में 1-3 बार अपने कार्यस्थल पर ही सो जाते हैं।

वेकफिट.को के सर्वे ने बताया कि 36% लोग 7 घंटे से भी कम सोते हैं और 90% लोग रात को 1-2 बार नींद से उठ जाते हैं। जबकि यह अनुशंसा की जाती है कि हमारे शरीर की आंतरिक घड़ी के लय के संदर्भ में आरामदायक नींद पाने के लिए लगभग रात 10-10.30 बजे सोना चाहिए।

स्मार्टफोन्स से लेकर टीवी तक, विभिन्न प्रकार के प्लेटफार्म्स नियमित तौर पर असंख्य मनोरंजन स्ट्रीम कर रहे हैं, जो मुख्य रूप से आंखों से नींद को दूर रखने के लिए जिम्मेदार हैं। 90% लोग सोने से पहले अपने फोन का इस्तेमाल करते हैं। 26% मुंबईकर रात को जागे रहते हैं क्योंकि वे लैपटॉप्स या स्मार्टफोन पर शो देखते हैं, 23% लोगों ने बताया के वह काम या वित्त से जुड़ी परेशानियों को लेकर चिंतित रहते हैं जिससे उन्हें जल्दी नींद नहीं आती।

वेकफिट.को के सह-संस्थापक और सीईओ अंकित गर्ग ने इस सर्वे पर टिप्पणी करते हुए कहा, “नींद की कमी से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं जो उच्च रक्तचाप से लेकर बेचैनी तक बढ़ा सकती है। सर्वेक्षण से हमें पता चलता है कि कैसे देशभर में भारतीय इन समस्याओं की उपेक्षा करते हैं। इससे अधिक चिंताजनक है कि उनमें से अधिकांश नींद की बीमारी को वास्तविक समस्या ही नहीं मानते। जब हम भारतीयों के समग्र नींद स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं, तो बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। ”

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