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भक्ति भावना से पुण्य प्राप्ति का पर्व महाशिवरात्रि आज, जलाभिषेक करने मंदिरों मेें उमड़ी भीड़

आज महाशिवरात्रि है। इस अवसर पर विभिन्‍न मंदिरों में पूजा-अर्चना और भगवान शिव के जलाभिषेक का विशेष आयोजन किया गया है। काशी हो या हरिद्वार या फिर उज्जैन के महाकाल,देश के 12 ज्‍योतिर्लिंगों में महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है और लोग दुग्ध एवं जलाभिषेक के लिए कतारों में लगें हैं। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु विभिन्‍न तीर्थस्‍थलों पर स्‍नान कर विशेष पूजा अर्चनाकर रहे हैं। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की लंबी लाइनें लगी हुईं है। शिवभक्त भक्तिमय होकर भगवान शंकर की पूजा कर रहे हैं और शिवलिंग का श्रृंगार कर जलाभिषेक कर रहे हैं। हर-हर महादेव के नारे से हर जगह के मंदिर परिसर गुंजायमान हैं। खास बात तो यह है कि भगवान शिव काे दुग्ध और जलाभिषेक करने के लिए स्त्री-पुरुषों सहित छोटे-छोटे बच्चों को भी लम्बी-लम्बी कतारों में श्रद्धा के साथ आगे बढ़ते हुए देखा जा रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिवरात्रि सोमवार को है इसलिए यह काफी ज्‍यादा खास है। यही नहीं इस बार संयोग भी काफी अच्‍छा बन रहा है इसलिए कहा जा रहा है कि इस दिन पूरी भक्‍ति भावना के साथ जो कोई भी व्रत रखेगा वह कई गुना ज्‍यादा पुण्‍य प्राप्‍त करेगा। कहते हैं कि महाशिवरात्रि में किसी भी प्रहर अगर भोले बाबा की आराधना की जाए, तो मां पार्वती और भोले त्रिपुरारी दिल खोलकर कर भक्तों की कामनाएं पूरी करते हैं।

कहते हैं कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं, इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया। विश्वास किया जाता है कि तीनों लोकों की अपार सुंदरी तथा शीलवती गौरी को अर्धांगिनी बनाने वाले शिव प्रेतों और पिशाचों से घिरे रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि शिव अमंगल रूप होने पर भी भक्तों का मंगल करते हैं और श्री-संपत्ति प्रदान करते हैं। यह दिन जीव मात्र के लिए महान उपलब्धि प्राप्त करने का दिन भी है। भगवान भोले शंकर की महिमा गाते गोस्वामी तुलसीदास जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के मुख से कहलवाया है, ‘शिवद्रोही मम दास कहावा. सो नर सपनेहु मोहि नहिं भावा.’ यानी जो शिव का द्रोह करके मुझे प्राप्त करना चाहता है, वह सपने में भी मुझे प्राप्त नहीं कर सकता। शिव की महत्ता को ‘शिवसागर’ में और ज्यादा विस्तृत रूप में देखा जा सकता है। शिवसागर में बताया गया है कि विविध शक्तियां, विष्णु व ब्रह्मा, जिसके कारण देवी और देवता के रूप में विराजमान हैं, जिसके कारण जगत का अस्तित्व है, जो यंत्र हैं, मंत्र हैं, ऐसे तंत्र के रूप में विराजमान भगवान शिव को नमस्कार है।

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