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किसानों की कब्रगाह ‘यवतमाल’ के किसानों के बहुरेंगे दिन

 अखिल भारतीय किसान महासंघ आईफा लेगा यवतमाल जिले को गोद

 उच्च मूल्य वाली फसलों और प्रसंस्करण इकाइयों के मदद से किसानों को दी जाएगी आर्थिक मजबूती

भारतीय कृषि एवं खाद्य परिषद सहित अन्य सरकारी तथा गैर-सरकारी विशेषज्ञ एजेंसियों से भी ली जाएगी राय तथा मदद

 नई दिल्ली। अखिल भारतीय किसान महासंघ ‘आईफा’ www.farmersfederation.com महाराष्ट्र के यवतमाल जिले को गोद लेने जा रहा है. रविवार को यवतमाल जिला के सेंट्रल हाल में सभागार में किसानों की हुई एक सभा में इस यह प्रस्ताव यवतमाल जिले के प्रगतिशील किसानों से अखिल भारतीय किसान महासंघ के सामने रखा और इसके संबंध में महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि इस प्रस्ताव को महासंघ की दिल्ली में होने वाली बैठक में विधिवत मंजूरी दी जाएगी.

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के विदर्भ का यह क्षेत्र देश में सर्वाधिक किसानों की आत्महत्या वाले क्षेत्र के रूप में यह चर्चा में रहा है. बीते तीन सालों में यहां तकरीबन 10 हजार से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है. हालांकि किसानों को कर्ज के मकड़जाल से निकालने तथा उन्हें अन्य प्रकार से सहायता देने के लिए राज्य व केंद्र सरकारों की ओर से कई योजनाएं घोषित की गई, लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति यह है कि किसानों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है. हाल में ही बीते एक अगस्त को महाराष्ट्र सरकार ने यवतमाल और उस्मानपुर जिले के किसानों के आत्महत्या रोकने के लिए विभिन्न प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं के लिए 15 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं, लेकिन हालात यह है कि इस योजना का जमीन पर कोई निशान नहीं दिख रहा.

डॉ. त्रिपाठी ने बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अखिल भारतीय किसान महासंघ देश भर के किसान संगठनों के महासंघ के रूप में प्रतिनिधित्व करता है ऐसे में जब यहां सरकारी मिशनरियां विफल साबित हुई हैं तो अब किसानों को ही अपने भाइयों की स्थिति में सुधार लाने और उन्हें दुर्दशा से उबारने के लिए पहल करनी होगी. सरकारी प्रयास अब तक थोथे साबित हुए हैं. डॉ त्रिपाठी ने कहा कि महासंघ यवतमाल में उच्च मूल्य वाली फसले, जड़ी-बुटियों , मसालों , सुगन्धीय फसलों, इमारती लकड़ी के प्लांटेशन, मीठी तुलसी, स्टीविया जैसे नई सदी की फसलों की जैविक तरीके से खेती करने के लिए किसानों को प्रशिक्षित करेगी, तथा उन्हें इसके लिए आवश्यक तकनीक सुविधाएं और खेती में आने वाली लागत का वैकल्पिक उपाय करेगी.

इसके अलावा सहकारी पद्धति या फिर अन्य कंपनियों के साथ सहयोग लेकर यवतमाल जिले के प्रखंड और तालुका स्तर पर खाद्य प्रस्सकरण इकाइयां लगा कर कृषि आधारित उद्योग स्थापित किये जाएंगे. जिससे इस क्षेत्र की नई पीढ़ी को कृषि व कृषि से संबद्ध क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सके. किसानों को उनकी फसलों का सही मूल्य सही वक्त पर दिलाना इन सारे मुद्दों पर एक ठोस व्यावहारिक कार्य योजना अमल में लाने जाने की शुरुआत यवतमाल से की जाएगी.

 

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One comment

  1. sayyad hussain syd karim

    Bahot khub

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