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स्वाद से ज्यादा स्वास्थ्य को मूल्य दें – राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ

शाश्वत वाणी.कॉम

मुंबई। राष्ट्र-संत महान चिंतक श्री चन्द्रप्रभ ने कहा कि यदि हमारी सेहत अच्छी है तो समझो स्वर्ग का पहला सुख हमारी झोली में है। अच्छी सेहत के लिए अपनी जीवन-शैली और खान-पान को सुधारें। सूरज उगे, उससे पहले उठ जाइये और हर दिन उगते सूरज का अभिवादन कीजिए। सुबह आँख खुलते ही एक मिनट तक प्यार से मुस्कुराइये। यह सुबह का विटामिन आपको दिनभर मुस्कान से भरे रखेगा। दुनिया में भले ही सात सुख कहलाते होंगे पर पहला सुख तो निरोगी काया ही है।

संत चन्द्रप्रभ मंगलवार को कोरा केन्द्र मैदान में कैसा करें आहार कि स्वस्थ रहे परिवार विषय पर जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सुबह उठते ही खाना-पीना शुरू मत कीजिए। पहले शौच-क्रिया से निवृत्त हो लीजिए और स्नान-ध्यान के बाद ही सुबह का दूध-नाश्ता लीजिए। सुबह खाली पेट टहलने अथवा स्वास्थ्यवर्धक योगासन करने की नियमित आदत डालिए। इससे तन-मन की जड़ता दूर होगी और जीवन में स्फूर्ति तथा संजीवनी का संचार होगा।

राष्ट्र-संत ने सत्संगप्रेमियों को प्रेरणा देते हुए कहा कि हमारा दिल हमारे लिए 24 घंटे अनवरत चलता रहता है। यदि हम रोजाना सुबह 1 घंटा चल लें, तो इसे लम्बे समय तक चलने में कोई रुकावट नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि भोजन हमेशा धैर्यपूर्वक कीजिए और भोजन के उपरांत एक गिलास छाछ भी पीजिए। तली हुई चीजों और बाजारू मिठाइयों से परहेज रखिए। भोजन में रेशेदार सब्जियाँ, दालें, अनाज, सलाद और फल को शामिल कीजिए और इस तरह हार्ट, बी.पी. और डायबीटिज जैसी बीमारियों को दूर भगाइए। उन्होंने कहा कि सुबह नाश्ते में अथवा दोपहर में एक बार फल अवश्य खाइए। कहावत है: रोजाना सुबह एक सेव खाने वाला अपना चिकित्सक आप होता है।

संतप्रवर ने कहा कि पानी पीने में कंजूसी मत कीजिए। पानी हमें घातक बीमारियों से बचाता है और पाचन-क्रिया तथा रक्त-संचार-व्यवस्था को दुरुस्त रखता है। एक दिन में कम-से-कम सात-आठ गिलास पानी तो पी ही लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नींद शरीर की बैटरी को चार्ज करती है। नींद पूरी ली जा सके, इसके लिए देर रात तक पढने, टी.वी. देखने अथवा जागने की आदत से छुटकारा पाइए। राष्ट्र-संत श्री चन्द्रप्रभ ने कहा कि हमें नाखून बड़े नहीं रखना चाहिए। हाथ धो-पौंछकर ही भोजन लीजिए। इससे आप रोगों और जीवाणुओं के संक्रमण से
बच जाएँगे। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन आधा-एक-घंटा अच्छी पुस्तकों को पढने की आदत डालिए। पठन-पाठन की प्रवृत्ति बुढ़ापे में भी आपके दिमाग को तरोताजा बनाए रखेगी।

संतप्रवर ने कहा कि रोजाना एक मिनट ताली बजाइए, जोर के दस ठहाके लगाइए, पाँच मिनट जॉगिंग कीजिए, दस मिनट प्राणायाम कीजिए और बीस मिनट ध्यान कीजिए। आप तन-मन और प्राण तीनों ही दृष्टि से स्वस्थ, तनावमुक्त और सकारात्मक ऊर्जा से भरे रहेंगे। राष्ट्र-संत ने कहा कि सेहत का इतना-सा ही राज है – अन्न को कीजिए आधा, सब्जी को कीजिए दुगुना, पानी पीजिए तीगुना और हँसी को कीजिए चैगुना।
बीमारियों को कम करना है तो भोजन की थाली को कम कीजिए। अधिक भोजन करने वाले जल्दी मरते हैं, संतुलित भोजन लेने वाले अधिक जीते हैं। संतप्रवर ने कहा कि भगवान श्री महावीर के द्वारा दिये गए सिद्धांत हमारे स्वास्थ्य लाभ के लिए है। अगर वे हमें रात्रि भोजन त्याग करने का संदेश  देते हैं तो उसमें भी हमारे स्वास्थ्य लाभ का राज छिपा है। जो व्यक्ति रात्रि भोजन नहीं करता वह 100 बीमारीयों से बचा रहता है । उन्होंने कहा कि हमें स्वादु भोजन की बजाय साधु भोजन का उपयोग करना चाहिए। भोजन ऐसा हो जो स्वादकारी नहीं, अपितु स्वास्थ्यकारी हो। हम जितनासात्विक भोजन करेंगे उतने ही स्वस्थ्य रहेंगे। हम ऐसा भोजन न करें, जोहमारा तो पोषण करे पर दूसरों का शोषण करे।

संतश्री ने कहा कि आपका खानपान ही आपके खानदान की पहचान करवाता है। सदा वही खानपान कीजिए जो आपके खानदान को स्वस्थ और गरिमामय बनाएँ। अच्छी सेहत के पाँच मंत्र देते हुए राष्ट्र-संत ने कहा 1. सम्यक् आहार, 2. सम्यक् व्यायाम, 3. सम्यक् प्राणायाम, 4. सम्यक् ध्यान, 5. सम्यक् विश्राम। इन पाँच बातों को जीवन से जोडिए, आपको हर रोज पंचामृत पीने का आनंद मिलेगा। समारोह का षुभारंभ जयपुर के श्री प्रकाष जी, अषोक जी दफ्तरी, बड़ोदा के श्रत जी जैन, ओमप्रकाषजी-सुषीला भूतड़ा ने दीपप्रज्वलन कर किया। समारोह

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