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धर्म-अध्यात्म

बुद्धि और ज्ञान

ज्ञान के बिना कोरी बुद्धि का विकास सभ्य बर्बरता है ज्ञानी को कभी भय नहीं होता बुद्धि और ज्ञान में अंतर है। बुद्धि तर्क व भ्रम पैदा करती है, जीवन में संशय की स्थितियां बनाती है। जहां संशय व भ्रम की स्थितियां हैं, निश्चित मानिए कि वहां अज्ञान है। हम ...

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भक्ति अपने अहम् को मिटाने के लिए करना: आचार्य सुदर्शन लाल महाराज

अद्भुत चातुर्मास मुंबई मुंबई। बोरीवली पश्चिम स्थित वृंदावन वाटिका में श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई की ओर से आयोजित अद्भुत चातुर्मास में व्याख्यान देते शासन गौरव, आगम ज्ञाता, पूज्य गुरुदेव, आचार्य श्री सुदर्शन लाल जी म.सा. ने फरमाया कि भक्ति के लिए पहला ध्येय समर्पण होना चाहिए। कोई मंदिर या ...

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पितरों को जलांजलि का पक्ष पितृपक्ष

पितृपक्ष को श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं। श्राद्ध का तात्पर्य है, प्रेत और पित्त्तर के निमित्त, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक कुछ अर्पण करना। हिन्दू धर्म में माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है। इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में पितरों का उद्धार करने के लिए ...

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कारण बदलते ही राग बदल जाता है : आचार्य श्री सुदर्शन लाल जी म.सा.

जरूरत और आत्मीयता के पैमाने को समझो बदलने वाले से क्या बंधना ? श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई के तत्वावधान में बोरीवली पश्चिम के वृंदावन वाटिका में चातुर्मास कर रहे हैं आचार्य श्री सुदर्शन लाल जी म.सा. ने कहा कि जो विषयों का अनुरागी है वही पराधीन है। हर प्राणी ...

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सफेद बालों का मर्म

  मनुष्य के ही बालों के रंग बदलते हैं । मनुष्य के ही काले बाल सफेद होते हैं। जानवरों के केश परिवर्तित नहीं होते । यदि उनके बाल लाल हैं, तो मृत्यु तक वो वैसे ही रहेंगे। काले हैं तो काले ही रहेंगे। जरा सोचिए, मनुष्य के केशों में क्यों ...

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भक्ति भावना से श्रद्धालुओं ने की अनंत भगवान की पूजा, सामूहिक रूप से सुनी कथा

आज अनंत चतुर्दशी के अवसर पर पूरे देश में भक्ति भावना से भगवान विष्‍णु के अनंत रूप की पूजा विधि-विधान से की गई। इस दौरान बहुत से श्रद्धालुओं व्रत रखकर अनंत भगवान की सामूहिक रूप से कथा सुनी । पूजा और कथा सुनने के बाद श्रद्धालुओं ने अपने जीवन की ...

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विकारयुक्त विचार ही रोग है : आचार्य श्री सुदर्शनलाल जी म.सा.

समर्पण भाव ही प्रसन्नता का कारण जहां द्वैत भाव, वहां समर्पण नहीं जहां श्रद्धा एवं विश्वास है, वहां जीवन में हल्कापन है, सरलता है। आप जानते ही हैं कि भारी वस्तु ही डूबती है, हल्की नहीं। इसी भांति श्रद्धायुक्त आत्मा विभाओं से- दुष्ट-वृत्तियों से रहित होने के कारण हल्की होती ...

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सरलता के बिना साधना नहीं : आचार्य सुदर्शन लाल जी

अद्भुत चातुर्मास मुंबई श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई द्वारा वृंदावन वाटिका, बोरीवली पश्चिम में आयोजित चातुर्मास में व्याख्यान देते आचार्य सुदर्शन लाल जी ने फरमाया कि साधना करते ऋजुभूत यानी शांत – सरल होने पर ही धर्म टिक सकेगा। जब कोई व्यक्ति खेती करता है, तो पहले दो कार्य करता ...

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जीवन में सम्यक पुरुषार्थ करना

अद्भुत चातुर्मास मुंबई श्री प्राज्ञ जैन संघ मुंबई के तत्वावधान में बोरीवली पश्चिम के वृंदावन वाटिका में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री सुदर्शन लाल जी म.सा. ने जीवन व्यवस्थित करने के लिए समय प्रबंधन की प्रेरणा देते कहा कि साधना करनी है, तो जीवनचर्या, खानपान व्यवस्थित होने चाहिए। हमें समय ...

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पश्चाताप पुण्य का कारण बन जाता हैः आचार्य सुदर्शनलाल जी म.सा.

अद्भुत चातुर्मास मुंबई संवत्सरी पर्व पर अपने चातुर्मास स्थल बोरीवली पश्चिम के वृंदावन वाटिका में व्याख्यान देते आचार्य श्री सुदर्शन लाल जी म.सा. ने कहा  कि वर्ष का अंतिम दिन संवत्सरी है। जब काल, वातावरण और प्रकृति में बदलाव आता है। नई स्थितियों में नयापन का दिन संवत्सरी है। बदली ...

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