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साक्षात्कार

फिल्म जगत में ‘बटालियन 609’ का धमाकेदार आगाज : स्पर्श शर्मा

राजधानी दिल्ली के रहने वाले स्पर्श शर्मा थिएटर जगत का एक बड़ा जाना पहचान नाम है। कबीर सदानंद के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘गोलू और पप्पू’ में उन्होंने काम किया था. 2014 में रिलीज़ हुई इस फिल्म में डिम्पल कपाडिया, कुणाल राय कपूर, वीर दास, संदीपा धार, दीपक तिजोरी भी ...

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अनुभव सिखा जाते हैं हमें खास सबक- मनोज तिवारी

भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और सांसद तथा भोजपुरी फिल्मों के मेगास्टार तथा लोकप्रिय गायक मनोज तिवारी का बचपन तंगहाली में बीता। पिता ने दुनिया को अलविदा कहा तो परिवार को अपनी पढ़ाई के लिये संघर्ष करते देखा। वे मानते हैं कि जीवन एक पाठशाला है और अनुभव सबसे अच्छा ...

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खुद को शहजादी नहीं मानतीः सारा अली खान

मशहूर अदाकारा अमृता सिंह और अभिनेता सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान  पहली फिल्म केदारनाथ के बाद इन दिनों अपनी आगामी फिल्म सिंबा के प्रमोशन में जुटी हुई हैं। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश– – आप एक रॉयल फैमिली से बिलॉंग करती हैं। फिल्म इंडस्ट्री को ...

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निगेटिव किरदार निभाना हमेशा से मेरे लिस्ट में था : बरखा बिष्ट

लोकप्रिय टेलीविजन और बंगाली अभिनेत्री बरखा बिष्ट सेनगुप्ता जल्द ही स्टार भारत के शो काल भैरव रहस्य 2 में भैरवी की भूमिका में दिखेंगी। इस संदर्भ उन्होंने विस्तार बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश-   काल भैरव रहस्य 2 में अपने किरदार के बारे में कुछ बताइए? – मैं भैरवी ...

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नैसर्गिक प्रतिभा की धनी हेमा सरदेसाई

अश्वनी राय जीवन में सफलता के सभी अपेक्षित गुणों के संगम का नाम है हेमा सरदेसाई। उनमें अपने काम के प्रति लगन और लक्ष्य तक हर हाल में पहुंचने का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है। संगीत के क्षेत्र में अब तक की उनकी उपलब्धियां हेमा सरदेसाई की कड़ी मेहनत ...

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रामायण को एक अलग अन्दाज़ में लेकर आ रहे हैं सन्नी मंडावरा

रामायण को क़रीब 19 अलग अलग लेखकों ने 13 अलग- अलग देशों में अपने अपने अन्दाज़ में लिखा है। हर खंड को अपने अन्दाज़ में पेश किया है। कहीं रावण दुराचारी दिखते हैं तो कही कहीं रावण बहुत ही धार्मिक, बुद्धिशाली और पराक्रमी। कही- कहीं तो रावण को महान भक्त ...

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मेरी माँ ने बहुत उम्दा परवरिश की है – काजोल

हेलीकाप्टर ईला नाम कैसे पड़ा ? अरे अजय देवगन के प्रोडक्शन में फिल्म बनी है , वो खुद मोटर साइकिल लेकर आये थे, फिर घोड़ों पर आये, तो उसी हिसाब से अब हेलीकाप्टर ईला आ रही है. वैसे जो भागती दौड़ती माँ होती है, उन्हें हेलीकाप्टर मॉम कहते हैं, वहीँ ...

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मैं आज भी गाँव वाला धर्मेंद्र हूँ

फिल्म इंडस्ट्री का बदलाव कैसे देखते हैं ? हर दौर अच्छा है, मुझे फिल्म शब्द से मोहब्बत है, हरेक दौर बढ़िया रहा है, आज के दौर की भी खूबियां हैं, इसका अपना ही एक कलर है, जज्बात भरे हुए हैं,ऑडिएंस के हिसाब से फिल्में बनती हैं. मुझे तो लगता है की अभी बहुत कुछ करना है . कुछ मिस करते हैं ? उस समय सब साथ शूटिंग के बाद सब साथ में बैठकर भजिये, खाना खाते थे, उस समय फेस्टिवल का माहौल हो जाता था, मिडिल क्लास का होने की वजहसे मुझे वैसा ही माहौल पसंद था. मैं आज तक नहीं बदला, मैं आज भी गाँव वाला धर्मेंद्र हूँ. मुझे मेहबूब साहब के साथ काम ना कर पाने का दुःख है ,  एक बारमैंने उन्हें वाशरूम मैन भी बात की थी , लेकिन उनके साथ काम नहीं कर पाया, वैसे ही के आसिफ साहब के साथ महंगा खून, सस्ता पानी फिल्म बनने वालीथी, लेकिन बन नहीं पायी. मेरे जैसा पवित्र रोमांस किसी और का रहा ही नहीं, मैं दिल वाला इंसान हूँ, मैंने सबसे वफ़ा की है . गुजरात में शराब बंद है ? इसीलिए हम फिल्म मैं आज भी गाँव वाला धर्मेंद्र हूँमें दमन जाकर शराब पीते हैं , फिल्म में बॉबी मुझे बॉर्डर पर दमन ले जाकर शराब पिलाता है .वैसे मेरी पहली फिल्म में तरला दलाल भीगुजरात से थी, हम दोनों एक दूसरे को दिलासा देते थे. उन्हें मिस करता हूँ. अभिनय क्या है ? एक्टिंग एक रिएक्शन होता है. मैंने कभी अभिनय नहीं सीखा, किरदार को बस अपने हिसाब से ही जी लेता था. आजकल के एक्टर्स को कैसे देखते हैं ? रणवीर सिंह, रणबीर कपूर, के साथ साथ आमिर खान की दंगल भी देखी, क्या अभिनेता हैं, ग़जब के हैं , मैं उनको सैल्यूट   करता हूँ. आपकी फिल्मों का चयन कैसे रहा ? मुझे समय-समय पर स्टोरी, स्क्रीनप्ले और अच्छे डायरेक्टर मिले, जिसकी वजह से मैंने बढ़िया काम किया. सनी  और बॉबी देओल के करियर के बारे में बताएं ? मैंने सनी की पहली फिल्म बेताब के एक- एक हिस्से को देखा है , वो बहुत ही इमोशनल लड़का है , बोलता नहीं है. मैं हमेशा उससे कहता हूँ की मुझे बता दिया कर. बॉबी की सारी फिल्में रोमांटिक थी.बॉबी हैंडसम लगता है. रोमांस के दौरान एक्शन गायब हो जाता है.ग़दर में भी सनी रोमांस के पल में ज्यादा है. रेखा जी और शत्रुघ्न के साथ काम कर रहे हैं ? ऐसा लगा उस दिन की शूटिंग में लाइफ आ गयी थी. सनी ने मुझसे कहा कि पापा हमें शत्रुघ्न जी के साथ काम करना चाहिए. वो दिन अलग ही हुआ करते थे. आपकी बायोपिक बनेगी तो आप करने देंगे ? मैंने सोचा नहीं ज्यादा,  मुझे कमर्शियल चीज़ें कम समझ आती हैं. अभी कोई प्लान नहीं है. वक्त आएगा तो पता चलेगा. मेरे जैसा पवित्र रोमांस किसी और का रहा ही नहीं, मैं दिल वाला इंसान हूँ, मैंने सबसे वफ़ा की है . हेमा जी के साथ काम करना चाहेंगे ? अभी कहानियां ढूंढना मुश्किल है, उस समय 25 फिल्में एक साथ गोल्डन जुबली हो गयी थी . हृषिकेश मुखर्जी के बारे में क्या कहेंगे ? दोस्त, भाई, मास्टर सबकुछ थे, उनके जैसा इंसान नहीं देखा, जब वो बीमार पड़े थे तो उन्होंने कहा कि मेरी हाथ की नदी निकाल दो धरम ..( ये कहते हुए धरमजी इमोशनल हो गए) स्ट्रगल को कैसे देखते हैं ? मैं पैदल चलता था, खाड़ी क्रॉस करके आया- जाया करता था , जुहू में एक झोपडी पर बैठा रहता था और सोचता था की कुछ खरीदूंगा . साल 1959 का ये जिक्र है. तब पाली हिल, खार सबकुछ खाड़ी हुआ करती थी . ऊपरवाले ने शायद ये सबकुछ देखा होगा. मेरा स्ट्रगल और मेरी ग़ुरबत ही मेरा फक्र है. जिंदगी अपने आप में स्ट्रगल है .ये एक जंग जैसी ही है. आपके लिए रोमांस क्या है ? एक नेक रूह का एक नेक रूह से मिलना होता है ...

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एक मुलाकात बॉबी देओल के साथ

‘यमला पगला दीवाना फिर से’  की शुरुआत कैसे हुयी ? बस जिस तरह से पहले और दुसरे पार्ट की शुरुआत हुयी थी, भैया और पापा ने प्लान किया की तीसरे पार्ट की कहानी मिलते ही , फिल्म की शुरुआत कर देंगे,वैसा ही हुआ. हम लोगों ने कहानी पर काम किया और फिर शूटिंग स्टार्ट हो गयी. पापा और भाई के साथ फिर से काम करना ? बहुत ही अच्छा लगता है जब भी मैं पापा और भैया के साथ सेट पर रहता हूँ, अलग तरह की फीलिंग आती है और सबकुछ पारिवारिक माहौल के जैसा हीलगता है . बीच में 4 साल का गैप भी आया ? मुझे शुरू से यह पता था कि मेरे लिए सनी देओल का भाई होना और धर्मेंद्र का बेटा होना काफी नहीं है, मुझे खुद को साबित करना पड़ेगा, लक भी एक समयतक ही साथ देता है, मेहनत सबसे जरूरी है. अब धर्मेंद्र का बेटा हूं तो मुझे काम मिलता रहेगा ऐसा नहीं होता, मेरी गलती यह थी कि काम से मेरा फोकस हटगया था, फोकस हटने की वजह थी, अच्छी फिल्मों का ऑफर न आना. उन दिनों मैं अजीब सी फिल्मों में काम कर रहा था और खुद से गुस्सा भी हो रहा था,शराब का शौक भी लग गया था तो शराब भी खूब पीने लगा था. हम इंसान ही हैं इसलिए गलतियां हुई हैं, लेकिन अब गलतियों से सीखकर आगे बढ़ रहा हूं,अब लोगों की आंखो में जब खुद के लिए प्यार, सम्मान, खुशी और सराहना देखता हूं तो और भी ताकत मिलती है, लोगों की नजरों में यह प्यार और सम्मानबना रहे इस लिए और ज्यादा कड़ी मेहनत करता हूं. सलमान खान और बाकी कलाकारों ने फिल्म में कैमियो किया है ? हाँ, मैं सलमान खान के साथ फिल्म रेस 3 की शूटिंग कर रहा था, इस दौरान मैंने सलमान खान से पूछा कि क्या वह हमारी फिल्म में मेहमान कलाकार केरूप में काम करना चाहेंगे , इस पर सलमान खान तुरंत तैयार हो गए, इसका एक कारण उसका मेरे पिता धर्मेंद्र जी से बेहद प्यार करना भी है और मैं आपकोयह भी बताना चाहता हूँ कि सलमान खान के कारण ही फिल्म में रेखा, शत्रुघ्‍न सिन्हा और सोनाक्षी सिन्हा भी उसी गाने में परफॉर्म करने के लिए तैयार हो गए. सलमान ने ही आपका नाम रेस ३ के लिए भी दिया था ? जी, और जब मैंने फिल्म रेस 3 में काम देने के लिए सलमान खान को धन्यवाद दिया तो इस पर सलमान ने मेरा धन्यवाद स्वीकार करने के बजाय कहा किवह वाकई मुझे फिल्म में कास्ट चाहते थे, उनका बेहद शुक्रगुजार हूँ. जब पहली बार मैंने रेस 3 में अपनी शर्ट उतारी तो लोगों ने मुझे देखा और उन्हें बहुतअच्छा लगा, सलमान मदद करने के बाद भी कभी उसका क्रेडिट नहीं लेते हैं, सलमान ऐसे ही इंसान हैं. सलमान खान अभी भी टच में हैं ? सलमान खान मेरे लिए बड़े भाई सनी देओल के समान ही है, वह आज भी मुझे कभी-कभी फोन कर लेते हैं ,इसके अलावा वह कभी-कभी मेरे जिम ट्रेनर कोभी कॉल कर मेरे बारे में पूछते है कि बॉबी देओल ठीक से जिम आ रहा है या नहीं. क्या आपको लीड रोल का इन्तजार है ? जी ऐसा नहीं है, मुझे इस समय अच्छे और मजबूत किरदारों की तलाश हैं। किसी फिल्म में लीड रोल हो या नहीं उससे कोई फर्क नहीं पड़ता, अच्छा रोल हुआतो वेब सीरीज भी करना चाहूंगा. मैं वही फिल्म या सीरीज करना चाहता हूं, जिसे पूरा परिवार एक साथ देख सके, कोई डार्क सिनेमा ऑफर हुआ और बहुत हीदिलचस्प किरदार लगा तो मैं सोचूंगा उसके बारे में। किस तरह की फिल्मों का इन्तजार है ? अभी  मैं सिर्फ कमर्शियल सिनेमा की ओर ध्यान दे रहा हूं क्योंकि फिलहाल लोग मुझे उसी तरह के सिनेमा में देखना चाहते हैं, मेरे फैंस मुझे सिर्फ ग्लैमरवाले रोल में देखना चाहते हैं, वो कहते हैं कि आप बिच्छू, बरसात, गुप्त, सोल्जर, हमराज, अजनबी और बादल जैसी फिल्में करिए, मैं उन्हें जवाब में कहता हूंकि अब वैसी फिल्म मिलेगी तभी तो करूंगा.

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फिल्म देख कर मर्द को दर्द होगा – श्रद्धा कपूर

फिल्म स्त्री  कैसी है  ? यह स्त्री लोगों को डराना भी चाहती है। उनका मनोरंजन भी करना चाहती है। यह एक हॉरर कॉमिडी फिल्म है। मैं पहली बार ऐसी फिल्म का हिस्सा बनी हूं। इसमें एक मेसेज भीहै, लेकिन उसे भाषण की तरह नहीं दिखाया गया है। इसका कॉन्सेप्ट ही बहुत इंट्रेस्टिंग है। क्या मर्द को फिल्म देख के दर्द होगा ?  इस फिल्म में मर्द को दर्द होगा। हमने एक छोटे से शहर चंदेरी में केवल 40 दिनों में यह फिल्म शूट की। वहां फिल्म शूट करते हुए मुझे बहुत अच्छा लगा, क्योंकि शहर कीभागमभाग से भी एक ब्रेक मिला। आपने चंदेरी से कुछ खरीदा ? मैंने मां, मासी, लता जी, आशा जी, मीना जी और ऊषा जी सबके लिए चंदेरी साड़ियां भी खरीदीं। राजकुमार राव और पंकज त्रिपाठी के साथ काम करना कैसा रहा ? बहुत ही बढ़िया रहा, राजकुमार एक मंझे हुए एक्टर हैं, साथ ही पंकज जी की मौजूदगी से सेट पर माहौल बड़ा ही बेहतरीन रहता था, लगा ही नहीं की हम लोग शूटिंग कर रहे थे. हीरो हिरोईन की फीस के बारे में क्या कहेंगी ? मुझे इंडस्ट्री की अच्छी बात यह लगती है कि आज हिरोइनों को भी इतना काम मिल रहा है। यहां हीरो वाली फिल्में हैं, तो ऐक्ट्रेसेज के लिए भी ऐसे रोल हैं, जिसमें वह अपनीछाप छोड़ सकती हैं। ऐक्ट्रेसेज के लिए हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि आजकल कॉन्टेंट वाली फिल्में चल रही हैं, जो इंडस्ट्री और हम सबकेलिए बहुत अच्छा दौर है। चंदेरी में कुछ भूतिया घटनाएं भी हुयी ? रात में शूटिंग को लेकर चंदेरी के लोगों ने टीम को हिदायत दी थी कि वे सूनसान सड़क पर रात को शूट न करें। हालांकि, टाइट शेड्यूल की वजह से टीम ने इस हिदायत कोनजरअंदाज कर दिया और रात को तय सड़क पर शूटिंग शुरू की लेकिन शूटिंग में उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अनुष्का प्रोडूसर बन गयी हैं, आपका क्या प्लान है ? मेरा मानना है कि अगर किसी को प्रड्यूसर बनना है, तो उन्हें जरूर बनना चाहिए। यह दूसरों के लिए बहुत इंस्पायरिंग है। मैं अपनी बात करूं तो मुझे नहीं लगता कि मैंप्रोड्यूसर बनना चाहूंगी। क्लोदिंग लाइन का भी कोई इरादा नहीं है। अभी मैं जो ब्रैंड्स मैं इंडॉर्स कर रही हूं, उसमें ही खुश हूं। अभी मैं सिर्फ अच्छे काम करने पर फोकस करनाचाहती हूं। अच्छी और यादगार फिल्मों का हिस्सा बनना चाहती हूं। फिल्म के ना चल पाने का दुःख होता है ? यह हिस्सा है हमारे प्रफेशन का। उतार-चढ़ाव तो आना ही है। उसके साथ-साथ लोगों का नजरिया भी बदलता है, लेकिन यह हमारे पेशे का हिस्सा है। मैं खुशकिस्मती यह है किमेरे पास इतनी सारी अच्छी फिल्में हैं। ‘साहो’ के अलावा मेरे लिए फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ भी बहुत खास है। वहीं, साइना नेहवाल की बॉयापिक के लिए अभी ट्रेनिंग चलरही है। उसकी शूटिंग अगले महीने शुरू होगी।

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